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  यः/SN अयम्/SNV योगः/NP अध्यायद्वयेन/SMK उक्तः/KN ज्ञाननिष्ठालक्षणः/NP ,/PUNC ससंन्यासः/NP कर्मयोगोपायः/NP ,/PUNC यस्मिन्/SN वेदार्थः/NP परिसमाप्तः/KN ,/PUNC प्रवृत्तिलक्षणः/NP निवृत्तिलक्षणः/NP च/APY गीतासु/NS च/AVK सर्वासु/SN अयम्/SNV एव/INTF योगः/NP विवक्षितः/KN भगवता/NP ।/PUNC अतः/A परिसमाप्तम्/KN वेदार्थम्/NP मन्वानः/KN ,/PUNC तम्/SN वंशकथनेन/NP स्तौति/KP श्रीभगवान्/NP -/PUNC 
श्रीभगवान्/NP उवाच/KP
इमम्/SN विवस्वते/NP योगम्/NP प्रोक्तवान्/KN अहम्/SN अव्ययम्/NP ।/PUNC
विवस्वान्/NV मनवे/NS प्राह/KP मनुः/NS इक्ष्वाकवे/NS अब्रवीत्/KP ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 1/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 1/PUNC ।।/PUNC -/PUNC इमम्/SNV अध्यायद्वयेन/SMK उक्तम्/KN योगम्/NP विवस्वते/NV आदित्याय/NP सर्गादौ/A प्रोक्तवान्/KN अहम्/SN जगत्/NP परिपालयितॄणाम्/NP क्षत्रियाणाम्/NS बलाधानाय/NP तेन/SN योगबलेन/NP युक्ताः/KN समर्थाः/NP भवन्ति/KP ब्रह्म/NS परिरक्षितुम्/KKS ।/PUNC ब्रह्मक्षत्रे/NP परिपालिते/KN जगत्/NP परिपालयितुम्/KKS अलम्/A ।/PUNC अव्ययम्/NP अव्ययफलत्वात्/NP ।/PUNC न/AN हि/A अस्य/SNV योगस्य/NP सम्यक्/NV दर्शननिष्ठालक्षणस्य/NP मोक्षाख्यम्/NP फलम्/NP व्येति/KP ।/PUNC सः/SN च/AVK विवस्वान्/NV मनवे/NS प्राह/KP ।/PUNC मनुः/NS इक्ष्वाकवेः/NS स्वपुत्राय/NP आदिराजाय/NP अब्रवीत्/KP ।।/PUNC 
एवम्/AUD परम्पराप्राप्तम्/KN इमम्/SNV राजर्षयः/NP विदुः/KP ।/PUNC
सः/SN कालेन/NP इह/A महता/NV योगः/NP नष्टः/KN परन्तप/NS ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 2/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 2/PUNC ।।/PUNC -/PUNC एवम्/AUD क्षत्रियपरम्पराप्राप्तम्/KN इमम्/SNV राजर्षयः/NP राजानः/NP च/APY ते/SNV ऋषयः/NP च/APY राजर्षयः/NP विदुः/KP इमम्/SNV योगम्/NP ।/PUNC सः/SN योगः/NP कालेन/NP इह/A महता/NV दीर्घेण/NV नष्टः/KN विच्छिन्नसम्प्रदायः/NP संवृत्तः/KN ।/PUNC हे/ASMB परंतप/NS ,/PUNC आत्मनः/NP विपक्षभूताः/KN परा/A इति/AUD उच्यन्ते/KP ,/PUNC तान्/SN शौर्यतेजोगभस्तिभिः/NP भानुः/NP इव/ASD तापयति/KP इति/AUD परंतपः/NS शत्रुतापनः/NP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC
दुर्बलान्/NP अजितेन्द्रियान्/NP प्राप्य/KKS नष्टम्/KN योगम्/NP इमम्/SN उपलभ्य/KKS लोकम्/NP च/AVK अपुरुषार्थसंबन्धिनम्/NP -/PUNC
सः/SN एव/INTF अयम्/SN मया/SN ते/SN अद्य/A योगः/NP प्रोक्तः/KN पुरातनः/NP ।/PUNC
भक्तः/KN असि/KP मे/SN सखा/NP च/AVK इति/AUD रहस्यम्/NP हि/A एतत्/SNV उत्तमम्/NP ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 3/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 3/PUNC ।।/PUNC -/PUNC सः/SN एव/INTF अयम्/SN मया/SN ते/SN तुभ्यम्/SN अद्य/A इदानीम्/A योगः/NP प्रोक्तः/KN पुरातनः/NV भक्तः/NP असि/KP मे/SN सखा/NP च/AVK असि/KP इति/AUD ।/PUNC रहस्यम्/NP हि/A यस्मात्/SN तत्/SNV उत्तमम्/NV योगः/NP ज्ञानम्/NP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC
भगवता/NP विप्रतिषिद्धम्/KN उक्तम्/KN इति/AUD मा/AN भूत्/KP कस्यचित्/SNV बुद्धिः/NP इति/AUD परिहारार्थम्/NP चोद्यम्/NP इव/ASD कुर्वन्/KNV अर्जुनः/NS उवाच/KP -/PUNC
अर्जुनः/NS उवाच/KP
अपरम्/SN भवतः/SN जन्म/NP परम्/NV जन्म/NP विवस्वतः/NS ।/PUNC 
कथम्/A एतत्/SN विजानीयाम्/KP त्वम्/SN आदौ/A प्रोक्तवान्/KN इति/AUD ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 4/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 4/PUNC ।।/PUNC -/PUNC अपरम्/SN अर्वाक्/NP वसुदेवगृहे/NP भवतः/SN जन्म/NP ।/PUNC परम्/A पूर्वम्/A सर्गादौ/NP जन्म/NP उत्पत्तिः/NP विवस्वतः/NS आदित्यस्य/NS ।/PUNC तत्/SNV कथम्/NP एतत्/SN विजानीयाम्/KP अविरुद्धार्थतया/NP ,/PUNC यः/SSN त्वम्/SN एव/INTF आदौ/A प्रोक्तवान्/KN इमम्/SNV योगम्/NP सः/SSN एव/INTF इदानीम्/A मह्यम्/SN प्रोक्तवान्/KN असि/KP इति/AUD ।।/PUNC
या/SSN वासुदेवे/NS अनीश्वरासर्वज्ञाशङ्का/NP मूर्खाणाम्/NP ,/PUNC ताम्/SSN परिहरन्/KNV श्रीभगवान्/NP उवाच/KP ,/PUNC यदर्थः/NP हि/A अर्जुनस्य/NS प्रश्नः/NP -/PUNC
श्रीभगवान्/NP उवाच/KP -/PUNC
बहूनि/NV मे/SN व्यतीतानि/KP जन्मानि/NP तव/SN च/AVK अर्जुन/NS ।/PUNC
तानि/SN अहम्/SN वेद/NS सर्वाणि/SN न/AN त्वम्/SN वेत्थ/KP परन्तप/NS ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 5/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 5/PUNC ।।/PUNC -/PUNC बहूनि/NV मे/SN मम/SN व्यतीतानि/KP अतिक्रान्तानि/KP जन्मानि/NP तव/SN च/AVK हे/ASMB अर्जुन/NS ।/PUNC तानि/SN अहम्/SN वेद/KP जाने/KP सर्वाणि/SN न/AN त्वम्/SN वेत्थ/KP न/AN जानीषे/KP ,/PUNC धर्माधर्मादिप्रतिबद्धज्ञानशक्तित्वात्/NP ।/PUNC अहम्/SN पुनः/A नित्यशुद्धबुद्धमुक्तस्वभावत्वात्/NP अनावरणज्ञानशक्तिः/NP इति/AUD वेदः/KP अहम्/SN हे/ASMB परंतप/NS ।।/PUNC
कथम्/A तर्हि/A तव/SN नित्येश्वरस्य/NP धर्माधर्माभावे/NP अपि/AVK जन्म/NP इति/AUD ,/PUNC उच्यते/KP -/PUNC
अजः/NV अपि/AVK सन्/KKS अव्ययात्मा/NV भूतानाम्/NP ईश्वरः/NP अपि/AVK सन्/KKS ।/PUNC
प्रकृतिम्/NP स्वाम्/SN अधिष्ठाय/NP संभवामि/KP आत्ममायया/NP ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 6/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 6/PUNC ।।/PUNC -/PUNC अजः/NV अपि/AVK जन्मरहितः/KN अपि/AVK सन्/KKS ,/PUNC तथा/AVK अव्ययात्मा/NV अक्षीणज्ञानशक्तिस्वभावः/NV अपि/AVK सन्/KKS ,/PUNC तथा/AVK भूतानाम्/NP ब्रह्मादिस्तम्बपर्यन्तानाम्/NV ईश्वरः/NP ईशनशीलः/NV अपि/AVK सन्/KKS ,/PUNC प्रकृतिम्/NP स्वाम्/SN मम/SN वैष्णवीम्/NV मायाम्/NP त्रिगुणात्मिकाम्/NV ,/PUNC यस्याः/SN वशे/NP सर्वम्/SNV जगत्/NP वर्तते/KP ,/PUNC यया/SN मोहितम्/KN सत्/A स्वमात्मानम्/NP वासुदेवम्/NS न/AN जानाति/KP ,/PUNC ताम्/SNV प्रकृतिम्/NP स्वाम्/SN अधिष्ठाय/NP वशीकृत्य/KKS सम्भवामि/KP देहवान्/KN इव/ASD भवामि/KP जातः/KN इव/ASD आत्ममायया/NP आत्मनः/NP मायया/NP ,/PUNC न/AN परमार्थतः/KN लोकवत्/ASD ।।/PUNC
तत्/SNV च/AVK जन्म/NP कदा/A किमर्थम्/NP च/AVK इति/AUD उच्यते/KP -/PUNC
यदा/A यदा/DV हि/A धर्मस्य/NP ग्लानिः/NP भवति/KP भारत/NS ।/PUNC
अभ्युत्थानम्/NP अधर्मस्य/NP तदा/A आत्मानम्/NP सृजामि/KP अहम्/SN ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 7/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 7/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यदा/A यदा/DV हि/A धर्मस्य/NP ग्लानिः/NP हानिः/NP वर्णाश्रमादिलक्षणस्य/NP प्राणिनाम्/NP अभ्युदयनिः/NP श्रेयससाधनस्य/NP भवति/KP भारत/NS ,/PUNC अभ्युत्थानम्/NP उद्भवः/NP अधर्मस्य/NP ,/PUNC तदा/A तदा/DV आत्मानम्/NP सृजामि/KP अहम्/SN मायया/NP ।।/PUNC
किमर्थम्/NP ?/PUNC -/PUNC
परित्राणाय/NP साधूनाम्/NP विनाशाय/NP च/APY दुष्कृताम्/NP ।/PUNC
धर्मसंस्थापनार्थाय/NP सम्भवामि/KP युगे/NP युगे/DV ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 8/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 8/PUNC ।।/PUNC -/PUNC परित्राणाय/NP परिरक्षणाय/NP साधूनाम्/NP सन्मार्गस्थानाम्/NP ,/PUNC विनाशाय/NP च/APY दुष्कृताम्/NP पापकारिणाम्/NP ,/PUNC किम्/SN च/APY धर्मसंस्थापनार्थाय/NP धर्मस्य/NP सम्यक्/NV स्थापनम्/NP तदर्थम्/NP सम्भवामि/KP युगे/NP युगे/DV प्रति/AUP युगम्/NP ।।/PUNC
तत्/SN -/PUNC
जन्म/NP कर्म/NP च/APY मे/SN दिव्यम्/NP एवम्/INTF यः/SN वेत्ति/KP तत्त्वतः/KN ।/PUNC
त्यक्त्वा/KKS देहम्/NP पुनर्जन्म/NP न/AN एति/KP माम्/SN एति/KP सः/SN अर्जुन/NS ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 9/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 9/PUNC ।।/PUNC -/PUNC जन्म/NP मायारूपम्/NV कर्म/NP च/APY साधूनाम्/NP परित्राणादि/NP मे/SN मम/SN दिव्यम्/NV अप्राकृतम्/NV ऐश्वरम्/NP एवम्/INTF यथा/ASD उक्तम्/KN यः/SN वेत्ति/KP तत्त्वतः/KN तत्त्वेन/NP यथावत्/ASD त्यक्त्वा/KKS देहम्/NP इमम्/SNV पुनर्जन्म/NP पुनः/A उत्पत्तिम्/NP न/AN एति/KP न/AN प्राप्नोति/KP ।/PUNC माम्/SN एति/KP आगच्छति/KP सः/SN मुच्यते/KP हे/ASMB अर्जुन/NS ।।/PUNC
न/AN एषः/SNV मोक्षमार्गः/NP इदानीम्/A प्रवृत्तः/KN ;/PUNC किम्/SN तर्हि/A ?/PUNC पूर्वम्/A   अपि/A -/PUNC
वीतरागभयक्रोधाः/NP मन्मया/SN माम्/SN उपाश्रिताः/KN ।/PUNC
बहवः/NV ज्ञानतपसा/NP पूता/KN मद्भावम्/NP आगताः/KN ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 10/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 10/PUNC ।।/PUNC -/PUNC वीतरागभयक्रोधाः/NP रागः/NP च/APY भयम्/NP च/APY क्रोधः/NP च/APY वीताः/KN विगताः/KN येभ्यः/SN ते/SNV वीतरागभयक्रोधाः/NP मन्मयाः/SN ब्रह्मविदः/NP ईश्वराभेददर्शिनः/NP माम्/SN एव/INTF च/AVK परमेश्वरम्/NP उपाश्रिताः/KN केवलज्ञाननिष्ठाः/NP इत्यर्थः/NP ।/PUNC बहवः/NV अनेके/NV ज्ञानतपसा/NP ज्ञानम्/NP एव/INTF च/AVK परमात्मविषयम्/NV तपः/NP तेन/SN ज्ञानतपसा/NP पूताः/KN पराम्/NV शुद्धिम्/NP गताः/KN सन्तः/KN मद्भावम्/NP ईश्वरभावम्/NP मोक्षम्/NP आगताः/KN समनुप्राप्ताः/KN ।/PUNC इतरतपोनिरपेक्षज्ञाननिष्ठाः/NP इत्यस्य/NP लिङ्गम्/NP '/PUNC ज्ञानतपसा/NP '/PUNC इति/AUD विशेषणम्/NP ।।/PUNC
तव/SN तर्हि/A रागद्वेषौ/NP स्तः/KN ,/PUNC येन/SN केभ्यश्चित्/SN एव/INTF आत्मभावम्/NP प्रयच्छसि/KP न/AN सर्वेभ्यः/SN इति/AUD उच्यते/KP -/PUNC
ये/SN यथा/AVK माम्/SN प्रपद्यन्ते/KP तान्/SN तथा/AVK एव/INTF भजामि/KP अहम्/SN ।/PUNC
मम/SN वर्त्म/NP अनुवर्तन्ते/KP मनुष्याः/NP पार्थ/NS सर्वशः/A ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 11/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 11/PUNC ।।/PUNC -/PUNC ये/SN यथा/AVK येन/SNV प्रकारेण/NP येन/SNV प्रयोजनेन/NP यत्फलार्थितया/NP माम्/SN प्रपद्यन्ते/KP तान्/SN तथा/AVK एव/INTF तत्फलदानेन/NP भजामि/KP अनुगृह्णामि/KP अहम्/SN इति/AUD एतत्/SN ।/PUNC तेषाम्/SN मोक्षम्/NP प्रति/AUP अनर्थित्वात्/NP ।/PUNC न/AN हि/A एकस्य/SMKY मुमुक्षुत्वम्/NP फलार्थित्वम्/NP च/APY युगपत्/A सम्भवति/KP ।/PUNC अतः/A ये/SNV फलार्थिनः/NP तान्/SN फलप्रदानेन/NP ,/PUNC ये/SN यथा/AVK उक्तकारिणः/NP तु/A अफलार्थिनः/NP मुमुक्षवः/NP च/APY तान्/SN ज्ञानप्रदानेन/NP ,/PUNC ये/SNV ज्ञानिनः/NP संन्यासिनः/NP मुमुक्षवः/NP च/APY तान्/SN मोक्षप्रदानेन/NP ,/PUNC तथा/AVK आर्तान्/NP आर्तिहरणेन/NP इति/AUD एवम्/INTF यथा/AVK प्रपद्यन्ते/KP ये/SN तान्/SN तथा/AVK एव/INTF भजामि/KP इत्यर्थः/NP ।/PUNC न/AN पुनः/A रागद्वेषनिमित्तम्/KN मोहनिमित्तम्/KN वा/APY कञ्चित्/A भजामि/KP ।/PUNC सर्वथापि/A सर्वावस्थस्य/NP मम/SNV ईश्वरस्य/NP वर्त्म/NP मार्गम्/NP अनुवर्तन्ते/KP मनुष्याः/NP -/PUNC यत्फलार्थितया/NP यस्मिन्/SNV कर्मणि/NP अधिकृताः/KN ये/SSN प्रयतन्ते/KP ते/SSN मनुष्याः/NP अत्र/A उच्यन्ते/KP -/PUNC हे/ASMB पार्थ/NS सर्वशः/A सर्वप्रकारैः/NP ।।/PUNC
यदि/A तव/SN ईश्वरस्य/NP रागादिदोषाभावात्/NP सर्वप्राणिषु/NP अनुजिघृक्षायाम्/NP तुल्यायाम्/NP सर्वफलप्रदानसमर्थे/NP चAVK त्वयि/SN सति/A '/PUNC वासुदेवः/NS सर्वम्/SN '/PUNC इति/AUD ज्ञानेन/NP एव/INTF मुमुक्षवः/NP सन्तः/KN कस्मात्/SN त्वाम्/SN एव/INTF सर्वे/SN न/AN प्रतिपद्यन्ते/KP इति/AUD ?/PUNC शृणु/KP तत्र/A कारणम्/NP -/PUNC
काङ्क्षन्तः/KN कर्मणाम्/NP सिद्धिम्/NP यजन्तः/KN इह/A देवताः/NP ।/PUNC
क्षिप्रम्/NP हि/A मानुषे/NP लोके/NP सिद्धिः/NP भवति/KP कर्मजा/NP ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 12/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 12/PUNC ।।/PUNC -/PUNC काङ्क्षन्तः/KN अभीप्सन्तः/KN कर्मणाम्/NP सिद्धिम्/NP फलनिष्पत्तिम्/NP प्रार्थयन्तः/KN यजन्ते/KP इह/A अस्मिन्/SNV लोके/NP देवताः/NP इन्द्राग्न्याद्याः/NS ;/PUNC '/PUNC अथ/A यः/SN अन्याम्/SNV देवताम्/NP उपास्ते/KP अन्यः/SN असौ/KP अन्यः/SN अहम्/SN अस्मि/KP इति/AUD न/AN सः/SN वेदः/KP यथा/ASD पशुरेवम्/AUD सः/SN देवानाम्/NP (/PUNC बृ0/NS उ0/NS 1/PUNC ./PUNC 4/PUNC ./PUNC 10/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD श्रुतेः/NS ।/PUNC तेषाम्/SN हि/A भिन्नदेवतायाजिनाम्/NP फलाकाङ्क्षिणाम्/NP क्षिप्रम्/NP शीघ्रम्/NP हि/A यस्मात्/SN मानुषे/NV लोके/NP ,/PUNC मनुष्यलोके/NP हि/A शास्त्राधिकारः/NP ।/PUNC '/PUNC क्षिप्रम्/NP हि/A मानुषे/NV लोके/NP '/PUNC इति/AUD विशेषणात्/NP अन्येषु/SN अपि/A कर्मफलसिद्धिम्/NP दर्शयति/KP भगवान्/NP ।/PUNC मानुषे/NV लोके/NP वर्णाश्रमादिकर्माणि/NP इति/AUD विशेषः/NP ,/PUNC तेषाम्/SN च/AVK वर्णाश्रमादि/A अधिकारिकर्मणाम्/NP फलसिद्धिः/NP क्षिप्रम्/KV भवति/KP ।/PUNC कर्मजा/NP कर्मणः/NP जाता/KN ।।/PUNC
मानुषे/NP एव/INTF लोके/NP वर्णाश्रमादिकर्माधिकारः/NP ,/PUNC न/AN अन्येषु/SNV लोकेषु/NP इति/AUD नियमः/NP किम्/SN निमित्तः/KN इति/AUD ?/PUNC अथवा/A वर्णाश्रमादिप्रविभागोपेताः/KN मनुष्याः/NP मम/SN वर्त्म/NP अनुवर्तन्ते/KP सर्वशः/A इति/AUD उक्तम्/KN ।/PUNC कस्मात्/SN पुनः/A कारणात्/NP नियमेन/NP तव/SN एव/INTF वर्त्म/NP अनुवर्तन्ते/KP न/AN अन्यस्य/SN इति/AUD ?/PUNC उच्यते/KP -/PUNC
चातुर्वर्ण्यम्/NP मया/SN सृष्टम्/KN गुणकर्मविभागशः/NP ।/PUNC
तस्य/SN कर्तारम्/NP अपि/AVK माम्/SN विद्ध्यकर्तारम्/NP अव्ययम्/NP ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 13/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 13/PUNC ।।/PUNC -/PUNC चत्वारः/SMKY एव/INTF वर्णाः/NP चातुर्वर्ण्यम्/NP मया/SN ईश्वरेण/NP सृष्टम्/KN उत्पादितम्/KN ,/PUNC '/PUNC ब्राह्मणः/NS अस्य/SN मुखम्/NP आसीत्/KP '/PUNC इत्यादि/A श्रुतेः/NS ।/PUNC गुणकर्मविभागशः/NP गुणविभागशः/NP कर्मविभागशः/NP च/APY ।/PUNC गुणाः/NP सत्त्वरजस्तमांसि/NS ।/PUNC तत्र/A सात्त्विकस्य/NV सत्त्वप्रधानस्य/NV ब्राह्मणस्य/NS '/PUNC शमः/NP दमः/NP तपः/NP '/PUNC इत्यादीनि/A कर्माणि/NP ,/PUNC सत्त्वोपसर्जनरजःप्रधानस्य/NV क्षत्रियस्य/NS शौर्यतेजःप्रभृतीनि/ASD कर्माणि/NP ,/PUNC तमउपसर्जनरजःप्रधानस्य/NV वैश्यस्य/NS कृष्यादीनि/A कर्माणि/NP ,/PUNC रजउपसर्जनतमःप्रधानस्य/NV शूद्रस्य/NS शुश्रूषा/NP एव/INTF कर्म/NP इति/AUD  एवम्/AUD गुणकर्मविभागशः/NP चातुर्वर्ण्यम्/NP मया/SN सृष्टम्/KN इत्यर्थः/NP ।/PUNC तत्/SN च/AVK इदम्/SNV चातुर्वर्ण्यम्/NP न/AN अन्येषु/SNV लोकेषु/NP ,/PUNC अतः/A मानुषे/NV लोके/NP इति/AUD विशेषणम्/NP ।/PUNC हन्त/ABS तर्हि/A चातुर्वर्ण्यस्य/NP सर्गादेः/A कर्मणः/NP कर्तृत्वात्/NP तत्/SNV फलेन/NP युज्यसे/KP ,/PUNC अतः/A न/AN त्वम्/SN नित्यमुक्तः/KN नित्येश्वरः/NP च/AVK इति/AUD ?/PUNC उच्यते/KP -/PUNC यद्यपि/AVK मायासंव्यवहारेण/NP तस्य/SN कर्मणः/NP कर्तारम्/NP अपि/A सन्तम्/A माम्/SN परमार्थतः/KN विद्धि/KP अकर्तारम्/NP ।/PUNC अतः/A एव/INTF अव्ययम्/NV असंसारिणम्/NV च/AVK माम्/SN विद्धि/KP ।।/PUNC
येषाम्/SN तु/A कर्मणाम्/NP कर्तारम्/NP माम्/SN मन्यसे/KP परमार्थतः/KN तेषाम्/SN अकर्ता/NP एव/INTF अहम्/SN ,/PUNC यतः/KN -/PUNC
न/AN माम्/SN कर्माणि/NP लिम्पन्ति/KP न/AN मे/SN कर्मफले/NP स्पृहा/NP ।/PUNC
इति/AUD माम्/SN यः/SN अभिजानाति/KP कर्मभिः/NP न/AN सः/SN बध्यते/KP ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 14/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 14/PUNC ।।/PUNC -/PUNC न/AN माम्/SN तानि/SNV कर्माणि/NP लिम्पन्ति/KP देहादि/NP आरम्भकत्वेन/NP ,/PUNC अहंकाराभावात्/NP ।/PUNC न/AN च/AVK तेषाम्/SNV कर्मणाम्/NP फलेषु/NP मे/SN मम/SN स्पृहा/NP तृष्णा/NP ।/PUNC येषाम्/SN तु/A संसारिणाम्/NP '/PUNC अहम्/SN कर्ता/NP '/PUNC इति/AUD अभिमानः/NP कर्मसु/NP ,/PUNC स्पृहा/NP तत्/SNV फलेषु/NP च/AVK ,/PUNC तान्/SNV कर्माणि/NP लिम्पन्ति/KP इति/AUD युक्तम्/KN ,/PUNC तदभावात्/NP न/AN माम्/SN कर्माणि/NP लिम्पन्ति/KP ।/PUNC इति/AUD एवम्/AUD यः/SSN अन्यः/SN अपि/A माम्/SN आत्मत्वेन/NP अभिजानाति/KP '/PUNC न/AN अहम्/SN कर्ता/NP न/AN मे/SN कर्मफले/NP स्पृहा/NP '/PUNC इति/AUD सः/SN कर्मभिः/NP न/AN बध्यते/KP ,/PUNC तस्य/SN अपि/A न/AN देहाद्यारम्भकाणि/NV कर्माणि/NP भवन्ति/KP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC
'/PUNC न/AN अहम्/SN कर्ता/NP न/AN मे/SN कर्मफले/NP स्पृहा/NP '/PUNC इति/AUD -/PUNC
एवम्/AUD ज्ञात्वा/KKS कृतम्/KN कर्म/NP पूर्वैः/SN अपि/A मुमुक्षुभिः/NP ।/PUNC
कुरु/KP कर्म/NP एव/INTF तस्मात्/SN त्वम्/SN पूर्वैः/SN पूर्वतरम्/NP कृतम्/KN ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 15/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 15/PUNC ।।/PUNC -/PUNC एवम्/AUD ज्ञात्वा/KKS कृतम्/KN कर्म/NP पूर्वैः/SN अपि/A अतिक्रान्तैः/KN मुमुक्षुभिः/NP ।/PUNC कुरु/KP तेन/SN कर्म/NP एव/INTF त्वम्/SN ,/PUNC न/AN तूष्णीम्/NP आसनम्/NP न/AN अपि/AVK संन्यासः/NP कर्तव्यः/KN ,/PUNC तस्मात्/SN त्वम्/SN पूर्वैः/SN अपि/A अनुष्ठितत्वात्/NP ,/PUNC यदि/AVK अनात्मज्ञः/NV त्वम्/SN तदा/AVK आत्मशुद्ध्यर्थम्/NP ,/PUNC तत्त्ववित्/NP चेत्/A लोकसंग्रहार्थम्/NP पूर्वैः/SN जनकादिभिः/NS पूर्वतरम्/SN कृतम्/KN न/AN अधुनातनम्/NP कृतम्/KN निर्वर्तितम्/KN ।।/PUNC
तत्र/A कर्म/NP चेत्/A कर्तव्यम्/KN त्वद्वचनात्/NP एव/INTF करोमि/KP अहम्/SN ,/PUNC किम्/SN विशेषितेन/NP '/PUNC पूर्वैः/SN पूर्वतरम्/SN कृतम्/KN '/PUNC (/PUNC गीता/NS 4/PUNC ./PUNC 15/PUNC )/PUNC इति/AUD उच्यते/KP ;/PUNC यस्मात्/SN महत्/NV वैषम्यम्/NV कर्मणि/NP ।/PUNC कथम्/AP ?/PUNC -/PUNC

किम्/SN कर्म/NP किम्/SN अकर्म/NP इति/AUD कवयः/NP अपि/APY अत्र/A मोहिताः/KN ।/PUNC
तत्/SN ते/SNV कर्म/NP प्रवक्ष्यामि/KP यत्/SN ज्ञात्वा/KKS मोक्ष्यसे/KP अशुभात्/NP ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 16/PUNC ।।/PUNC

।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 16/PUNC ।।/PUNC -/PUNC किम्/SN कर्म/NP किम्/SN च/AVK अकर्म/NP इति/AUD कवयः/NP मेधाविनः/NP अपि/A अत्र/A अस्मिन्/SNV कर्मादिविषये/NP मोहिताः/KN मोहम्/NP गताः/KN ।/PUNC तत्/SN अतः/A ते/SN तुभ्यम्/SN अहम्/SN कर्म/NP अकर्म/NP च/APY प्रवक्ष्यामि/KP ,/PUNC यत्/SN ज्ञात्वा/KKS विदित्वा/KKS कर्मादि/NP मोक्ष्यसे/NP अशुभात्/NV संसारात्/NP ।।/PUNC
न/AN च/AVK एतत्/SN त्वया/SN मन्तव्यम्/KN -/PUNC कर्म/NP नाम/NP देहादिचेष्टाः/NP लोकप्रसिद्धम्/NV ,/PUNC अकर्म/NP नाम/NP तत्/SNV क्रिया/NP तूष्णीम्/NP आसनम्/KP ;/PUNC किम्/SN तत्र/A बोद्धव्यम्/NP ?/PUNC इति/AUD ।/PUNC कस्मात्/SN ,/PUNC उच्यते/KP -/PUNC
कर्मणः/NP हि/A अपि/A बोद्धव्यम्/NP बोद्धव्यम्/DV च/AVK विकर्मणः/NP ।/PUNC
अकर्मणः/NP च/AVK बोद्धव्यम्/NP गहना/NV कर्मणः/NP गतिः/NP ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 17/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 17/PUNC ।।/PUNC -/PUNC कर्मणः/NP शास्त्रविहितस्य/KN हि/A यस्मात्/SN अपि/A अस्ति/KP बोद्धव्यम्/NP ,/PUNC बोद्धव्यम्/DV च/AVK अस्ति/KP एव/INTF विकर्मणः/NP प्रतिषिद्धस्य/NP ,/PUNC तथा/AVK अकर्मणः/NP च/AVK तूष्णींभावस्य/NP बोद्धव्यम्/NP अस्ति/KP इति/AUD त्रिषु/SMKY अपि/A अध्याहारः/NP कर्तव्यः/KN ।/PUNC यस्मात्/SN गहना/NV विषमा/NV दुर्ज्ञेया/NV -/PUNC कर्मणः/NP इति/AUD उपलक्षणार्थम्/NP कर्मादीनाम्/NP ?/PUNC कर्माकर्मविकर्मणाम्/NV गतिः/NP याथात्म्यम्/NP तत्त्वम्/NP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC
किम्/SN पुनः/A तत्त्वम्/NP कर्मादेः/NP यत्/SN बोद्धव्यम्/NP वक्ष्यामि/KP इति/AUD प्रति/AUP ज्ञातम्/KN ?/PUNC उच्यते/KP -/PUNC 
कर्मणि/NP अकर्म/NP यः/SSN पश्येत्/KP अकर्मणि/NP च/AVK कर्म/NP यः/SSN ।/PUNC
सः/SNV बुद्धिमान्/NV मनुष्येषु/NP सः/SN युक्तः/KN कृत्स्नकर्मकृत्/NP ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 18/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 18/PUNC ।।/PUNC -/PUNC कर्मणि/NP ,/PUNC क्रियते/KP इति/AUD कर्म/NP व्यापारमात्रम्/NP ,/PUNC तस्मिन्/SNV कर्मणि/NP अकर्म/NP कर्माभावम्/NP यः/SN पश्येत्/KP ,/PUNC अकर्मणि/NP च/AVK कर्माभावे/NP कर्तृतन्त्रत्वात्/NP प्रवृत्तिनिवृत्त्योः/NP -/PUNC वस्तु/NP अप्राप्य/KKS एव/INTF हि/A सर्व/SN एव/INTF क्रियाकारकादिव्यवहारः/NP अविद्याभूमौ/NP एव/INTF -/PUNC कर्म/NP यः/SSN पश्येत्/KP पश्यति/KP ,/PUNC सः/SSN बुद्धिमान्/NV मनुष्येषु/NP ,/PUNC सः/SSN युक्तः/KN योगी/NP च/AVK ,/PUNC कृत्स्नकर्मकृत्/NV समस्तकर्मकृत्/NV च/APY सः/SN ,/PUNC इति/AUD स्तूयते/KP कर्माकर्मणोः/NP इतरेतरदर्शी/NP ।।/PUNC
ननु/A किम्/SN इदम्/SN विरुद्धम्/NP उच्यते/KP '/PUNC कर्मणि/NP अकर्म/NP यः/SN पश्येत्/KP '/PUNC इति/AUD '/PUNC अकर्मणि/NP च/AVK कर्म/NP '/PUNC इति/AUD ;/PUNC न/AN  हि/A कर्म/NP अकर्म/NP स्यात्/KP ,/PUNC अकर्म/NP वा/APY कर्म/NP ।/PUNC तत्र/A विरुद्धम्/NP कथम्/A पश्येत्/KP द्रष्टा/NP ?/PUNC -/PUNC न/AN ,/PUNC अकर्म/NP एव/INTF परमार्थतः/KN सत्/A कर्मवत्/ASD अवभासते/KP मूढदृष्टेः/NP लोकस्य/NP ,/PUNC तथा/AVK कर्म/NP एव/INTF अकर्मवत्/ASD ।/PUNC तत्र/A यथाभूतदर्शनार्थम्/NP आह/KP भगवान्/NP -/PUNC कर्मणि/NP अकर्म/NP यः/SN पश्येत्/KP (/PUNC गीता/NS 4/PUNC ./PUNC 18/PUNC )/PUNC इत्यादि/A ।/PUNC अतः/A न/AN विरुद्धम्/NP ।/PUNC बुद्धिमत्त्वादि/NP उपपत्तेः/NP च/AVK ।/PUNC '/PUNC बोद्धव्यम्/NP '/PUNC इति/AUD च/AVK यथाभूतदर्शनम्/NP उच्यते/KP ।/PUNC न/AN च/AVK विपरीतज्ञानात्/NP अशुभात्/NP मोक्षणम्/NP स्यात्/KP ;/PUNC '/PUNC यत्/SN ज्ञात्वा/KKS मोक्ष्यसे/NP अशुभात्/NP '/PUNC (/PUNC गीता/NS 4/PUNC ./PUNC 16/PUNC )/PUNC इति/AUD च/AVK उक्तम्/KN ।/PUNC तस्मात्/SN कर्माकर्मणी/NP विपर्ययेण/NP गृहीते/KN प्राणिभिः/NP तद्विपर्ययग्रहणनिवृत्त्यर्थम्/NP भगवतः/NP वचनम्/NP '/PUNC कर्मणि/NP अकर्म/NP यः/SN '/PUNC इत्यादि/A ।/PUNC न/AN च/AVK अत्र/A कर्माधिकरणम्/NP अकर्म/NP अस्ति/KP ,/PUNC कुण्डे/NS बदराणि/NS इव/ASD ।/PUNC न/AN अपि/A अकर्माधिकरणम्/NV कर्म/NP अस्ति/KP ,/PUNC कर्माभावत्वात्/NP अकर्मणः/NP ।/PUNC अतः/A विपरीतगृहीते/KN एव/INTF कर्माकर्मणी/NP लौकिकैः/NV ,/PUNC यथा/ASD मृगतृष्णिकायामुदकम्/NP शुक्तिकायाम्/NP वाAPY रजतम्/NP ।/PUNC ननु/A कर्म/NP कर्म/DV एव/INTF सर्वेषाम्/SN न/AN क्वचित्/A व्यभिचरति/KP -/PUNC तत्/SN न/AN ,/PUNC नौस्थस्य/NP नावि/NP गच्छन्त्याम्/KP तटस्थेषु/NP अगतिषु/NP नगेषु/NP प्रतिकूलगतिदर्शनात्/NP ,/PUNC दूरेषु/NP चक्षुषा/NP असंनिकृष्टेषु/NP गच्छत्सु/NP गत्यभावदर्शनात्/NP ,/PUNC एवम्/AUD इह/A अपि/A अकर्मणि/NP कर्मदर्शनम्/NP कर्मणि/NP च/APY अकर्मदर्शनम्/NP विपरीतदर्शनम्/NP येन/SN तन्निराकरणार्थम्/NP उच्यते/KP '/PUNC कर्मणि/NP अकर्म/NP यः/SN पश्येत्/KP '/PUNC इत्यादि/A ।।/PUNC
तत्/SN एतत्/SN उक्त/KN प्रतिवचनम्/NP अपि/A असकृत्/A अत्यन्तविपरीतदर्शनभाविततया/NP मोमुह्यमानः/KN लोकः/NP श्रुतम्/KN अपि/A असकृत्/A तत्त्वम्/NP विस्मृत्य/KKS विस्मृत्य/DV मिथ्याप्रसङ्गम्/NP अवतार्यावतार्य/KKS चोदयति/KP इति/AUD पुनः/A पुनः/DV उत्तरम्/NP आह/KP भगवान्/NP ,/PUNC दुर्विज्ञेयत्वम्/NP च/AVK आलक्ष्य/KKS वस्तुनः/NP ।/PUNC '/PUNC अव्यक्तः/NV अयम्/SN अचिन्त्यः/NV अयम्/SN '/PUNC '/PUNC न/AN जायते/KP म्रियते/KP '/PUNC इत्यादिना/A आत्मनि/NP कर्माभावः/NP श्रुतिस्मृतिन्यायप्रसिद्धः/KN उक्तः/KN वक्ष्यमाणः/KN च/AVK ।/PUNC तस्मिन्/SNV आत्मनि/NP कर्माभावे/NP अकर्मणि/NP कर्मविपरीतदर्शनम्/NP अत्यन्तनिरूढम्/NP ;/PUNC यतः/A ,/PUNC '/PUNC किम्/SN कर्म/NP किम्/SN अकर्म/NP इति/AUD कवयः/NP अपि/A अत्र/A मोहिताः/KN '/PUNC (/PUNC गीता/NS  4/PUNC ./PUNC 16/PUNC )/PUNC ।/PUNC देहाद्याश्रयम्/NV कर्म/NP आत्मनि/NP अध्यारोप्य/KKS '/PUNC अहम्/SN कर्ता/NP ,/PUNC मम/SN एतत्/SNV कर्म/NP ,/PUNC मया/SN अस्य/SNV कर्मणः/NP फलम्/NP भोक्तव्यम्/KN '/PUNC इति/AUD च/AVK ,/PUNC तथा/AVK '/PUNC अहम्/SN तूष्णीम्/NP भवामि/KP ,/PUNC येन/SN अहम्/SN निरायासः/NP अकर्मा/NP सुखी/NP स्याम्/KP '/PUNC इति/AUD कार्य/AVK करणाश्रयम्/NP व्यापारोपरमम्/NP तत्कृतम्/KN च/AVK सुखित्वम्/NP आत्मनि/NP अध्यारोप्य/KKS '/PUNC न/AN करोमि/KP किंचित्/A ,/PUNC तूष्णीम्/NP सुखमासे/NP '/PUNC इति/AUD अभि/AUP मन्यते/KP लोकः/NP ।/PUNC तत्र/A इदम्/SNV लोकस्य/NP विपरीतदर्शनापनयाय/NP आह/KP भगवान्/NP -/PUNC '/PUNC कर्मणि/NP अकर्म/NP यः/SN पश्येत्/KP '/PUNC इत्यादि/A ।।/PUNC 
अत्र/A च/AVK कर्म/NP कर्म/DV एव/INTF सत्/A कार्यकरणाश्रयम्/NP कर्मरहिते/KN अविक्रिये/NV आत्मनि/NP सर्वैः/SN अध्यस्तम्/KN ,/PUNC यतः/A पण्डितः/NP अपि/A '/PUNC अहम्/SN  करोमि/KP '/PUNC इति/AUD मन्यते/KP ।/PUNC अतः/A आत्मसमवेततया/NP सर्वलोकप्रसिद्धे/NV कर्मणि/NP नदीकूलस्थेषु/NP इव/ASD वृक्षेषु/NP गतिप्रातिलोम्येन/NP अकर्म/NP कर्माभावम्/NP यथाभूतम्/ASD गत्यभावम्/NP इव/ASD वृक्षेषु/NP यः/SN पश्येत्/KP ,/PUNC अकर्मणि/NP च/AVK कार्यकरणव्यापारोपरमे/NP कर्मवत्/ASD आत्मनि/NP अध्यारोपिते/KN ,/PUNC '/PUNC तूष्णीम्/NP अकुर्वन्/KNV सुखम्/NP आसे/KP '/PUNC इति/AUD अहंकाराभिसंधिहेतुत्वात्/NP ,/PUNC तस्मिन्/SNV अकर्मणि/NP च/AVK कर्म/NP यः/SSN पश्येत्/KP ,/PUNC यः/SSN एवम्/AUD कर्माकर्मविभागज्ञः/NP सः/SN बुद्धिमान्/NV पण्डितः/NV मनुष्येषु/NP ,/PUNC सः/SSN युक्तः/KN योगी/NP कृत्स्नकर्मकृत्/NP च/AVK सः/SSN अशुभात्/NP मोक्षितः/KN कृतकृत्यः/NP भवति/KP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC
अयम्/SNV श्लोकः/NP अन्यथा/A व्याख्यातः/KN कैश्चित्/SN ।/PUNC कथम्/AP ?/PUNC नित्यानाम्/NP किल/A कर्मणाम्/NP ईश्वरार्थे/NP अनुष्ठीयमानानाम्/NP तत्फलाभावात्/NP अकर्माणि/NP तानि/SN उच्यन्ते/KP गौण्या/NV वृत्त्या/NP ।/PUNC तेषाम्/SN च/AVK अकरणम्/NV अकर्म/NP ;/PUNC तत्/SN च/AVK प्रत्यवायफलत्वात्/NP कर्म/NP उच्यते/KP गौण्‌या/NP एव/INTF वृत्त्या/NP ।/PUNC तत्र/A नित्ये/NV कर्मणि/NP अकर्म/NP यः/SN पश्येत्/KP फलाभावात्/KP ;/PUNC यथा/AVK धेनुः/NP अपि/A गौः/NP अगौः/NP इति/AUD उच्यते/KP क्षीराख्यम्/NP फलम्/NP न/AN प्रयच्छति/KP इति/AUD ,/PUNC तद्वत्/ASD ।/PUNC तथा/AVK नित्याकरणे/NP तु/A अकर्मणि/NP च/AVK कर्म/NP यः/SN पश्येत्/KP नरकादिप्रत्यवायफलम्/NP प्रयच्छति/KP इति/AUD ।।/PUNC
न/AN एतत्/SNV युक्तम्/KN व्याख्यानम्/NP ।/PUNC एवम्/AUD ज्ञानात्/NP अशुभात्/NP मोक्षानुपपत्तेः/NP '/PUNC यत्/SN ज्ञात्वा/KKS मोक्ष्यसे/NP अशुभात्/NP '/PUNC इति/AUD भगवता/NP उक्तम्/KN वचनम्/NP बाध्येत/KP ।/PUNC कथम्/AP ?/PUNC नित्यानाम्/NV अनुष्ठानात्/NP अशुभात्/NP स्यात्/KP नाम/NP मोक्षणम्/NP ,/PUNC न/AN तु/A तेषाम्/SN फलाभावज्ञानात्/NP ।/PUNC न/AN हि/A नित्यानाम्/NV फलाभावज्ञानम्/NP अशुभमुक्तिफलत्वेन/NP चोदितम्/KN ,/PUNC नित्यकर्मज्ञानम्/NP वा/AVK ।/PUNC न/AN च/AVK भगवता/NP एव/INTF इह/A उक्तम्/KN ।/PUNC एतेन/SNV अकर्मणि/NP कर्मदर्शनम्/NP प्रति/AUP उक्तम्/KN ।/PUNC न/AN हि/A अकर्मणि/NP '/PUNC कर्म/NP '/PUNC इति/AUD दर्शनम्/NP कर्तव्यतया/NP इह/A चोद्यते/KP ,/PUNC नित्यस्य/NP तु/A कर्तव्यतामात्रम्/NP ।/PUNC न/AN च/AVK '/PUNC अकरणात्/NP नित्यस्य/NP प्रत्यवायः/NP भवति/KP '/PUNC इति/AUD विज्ञानात्/NP किञ्चित्/A फलम्/NP स्यात्/KP ।/PUNC न/AN अपि/A नित्याकरणम्/NP ज्ञेयत्वेन/NP चोदितम्/KN ।/PUNC न/AN अपि/A '/PUNC कर्म/NP अकर्म/NP '/PUNC इति/AUD मिथ्यादर्शनात्/NP अशुभात्/NP मोक्षणम्/NP बुद्धिमत्त्वम्/NP युक्तता/KN कृत्स्नकर्मकृत्त्वादि/NP च/APY फलम्/NP उपपद्यते/KP ,/PUNC स्तुतिः/NP वा/APY ।/PUNC मिथ्याज्ञानम्/NP एव/INTF हि/A साक्षात्/A अशुभरूपम्/ASD ।/PUNC कुतः/KN अन्यस्मत्/SN अशुभात्/NP मोक्षणम्/NP ?/PUNC न/AN हि/A तमः/NP तमसः/NP निवर्तकम्/NP भवति/KP ।।/PUNC
ननु/A कर्मणि/NP यत्/AVK अकर्मदर्शनम्/NP अकर्मणि/NP वा/APY कर्मदर्शनम्/NP न/AN तत्/SNV मिथ्याज्ञानम्/NP ;/PUNC किम्/SN तर्हि/A ?/PUNC गौणम्/NV फलभावाभावनिमित्तम्/KN -/PUNC न/AN ,/PUNC कर्माकर्मविज्ञानात्/NP अपि/A गौणात्/NV फलस्य/NP अश्रवणात्/NP ।/PUNC न/AN अपि/A श्रुतहान्यश्रुतपरिकल्पनायाम्/NP कश्चित्/SNV विशेषः/NP उपलभ्यते/KP ।/PUNC स्वशब्देन/NP अपि/A शक्यम्/NP वक्तुम्/KKS '/PUNC नित्यकर्मणाम्/NP फलम्/NP नास्ति/KP ,/PUNC अकरणात्/NP च/AVK तेषाम्/SN नरकपातः/KN स्यात्/KP '/PUNC इति/AUD ;/PUNC तत्र/A व्याजेन/NP परव्यामोहरूपेण/ASD '/PUNC कर्मणि/NP अकर्म/NP यः/SN पश्येत्/KP '/PUNC इत्यादिना/A किम्/SN ?/PUNC तत्र/A एवम्/AUD व्याचक्षाणेन/NP भगवता/NP उक्तम्/KN वाक्यम्/NP लोकव्यामोहार्थम्/NP इति/AUD व्यक्तम्/KN कल्पितम्/KN स्यात्/KP ।/PUNC न/AN च/AVK एतत्/SNV छद्मरूपेण/ASD वाक्येन/NP रक्षणीयम्/KN वस्तु/NP ;/PUNC न/AN अपि/A शब्दान्तरेण/A पुनः/A पुनः/DV उच्यमानम्/KN सुबोधम्/NP स्यात्/KP इति/AUD एवम्/AUD वक्तुम्/KKS युक्तम्/KN ।/PUNC '/PUNC कर्मणि/NP एव/INTF आधिकारः/NP ते/SN '/PUNC इति/AUD अत्र/A हि/A स्फुटतरःNV उक्तः/KN अर्थः/NP ,/PUNC न/AN पुनः/A वक्तव्यः/KN भवति/KP ।/PUNC सर्वत्र/A च/AVK प्रशस्तम्/NV बोद्धव्यम्/NV च/APY कर्तव्यम्/NP एव/INTF ।/PUNC न/AN निष्प्रयोजनम्/NP बोद्धव्यम्/NP इति/AUD उच्यते/KP ।।/PUNC
न/AN च/AVK मिथ्याज्ञानम्/NP बोद्धव्यम्/NV भवति/KP ,/PUNC तत्/SN प्रत्युपस्थापितम्/KN वा/APY वस्त्वाभासम्/NP ।/PUNC न/AN अपि/A नित्यानाम्/NP अकरणात्/NP अभावात्/NP प्रत्यवायभावोत्पत्तिः/NP ,/PUNC '/PUNC न/AN असतः/KN विद्यते/KP भावः/NP '/PUNC (/PUNC गीता/NS 2/PUNC ./PUNC 16/PUNC )/PUNC इति/AUD वचनात्/NP '/PUNC कथम्/A असतः/KN सत्/A जायेत/KP '/PUNC (/PUNC बृ0/NS उ0/NS 6/PUNC ./PUNC 2/PUNC ./PUNC 2/PUNC )/PUNC इति/AUD च/AVK दर्शितम्/KN असतः/KN सत्/A जन्मप्रतिषेधात्/NP ।/PUNC असतः/KN सत्/A उत्पत्तिम्/NP ब्रुवता/KN असत्/A एव/INTF सत्/A भवेत्/KP ,/PUNC सत्/A च/AVK अपि/A असत्/A भवेत्/KP इति/AUD उक्तम्/KN स्यात्/KP ।/PUNC तत्/SN च/AVK अयुक्तम्/KN ,/PUNC सर्वप्रमाणविरोधात्/NP ।/PUNC न/AN च/AVK निष्फलम्/NP विदध्यात्/KP कर्म/NV शास्त्रम्/NP ,/PUNC दुःखस्वरूपत्वात्/NP ,/PUNC दुःखस्य/NP च/AVK बुद्धिपूर्वकतया/NP कार्यत्वानुपपत्तेः/NP ।/PUNC तदकरणे/NP च/AVK नरकपाताभ्युपगमात्/NP अनर्थाय/NP एव/INTF उभयथा/NP अपि/AVK करणे/NP च/APY अकरणे/NP च/APY शास्त्रम्/NP निष्फलम्/NP कल्पितम्/KN स्यात्/KP ।/PUNC स्वाभ्युपगमविरोधः/NP च/AVK '/PUNC नित्यम्/NV निष्फलम्/NV कर्म/NP '/PUNC इति/AUD अभ्युपगम्य/KKS '/PUNC मोक्षफलाय/NP '/PUNC इति/AUD ब्रुवतः/KN ।/PUNC तस्मात्/SN यथाश्रुतः/KN एव/INTF अर्थः/NP '/PUNC कर्मणि/NP अकर्म/NP यः/SN '/PUNC इत्यादेः/A ।/PUNC तथा/AVK च/AVK व्याख्यातः/KN अस्माभिः/SNV श्लोकः/NP ।।/PUNC
तत्/SN एतत्/SNV कर्मणि/NP अकर्मदर्शनम्/NP स्तूयते/KP -/PUNC
यस्य/SN सर्वे/SN समारम्भाः/NP कामसङ्कल्पवर्जिताः/KN ।/PUNC
ज्ञानाग्निदग्धकर्माणम्/NP तम्/SN आहुः/KP पण्डितम्/NP बुधाः/NP ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 19/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 19/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यस्य/SN यथा/ASD उक्तदर्शिनः/NP सर्वे/SN यावन्तः/KN समारम्भाः/NP सर्वाणि/SNV कर्माणि/NP ,/PUNC समारभ्यन्ते/KP इति/AUD समारम्भाः/NP ,/PUNC कामसंकल्पवर्जिताः/KN कामैः/NP तत्कारणैः/NP च/APY संकल्पैः/NP वर्जिताः/KN मुधा/NP एव/INTF चेष्टामात्राः/NP अनुष्ठीयन्ते/KP ;/PUNC प्रवृत्तेन/NP चेत्/A लोकसंग्रहार्थम्/NP ,/PUNC निवृत्तेन/NP चेत्/A जीवनमात्रार्थम्/NP ।/PUNC तम्/SNV ज्ञानाग्निदग्धकर्माणम्/NP कर्मादौ/NP अकर्मादिदर्शनम्/NP ज्ञानम्/NP तत्/SN एव/INTF अग्निः/NP तेन/SN ज्ञानाग्निना/NP दग्धानि/KP शुभाशुभलक्षणानि/NV कर्माणि/NP यस्य/SN तम्/SN आहुः/KP परमार्थतः/KN पण्डितम्/NP बुधाः/NP ब्रह्मविदः/NP ।।/PUNC
यः/SN तु/A अकर्मादिदर्शी/NP ,/PUNC सः/SN अकर्मादिदर्शनात्/NP एव/INTF निष्कर्मा/NV संन्यासी/NP जीवनमात्रार्थचेष्टः/KN सन्/KKS कर्मणि/NP न/AN प्रवर्तते/KP ,/PUNC यद्यपि/A प्राक्/A विवेकतः/KN प्रवृत्तः/KN ।/PUNC यः/SSN तु/A प्रारब्धकर्मा/NP सन्/KKS उत्तरकालम्/NP उत्पन्नात्मसम्यग्दर्शनः/NP स्यात्/KP ,/PUNC सः/SSN सर्व/SNV कर्मणि/NP प्रयोजनम्/NP अपश्यन्/KNV ससाधनम्/NV कर्म/NP परित्यजति/KP एव/INTF ।/PUNC सः/SN कुतश्चित्/A निमित्तात्/NP कर्मपरित्यागासंभवे/NP सति/A कर्मणि/NP तत्फले/NP च/APY सङ्गरहिततया/NP स्वप्रयोजनाभावात्/NP लोकसंग्रहार्थम्/NP पूर्ववत्/ASD कर्मणि/NP प्रवृत्तः/KN अपि/A न/AN एव/INTF किञ्चित्/A करोति/KP ,/PUNC ज्ञानाग्निदग्धकर्मत्वात्/NP तदीयम्/SNV कर्म/NP अकर्म/NP एव/INTF संपद्यते/KP इति/AUD एतम्/SNV अर्थम्/NP दर्शयिष्यन्/KNV आह/KP -/PUNC
त्यक्त्वा/KKS कर्मफलासङ्गम्/NP नित्यतृप्तः/KN निराश्रयः/NP ।/PUNC
कर्मणि/NP अभिप्रवृत्तः/KN अपि/A न/AN एव/INTF किञ्चित्/A करोति/KP सः/SN ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 20/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 20/PUNC ।।/PUNC -/PUNC त्यक्त्वा/KKS कर्मसु/NP अभिमानम्/NP फलासङ्गम्/NP च/APY यथा/ASD उक्तेन/NP ज्ञानेन/NP नित्यतृप्तः/KN निराकाङ्क्षः/NV विषयेषु/NP इत्यर्थः/NP ।/PUNC निराश्रयः/NV आश्रयरहितः/KN ,/PUNC आश्रयः/NP नाम/NP यत्/SN आश्रित्य/KKS पुरुषार्थम्/NP सिसाधयिषति/KP ,/PUNC दृष्टादृष्टेष्टफलसाधनाश्रयरहितः/KN इत्यर्थः/NP ।/PUNC विदुषा/NP क्रियमाणम्/KN कर्म/NP परमार्थतः/KN अकर्म/NP एव/INTF ,/PUNC तस्य/SN निष्क्रियात्मदर्शनसंपन्नत्वात्/NP ।/PUNC तेन/SN एवम्/AUD भूतेन/NP स्वप्रयोजनाभावात्/NP ससाधनम्/NV कर्म/NP परित्यक्तव्यम्/KN एव/INTF इति/AUD प्राप्ते/KN ,/PUNC ततः/A निर्गमासंभवात् /NP लोकसंग्रहचिकीर्षया/NP शिष्टविगर्हणापरिजिहीर्षया/NP वा/APY पूर्ववत्/ASD कर्मणि/NP अभिप्रवृत्तः/KN अपि/A निष्क्रियात्मदर्शनसंपन्नत्वात्/NP न/AN एव/INTF किञ्चित्/A करोति/KP सः/SN ।।/PUNC
यः/SN पुनः/A पूर्वोक्तविपरीतः/KN प्राक्/A एव/INTF कर्मारम्भात्/NP ब्रह्मणि/NS सर्वान्तरे/A प्रत्यगात्मनि/NP निष्क्रिये/NP संजातात्मदर्शनः/NP सः/SN दृष्टादृष्टेष्टविषयाशीर्विवर्जिततया/NP दृष्टादृष्टार्थे/NP कर्मणि/NP प्रयोजनम्/NP अपश्यन्/KP ससाधनम्/NV कर्म/NP संन्यस्य/NP शरीरयात्रामात्रचेष्टः/KN यतिः/NP ज्ञाननिष्ठः/NP मुच्यते/KP इति/AUD एतम्/SNV अर्थम्/NP दर्शयितुम्/KKS आह/KP -/PUNC
निराशीः/NP यतचित्तात्मा/NP त्यक्तसर्वपरिग्रहः/NP ।/PUNC
शारीरम्/NP केवलम्/A कर्म/NP कुर्वन्/KNV आप्नोति/KP किल्बिषम्/NP ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 21/PUNC ।।/PUNC
 यः/SN अयम्/SNV योगः/NP अध्यायद्वयेन/SMK उक्तः/KN ज्ञाननिष्ठालक्षणः/NP ,/PUNC ससंन्यासः/NP कर्मयोगोपायः/NP ,/PUNC यस्मिन्/SN वेदार्थः/NP परिसमाप्तः/KN ,/PUNC प्रवृत्तिलक्षणः/NP निवृत्तिलक्षणः/NP च/APY गीतासु/NS च/AVK सर्वासु/SN अयम्/SNV एव/INTF योगः/NP विवक्षितः/KN भगवता/NP ।/PUNC अतः/A परिसमाप्तम्/KN वेदार्थम्/NP मन्वानः/KN ,/PUNC तम्/SN वंशकथनेन/NP स्तौति/KP श्रीभगवान्/NP -/PUNC 
श्रीभगवान्/NP उवाच/KP
इमम्/SN विवस्वते/NP योगम्/NP प्रोक्तवान्/KN अहम्/SN अव्ययम्/NP ।/PUNC
विवस्वान्/NV मनवे/NS प्राह/KP मनुः/NS इक्ष्वाकवे/NS अब्रवीत्/KP ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 1/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 1/PUNC ।।/PUNC -/PUNC इमम्/SNV अध्यायद्वयेन/SMK उक्तम्/KN योगम्/NP विवस्वते/NV आदित्याय/NP सर्गादौ/A प्रोक्तवान्/KN अहम्/SN जगत्/NP परिपालयितॄणाम्/NP क्षत्रियाणाम्/NS बलाधानाय/NP तेन/SN योगबलेन/NP युक्ताः/KN समर्थाः/NP भवन्ति/KP ब्रह्म/NS परिरक्षितुम्/KKS ।/PUNC ब्रह्मक्षत्रे/NP परिपालिते/KN जगत्/NP परिपालयितुम्/KKS अलम्/A ।/PUNC अव्ययम्/NP अव्ययफलत्वात्/NP ।/PUNC न/AN हि/A अस्य/SNV योगस्य/NP सम्यक्/NV दर्शननिष्ठालक्षणस्य/NP मोक्षाख्यम्/NP फलम्/NP व्येति/KP ।/PUNC सः/SN च/AVK विवस्वान्/NV मनवे/NS प्राह/KP ।/PUNC मनुः/NS इक्ष्वाकवेः/NS स्वपुत्राय/NP आदिराजाय/NP अब्रवीत्/KP ।।/PUNC
एवम्/AUD परम्पराप्राप्तम्/KN इमम्/SNV राजर्षयः/NP विदुः/KP ।/PUNC
सः/SN कालेन/NP इह/A महता/NV योगः/NP नष्टः/KN परन्तप/NS ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 2/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 2/PUNC ।।/PUNC -/PUNC एवम्/AUD क्षत्रियपरम्पराप्राप्तम्/KN इमम्/SNV राजर्षयः/NP राजानः/NP च/APY ते/SNV ऋषयः/NP च/APY राजर्षयः/NP विदुः/KP इमम्/SNV योगम्/NP ।/PUNC सः/SN योगः/NP कालेन/NP इह/A महता/NV दीर्घेण/NV नष्टः/KN विच्छिन्नसम्प्रदायः/NP संवृत्तः/KN ।/PUNC हे/ASMB परंतप/NS ,/PUNC आत्मनः/NP विपक्षभूताः/KN परा/A इति/AUD उच्यन्ते/KP ,/PUNC तान्/SN शौर्यतेजोगभस्तिभिः/NP भानुः/NP इव/ASD तापयति/KP इति/AUD परंतपः/NS शत्रुतापनः/NP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC
दुर्बलान्/NP अजितेन्द्रियान्/NP प्राप्य/KKS नष्टम्/KN योगम्/NP इमम्/SN उपलभ्य/KKS लोकम्/NP च/AVK अपुरुषार्थसंबन्धिनम्/NP -/PUNC
सः/SN एव/INTF अयम्/SN मया/SN ते/SN अद्य/A योगः/NP प्रोक्तः/KN पुरातनः/NP ।/PUNC
भक्तः/KN असि/KP मे/SN सखा/NP च/AVK इति/AUD रहस्यम्/NP हि/A एतत्/SNV उत्तमम्/NP ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 3/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 3/PUNC ।।/PUNC -/PUNC सः/SN एव/INTF अयम्/SN मया/SN ते/SN तुभ्यम्/SN अद्य/A इदानीम्/A योगः/NP प्रोक्तः/KN पुरातनः/NV भक्तः/NP असि/KP मे/SN सखा/NP च/AVK असि/KP इति/AUD ।/PUNC रहस्यम्/NP हि/A यस्मात्/SN तत्/SNV उत्तमम्/NV योगः/NP ज्ञानम्/NP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC
भगवता/NP विप्रतिषिद्धम्/KN उक्तम्/KN इति/AUD मा/AN भूत्/KP कस्यचित्/SNV बुद्धिः/NP इति/AUD परिहारार्थम्/NP चोद्यम्/NP इव/ASD कुर्वन्/KNV अर्जुनः/NS उवाच/KP -/PUNC
अर्जुनः/NS उवाच/KP
अपरम्/A भवतः/SN जन्म/NP परम्/NV जन्म/NP विवस्वतः/NS ।/PUNC 
कथम्/A एतत्/SN विजानीयाम्/KP त्वम्/SN आदौ/A प्रोक्तवान्/KN इति/AUD ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 4/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 4/PUNC ।।/PUNC -/PUNC अपरम्/SN अर्वाक्/NP वसुदेवगृहे/NP भवतः/SN जन्म/NP ।/PUNC परम्/A पूर्वम्/A सर्गादौ/A जन्म/NP उत्पत्तिः/NP विवस्वतः/NS आदित्यस्य/NS ।/PUNC तत्/SNV कथम्/NP एतत्/SNV विजानीयाम्/KP अविरुद्धार्थतया/NP ,/PUNC यः/SSN त्वम्/SN एव/INTF आदौ/A प्रोक्तवान्/KN इमम्/SNV योगम्/NP सः/SSN एव/INTF इदानीम्/A मह्यम्/SN प्रोक्तवान्/KN असि/KP इति/AUD ।।/PUNC
या/SSN वासुदेवे/NS अनीश्वरासर्वज्ञाशङ्का/NP मूर्खाणाम्/NP ,/PUNC ताम्/SSN परिहरन्/KNV श्रीभगवान्/NP उवाच/KP ,/PUNC यदर्थः/NP हि/A अर्जुनस्य/NS प्रश्नः/NP -/PUNC
श्रीभगवान्/NP उवाच/KP -/PUNC
बहूनि/NV मे/SN व्यतीतानि/KP जन्मानि/NP तव/SN च/AVK अर्जुन/NS ।/PUNC
तानि/SN अहम्/SN वेद/NS सर्वाणि/SN न/AN त्वम्/SN वेत्थ/KP परन्तप/NS ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 5/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 5/PUNC ।।/PUNC -/PUNC बहूनि/NV मे/SN मम/SN व्यतीतानि/KP अतिक्रान्तानि/KP जन्मानि/NP तव/SN च/AVK हे/ASMB अर्जुन/NS ।/PUNC तानि/SN अहम्/SN वेद/KP जाने/KP सर्वाणि/SN न/AN त्वम्/SN वेत्थ/KP न/AN जानीषे/KP ,/PUNC धर्माधर्मादिप्रतिबद्धज्ञानशक्तित्वात्/NP ।/PUNC अहम्/SN पुनः/A नित्यशुद्धबुद्धमुक्तस्वभावत्वात्/NP अनावरणज्ञानशक्तिः/NP इति/AUD वेदः/KP अहम्/SN हे/ASMB परंतप/NS ।।/PUNC
कथम्/A तर्हि/A तव/SN नित्येश्वरस्य/NP धर्माधर्माभावे/NP अपि/AVK जन्म/NP इति/AUD ,/PUNC उच्यते/KP -/PUNC
अजः/NV अपि/AVK सन्/KKS अव्ययात्मा/NV भूतानाम्/NP ईश्वरः/NP अपि/AVK सन्/KKS ।/PUNC
प्रकृतिम्/NP स्वाम्/SN अधिष्ठाय/NP संभवामि/KP आत्ममायया/NP ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 6/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 6/PUNC ।।/PUNC -/PUNC अजः/NV अपि/AVK जन्मरहितः/KN अपि/AVK सन्/KKS ,/PUNC तथा/AVK अव्ययात्मा/NV अक्षीणज्ञानशक्तिस्वभावः/NV अपि/AVK सन्/KKS ,/PUNC तथा/AVK भूतानाम्/NP ब्रह्मादिस्तम्बपर्यन्तानाम्/NV ईश्वरः/NP ईशनशीलः/NV अपि/AVK सन्/KKS ,/PUNC प्रकृतिम्/NP स्वाम्/SN मम/SN वैष्णवीम्/NV मायाम्/NP त्रिगुणात्मिकाम्/NV ,/PUNC यस्याः/SN वशे/NP सर्वम्/SNV जगत्/NP वर्तते/KP ,/PUNC यया/SN मोहितम्/KN सत्/A स्वमात्मानम्/NP वासुदेवम्/NS न/AN जानाति/KP ,/PUNC ताम्/SNV प्रकृतिम्/NP स्वाम्/SN अधिष्ठाय/NP वशीकृत्य/KKS सम्भवामि/KP देहवान्/KN इव/ASD भवामि/KP जातः/KN इव/ASD आत्ममायया/NP आत्मनः/NP मायया/NP ,/PUNC न/AN परमार्थतः/KN लोकवत्/ASD ।।/PUNC
तत्/SNV च/AVK जन्म/NP कदा/A किमर्थम्/NP च/AVK इति/AUD उच्यते/KP -/PUNC
यदा/A यदा/DV हि/A धर्मस्य/NP ग्लानिः/NP भवति/KP भारत/NS ।/PUNC
अभ्युत्थानम्/NP अधर्मस्य/NP तदा/A आत्मानम्/NP सृजामि/KP अहम्/SN ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 7/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 7/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यदा/A यदा/DV हि/A धर्मस्य/NP ग्लानिः/NP हानिः/NP वर्णाश्रमादिलक्षणस्य/NP प्राणिनाम्/NP अभ्युदयनिः/NP श्रेयससाधनस्य/NP भवति/KP भारत/NS ,/PUNC अभ्युत्थानम्/NP उद्भवः/NP अधर्मस्य/NP ,/PUNC तदा/A तदा/DV आत्मानम्/NP सृजामि/KP अहम्/SN मायया/NP ।।/PUNC
किमर्थम्/NP ?/PUNC -/PUNC
परित्राणाय/NP साधूनाम्/NP विनाशाय/NP च/APY दुष्कृताम्/NP ।/PUNC
धर्मसंस्थापनार्थाय/NP सम्भवामि/KP युगे/NP युगे/DV ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 8/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 8/PUNC ।।/PUNC -/PUNC परित्राणाय/NP परिरक्षणाय/NP साधूनाम्/NP सन्मार्गस्थानाम्/NP ,/PUNC विनाशाय/NP च/APY दुष्कृताम्/NP पापकारिणाम्/NP ,/PUNC किम्/SN च/APY धर्मसंस्थापनार्थाय/NP धर्मस्य/NP सम्यक्/NV स्थापनम्/NP तदर्थम्/NP सम्भवामि/KP युगे/NP युगे/DV प्रति/AUP युगम्/NP ।।/PUNC
तत्/SN -/PUNC
जन्म/NP कर्म/NP च/APY मे/SN दिव्यम्/NP एवम्/INTF यः/SN वेत्ति/KP तत्त्वतः/KN ।/PUNC
त्यक्त्वा/KKS देहम्/NP पुनर्जन्म/NP न/AN एति/KP माम्/SN एति/KP सः/SN अर्जुन/NS ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 9/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 9/PUNC ।।/PUNC -/PUNC जन्म/NP मायारूपम्/NV कर्म/NP च/APY साधूनाम्/NP परित्राणादि/NP मे/SN मम/SN दिव्यम्/NV अप्राकृतम्/NV ऐश्वरम्/NP एवम्/INTF यथा/ASD उक्तम्/KN यः/SN वेत्ति/KP तत्त्वतः/KN तत्त्वेन/NP यथावत्/ASD त्यक्त्वा/KKS देहम्/NP इमम्/SNV पुनर्जन्म/NP पुनः/A उत्पत्तिम्/NP न/AN एति/KP न/AN प्राप्नोति/KP ।/PUNC माम्/SN एति/KP आगच्छति/KP सः/SN मुच्यते/KP हे/ASMB अर्जुन/NS ।।/PUNC
न/AN एषः/SNV मोक्षमार्गः/NP इदानीम्/A प्रवृत्तः/KN ;/PUNC किम्/SN तर्हि/A ?/PUNC पूर्वम्/A   अपि/A -/PUNC
वीतरागभयक्रोधाः/NP मन्मया/SN माम्/SN उपाश्रिताः/KN ।/PUNC
बहवः/NV ज्ञानतपसा/NP पूता/KN मद्भावम्/NP आगताः/KN ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 10/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 10/PUNC ।।/PUNC -/PUNC वीतरागभयक्रोधाः/NP रागः/NP च/APY भयम्/NP च/APY क्रोधः/NP च/APY वीताः/KN विगताः/KN येभ्यः/SN ते/SNV वीतरागभयक्रोधाः/NP मन्मयाः/SN ब्रह्मविदः/NP ईश्वराभेददर्शिनः/NP माम्/SN एव/INTF च/AVK परमेश्वरम्/NP उपाश्रिताः/KN केवलज्ञाननिष्ठाः/NP इत्यर्थः/NP ।/PUNC बहवः/NV अनेके/NV ज्ञानतपसा/NP ज्ञानम्/NP एव/INTF च/ परमात्मविषयम्/NV तपः/NP तेन/SN ज्ञानतपसा/NP पूताः/KN पराम्/NV शुद्धिम्/NP गताः/KN सन्तः/KN मद्भावम्/NP ईश्वरभावम्/NP मोक्षम्/NP आगताः/KN समनुप्राप्ताः/KN ।/PUNC इतरतपोनिरपेक्षज्ञाननिष्ठाः/NP इत्यस्य/NP लिङ्गम्/NP '/PUNC ज्ञानतपसा/NP '/PUNC इति/AUD विशेषणम्/NP ।।/PUNC
तव/SN तर्हि/A रागद्वेषौ/NP स्तः/KN ,/PUNC येन/SN केभ्यश्चित्/SN एव/INTF आत्मभावम्/NP प्रयच्छसि/KP न/AN सर्वेभ्यः/SN इति/AUD उच्यते/KP -/PUNC
ये/SN यथा/AVK माम्/SN प्रपद्यन्ते/KP तान्/SN तथा/AVK एव/INTF भजामि/KP अहम्/SN ।/PUNC
मम/SN वर्त्म/NP अनुवर्तन्ते/KP मनुष्याः/NP पार्थ/NS सर्वशः/A ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 11/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 11/PUNC ।।/PUNC -/PUNC ये/SN यथा/AVK येन/SNV प्रकारेण/NP येन/SNV प्रयोजनेन/NP यत्फलार्थितया/NP माम्/SN प्रपद्यन्ते/KP तान्/SN तथा/AVK एव/INTF तत्फलदानेन/NP भजामि/KP अनुगृह्णामि/KP अहम्/SN इति/AUD एतत्/SN ।/PUNC तेषाम्/SN मोक्षम्/NP प्रति/AUP अनर्थित्वात्/NP ।/PUNC न/AN हि/A एकस्य/SMKY मुमुक्षुत्वम्/NP फलार्थित्वम्/NP च/APY युगपत्/A सम्भवति/KP ।/PUNC अतः/A ये/SNV फलार्थिनः/NP तान्/SN फलप्रदानेन/NP ,/PUNC ये/SN यथा/AVK उक्तकारिणः/NP तु/A अफलार्थिनः/NP मुमुक्षवः/NP च/APY तान्/SN ज्ञानप्रदानेन/NP ,/PUNC ये/SNV ज्ञानिनः/NP संन्यासिनः/NP मुमुक्षवः/NP च/APY तान्/SN मोक्षप्रदानेन/NP ,/PUNC तथा/AVK आर्तान्/NP आर्तिहरणेन/NP इति/AUD एवम्/INTF यथा/AVK प्रपद्यन्ते/KP ये/SN तान्/SN तथा/AVK एव/INTF भजामि/KP इत्यर्थः/NP ।/PUNC न/AN पुनः/A रागद्वेषनिमित्तम्/KN मोहनिमित्तम्/KN वा/APY कञ्चित्/A भजामि/KP ।/PUNC सर्वथापि/A सर्वावस्थस्य/NP मम/SNV ईश्वरस्य/NP वर्त्म/NP मार्गम्/NP अनुवर्तन्ते/KP मनुष्याः/NP -/PUNC यत्फलार्थितया/NP यस्मिन्/SNV कर्मणि/NP अधिकृताः/KN ये/SSN प्रयतन्ते/KP ते/SSN मनुष्याः/NP अत्र/A उच्यन्ते/KP -/PUNC हे/ASMB पार्थ/NS सर्वशः/A सर्वप्रकारैः/NP ।।/PUNC
यदि/A तव/SN ईश्वरस्य/NP रागादिदोषाभावात्/NP सर्वप्राणिषु/NP अनुजिघृक्षायाम्/NP तुल्यायाम्/NP सर्वफलप्रदानसमर्थे/NP चAVK त्वयि/SN सति/A '/PUNC वासुदेवः/NS सर्वम्/SN '/PUNC इति/AUD ज्ञानेन/NP एव/INTF मुमुक्षवः/NP सन्तः/KN कस्मात्/SN त्वाम्/SN एव/INTF सर्वे/SN न/AN प्रतिपद्यन्ते/KP इति/AUD ?/PUNC शृणु/KP तत्र/A कारणम्/NP -/PUNC
काङ्क्षन्तः/KN कर्मणाम्/NP सिद्धिम्/NP यजन्तः/KN इह/A देवताः/NP ।/PUNC
क्षिप्रम्/NP हि/A मानुषे/NP लोके/NP सिद्धिः/NP भवति/KP कर्मजा/NP ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 12/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 12/PUNC ।।/PUNC -/PUNC काङ्क्षन्तः/KN अभीप्सन्तः/KN कर्मणाम्/NP सिद्धिम्/NP फलनिष्पत्तिम्/NP प्रार्थयन्तः/KN यजन्ते/KP इह/A अस्मिन्/SNV लोके/NP देवताः/NP इन्द्राग्न्याद्याः/NS ;/PUNC '/PUNC अथ/A यः/SN अन्याम्/SNV देवताम्/NP उपास्ते/KP अन्यः/SN असौ/KP अन्यः/SN अहम्/SN अस्मि/KP इति/AUD न/AN सः/SN वेदः/KP यथा/ASD पशुरेवम्/AUD सः/SN देवानाम्/NP (/PUNC बृ0/NS उ0/NS 1/PUNC ./PUNC 4/PUNC ./PUNC 10/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD श्रुतेः/NS ।/PUNC तेषाम्/SN हि/A भिन्नदेवतायाजिनाम्/NP फलाकाङ्क्षिणाम्/NP क्षिप्रम्/NP शीघ्रम्/NP हि/A यस्मात्/SN मानुषे/NV लोके/NP ,/PUNC मनुष्यलोके/NP हि/A शास्त्राधिकारः/NP ।/PUNC '/PUNC क्षिप्रम्/NP हि/A मानुषे/NV लोके/NP '/PUNC इति/AUD विशेषणात्/NP अन्येषु/SN अपि/A कर्मफलसिद्धिम्/NP दर्शयति/KP भगवान्/NP ।/PUNC मानुषे/NV लोके/NP वर्णाश्रमादिकर्माणि/NP इति/AUD विशेषः/NP ,/PUNC तेषाम्/SN च/AVK वर्णाश्रमादि/A अधिकारिकर्मणाम्/NP फलसिद्धिः/NP क्षिप्रम्/KV भवति/KP ।/PUNC कर्मजा/NP कर्मणः/NP जाता/KN ।।/PUNC
मानुषे/NP एव/INTF लोके/NP वर्णाश्रमादिकर्माधिकारः/NP ,/PUNC न/AN अन्येषु/SNV लोकेषु/NP इति/AUD नियमः/NP किम्/SN निमित्तः/KN इति/AUD ?/PUNC अथवा/A वर्णाश्रमादिप्रविभागोपेताः/KN मनुष्याः/NP मम/SN वर्त्म/NP अनुवर्तन्ते/KP सर्वशः/A इति/AUD उक्तम्/KN ।/PUNC कस्मात्/SN पुनः/A कारणात्/NP नियमेन/NP तव/SN एव/INTF वर्त्म/NP अनुवर्तन्ते/KP न/AN अन्यस्य/SN इति/AUD ?/PUNC उच्यते/KP -/PUNC
चातुर्वर्ण्यम्/NP मया/SN सृष्टम्/KN गुणकर्मविभागशः/NP ।/PUNC
तस्य/SN कर्तारम्/NP अपि/AVK माम्/SN विद्ध्यकर्तारम्/NP अव्ययम्/NP ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 13/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 13/PUNC ।।/PUNC -/PUNC चत्वारः/SMKY एव/INTF वर्णाः/NP चातुर्वर्ण्यम्/NP मया/SN ईश्वरेण/NP सृष्टम्/KN उत्पादितम्/KN ,/PUNC '/PUNC ब्राह्मणः/NS अस्य/SN मुखम्/NP आसीत्/KP '/PUNC इत्यादि/A श्रुतेः/NS ।/PUNC गुणकर्मविभागशः/NP गुणविभागशः/NP कर्मविभागशः/NP च/APY ।/PUNC गुणाः/NP सत्त्वरजस्तमांसि/NS ।/PUNC तत्र/A सात्त्विकस्य/NV सत्त्वप्रधानस्य/NV ब्राह्मणस्य/NS '/PUNC शमः/NP दमः/NP तपः/NP '/PUNC इत्यादीनि/A कर्माणि/NP ,/PUNC सत्त्वोपसर्जनरजःप्रधानस्य/NV क्षत्रियस्य/NS शौर्यतेजःप्रभृतीनि/ASD कर्माणि/NP ,/PUNC तमउपसर्जनरजःप्रधानस्य/NV वैश्यस्य/NS कृष्यादीनि/A कर्माणि/NP ,/PUNC रजउपसर्जनतमःप्रधानस्य/NV शूद्रस्य/NS शुश्रूषा/NP एव/INTF कर्म/NP इति/AUD  एवम्/AUD गुणकर्मविभागशः/NP चातुर्वर्ण्यम्/NP मया/SN सृष्टम्/KN इत्यर्थः/NP ।/PUNC तत्/SN च/AVK इदम्/SNV चातुर्वर्ण्यम्/NP न/AN अन्येषु/SNV लोकेषु/NP ,/PUNC अतः/A मानुषे/NV लोके/NP इति/AUD विशेषणम्/NP ।/PUNC हन्त/ABS तर्हि/A चातुर्वर्ण्यस्य/NP सर्गादेः/A कर्मणः/NP कर्तृत्वात्/NP तत्/SNV फलेन/NP युज्यसे/KP ,/PUNC अतः/A न/AN त्वम्/SN नित्यमुक्तः/KN नित्येश्वरः/NP च/AVK इति/AUD ?/PUNC उच्यते/KP -/PUNC यद्यपि/AVK मायासंव्यवहारेण/NP तस्य/SN कर्मणः/NP कर्तारम्/NP अपि/A सन्तम्/A माम्/SN परमार्थतः/KN विद्धि/KP अकर्तारम्/NP ।/PUNC अतः/A एव/INTF अव्ययम्/NV असंसारिणम्/NV च/AVK माम्/SN विद्धि/KP ।।/PUNC
येषाम्/SN तु/A कर्मणाम्/NP कर्तारम्/NP माम्/SN मन्यसे/KP परमार्थतः/KN तेषाम्/SN अकर्ता/NP एव/INTF अहम्/SN ,/PUNC यतः/KN -/PUNC
न/AN माम्/SN कर्माणि/NP लिम्पन्ति/KP न/AN मे/SN कर्मफले/NP स्पृहा/NP ।/PUNC
इति/AUD माम्/SN यः/SN अभिजानाति/KP कर्मभिः/NP न/AN सः/SN बध्यते/KP ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 14/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 14/PUNC ।।/PUNC -/PUNC न/AN माम्/SN तानि/SNV कर्माणि/NP लिम्पन्ति/KP देहादि/NP आरम्भकत्वेन/NP ,/PUNC अहंकाराभावात्/NP ।/PUNC न/AN च/AVK तेषाम्/SNV कर्मणाम्/NP फलेषु/NP मे/SN मम/SN स्पृहा/NP तृष्णा/NP ।/PUNC येषाम्/SN तु/A संसारिणाम्/NP '/PUNC अहम्/SN कर्ता/NP '/PUNC इति/AUD अभिमानः/NP कर्मसु/NP ,/PUNC स्पृहा/NP तत्/SNV फलेषु/NP च/AVK ,/PUNC तान्/SNV कर्माणि/NP लिम्पन्ति/KP इति/AUD युक्तम्/KN ,/PUNC तदभावात्/NP न/AN माम्/SN कर्माणि/NP लिम्पन्ति/KP ।/PUNC इति/AUD एवम्/AUD यः/SSN अन्यः/SN अपि/A माम्/SN आत्मत्वेन/NP अभिजानाति/KP '/PUNC न/AN अहम्/SN कर्ता/NP न/AN मे/SN कर्मफले/NP स्पृहा/NP '/PUNC इति/AUD सः/SN कर्मभिः/NP न/AN बध्यते/KP ,/PUNC तस्य/SN अपि/A न/AN देहाद्यारम्भकाणि/NV कर्माणि/NP भवन्ति/KP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC
'/PUNC न/AN अहम्/SN कर्ता/NP न/AN मे/SN कर्मफले/NP स्पृहा/NP '/PUNC इति/AUD -/PUNC
एवम्/AUD ज्ञात्वा/KKS कृतम्/KN कर्म/NP पूर्वैः/SN अपि/A मुमुक्षुभिः/NP ।/PUNC
कुरु/KP कर्म/NP एव/INTF तस्मात्/SN त्वम्/SN पूर्वैः/SN पूर्वतरम्/NP कृतम्/KN ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 15/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 15/PUNC ।।/PUNC -/PUNC एवम्/AUD ज्ञात्वा/KKS कृतम्/KN कर्म/NP पूर्वैः/SN अपि/A अतिक्रान्तैः/KN मुमुक्षुभिः/NP ।/PUNC कुरु/KP तेन/SN कर्म/NP एव/INTF त्वम्/SN ,/PUNC न/AN तूष्णीम्/NP आसनम्/NP न/AN अपि/AVK संन्यासः/NP कर्तव्यः/KN ,/PUNC तस्मात्/SN त्वम्/SN पूर्वैः/SN अपि/A अनुष्ठितत्वात्/NP ,/PUNC यदि/AVK अनात्मज्ञः/NV त्वम्/SN तदा/AVK आत्मशुद्ध्यर्थम्/NP ,/PUNC तत्त्ववित्/NP चेत्/A लोकसंग्रहार्थम्/NP पूर्वैः/SN जनकादिभिः/NS पूर्वतरम्/SN कृतम्/KN न/AN अधुनातनम्/NP कृतम्/KN निर्वर्तितम्/KN ।।/PUNC
तत्र/A कर्म/NP चेत्/A कर्तव्यम्/KN त्वद्वचनात्/NP एव/INTF करोमि/KP अहम्/SN ,/PUNC किम्/SN विशेषितेन/NP '/PUNC पूर्वैः/SN पूर्वतरम्/SN कृतम्/KN '/PUNC (/PUNC गीता/NS 4/PUNC ./PUNC 15/PUNC )/PUNC इति/AUD उच्यते/KP ;/PUNC यस्मात्/SN महत्/NV वैषम्यम्/NV कर्मणि/NP ।/PUNC कथम्/AP ?/PUNC -/PUNC

किम्/SN कर्म/NP किम्/SN अकर्म/NP इति/AUD कवयः/NP अपि/APY अत्र/A मोहिताः/KN ।/PUNC
तत्/SN ते/SNV कर्म/NP प्रवक्ष्यामि/KP यत्/SN ज्ञात्वा/KKS मोक्ष्यसे/KP अशुभात्/NP ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 16/PUNC ।।/PUNC

।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 16/PUNC ।।/PUNC -/PUNC किम्/SN कर्म/NP किम्/SN च/AVK अकर्म/NP इति/AUD कवयः/NP मेधाविनः/NP अपि/A अत्र/A अस्मिन्/SNV कर्मादिविषये/NP मोहिताः/KN मोहम्/NP गताः/KN ।/PUNC तत्/SN अतः/A ते/SN तुभ्यम्/SN अहम्/SN कर्म/NP अकर्म/NP च/APY प्रवक्ष्यामि/KP ,/PUNC यत्/SN ज्ञात्वा/KKS विदित्वा/KKS कर्मादि/NP मोक्ष्यसे/NP अशुभात्/NV संसारात्/NP ।।/PUNC
न/AN च/AVK एतत्/SN त्वया/SN मन्तव्यम्/KN -/PUNC कर्म/NP नाम/NP देहादिचेष्टाः/NP लोकप्रसिद्धम्/NV ,/PUNC अकर्म/NP नाम/NP तत्/SNV क्रिया/NP तूष्णीम्/NP आसनम्/KP ;/PUNC किम्/SN तत्र/A बोद्धव्यम्/NP ?/PUNC इति/AUD ।/PUNC कस्मात्/SN ,/PUNC उच्यते/KP -/PUNC
कर्मणः/NP हि/A अपि/A बोद्धव्यम्/NV बोद्धव्यम्/NV च/AVK विकर्मणः/NP ।/PUNC
अकर्मणः/NP च/AVK बोद्धव्यम्/NV गहना/NV कर्मणः/NP गतिः/NP ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 17/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 17/PUNC ।।/PUNC -/PUNC कर्मणः/NP शास्त्रविहितस्य/KN हि/A यस्मात्/SN अपि/A अस्ति/KP बोद्धव्यम्/NV ,/PUNC बोद्धव्यम्/NV च/AVK अस्ति/KP एव/INTF विकर्मणः/NP प्रतिषिद्धस्य/NP ,/PUNC तथा/AVK अकर्मणः/NP च/AVK तूष्णींभावस्य/NP बोद्धव्यम्/NV अस्ति/KP इति/AUD त्रिषु/SMKY अपि/A अध्याहारः/NP कर्तव्यः/KN ।/PUNC यस्मात्/SN गहना/NV विषमा/NV दुर्ज्ञेया/NV -/PUNC कर्मणः/NP इति/AUD उपलक्षणार्थम्/NP कर्मादीनाम्/NP ?/PUNC कर्माकर्मविकर्मणाम्/NV गतिः/NP याथात्म्यम्/NP तत्त्वम्/NP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC
किम्/SN पुनः/A तत्त्वम्/NP कर्मादेः/NP यत्/SN बोद्धव्यम्/NP वक्ष्यामि/KP इति/AUD प्रति/AUP ज्ञातम्/KN ?/PUNC उच्यते/KP -/PUNC 
कर्मणि/NP अकर्म/NP यः/SSN पश्येत्/KP अकर्मणि/NP च/AVK कर्म/NP यः/SSN ।/PUNC
सः/SNV बुद्धिमान्/NV मनुष्येषु/NP सः/SN युक्तः/KN कृत्स्नकर्मकृत्/NP ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 18/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 18/PUNC ।।/PUNC -/PUNC कर्मणि/NP ,/PUNC क्रियते/KP इति/AUD कर्म/NP व्यापारमात्रम्/NP ,/PUNC तस्मिन्/SNV कर्मणि/NP अकर्म/NP कर्माभावम्/NP यः/SN पश्येत्/KP ,/PUNC अकर्मणि/NP च/AVK कर्माभावे/NP कर्तृतन्त्रत्वात्/NP प्रवृत्तिनिवृत्त्योः/NP -/PUNC वस्तु/NP अप्राप्य/KKS एव/INTF हि/A सर्व/SN एव/INTF क्रियाकारकादिव्यवहारः/NP अविद्याभूमौ/NP एव/INTF -/PUNC कर्म/NP यः/SSN पश्येत्/KP पश्यति/KP ,/PUNC सः/SSN बुद्धिमान्/NV मनुष्येषु/NP ,/PUNC सः/SSN युक्तः/KN योगी/NP च/AVK ,/PUNC कृत्स्नकर्मकृत्/NV समस्तकर्मकृत्/NV च/APY सः/SN ,/PUNC इति/AUD स्तूयते/KP कर्माकर्मणोः/NP इतरेतरदर्शी/NP ।।/PUNC
ननु/A किम्/SN इदम्/SN विरुद्धम्/NP उच्यते/KP '/PUNC कर्मणि/NP अकर्म/NP यः/SN पश्येत्/KP '/PUNC इति/AUD '/PUNC अकर्मणि/NP च/AVK कर्म/NP '/PUNC इति/AUD ;/PUNC न/AN  हि/A कर्म/NP अकर्म/NP स्यात्/KP ,/PUNC अकर्म/NP वा/APY कर्म/NP ।/PUNC तत्र/A विरुद्धम्/NP कथम्/A पश्येत्/KP द्रष्टा/NP ?/PUNC -/PUNC न/AN ,/PUNC अकर्म/NP एव/INTF परमार्थतः/KN सत्/A कर्मवत्/ASD अवभासते/KP मूढदृष्टेः/NP लोकस्य/NP ,/PUNC तथा/AVK कर्म/NP एव/INTF अकर्मवत्/ASD ।/PUNC तत्र/A यथाभूतदर्शनार्थम्/NP आह/KP भगवान्/NP -/PUNC कर्मणि/NP अकर्म/NP यः/SN पश्येत्/KP (/PUNC गीता/NS 4/PUNC ./PUNC 18/PUNC )/PUNC इत्यादि/A ।/PUNC अतः/A न/AN विरुद्धम्/NP ।/PUNC बुद्धिमत्त्वादि/NP उपपत्तेः/NP च/AVK ।/PUNC '/PUNC बोद्धव्यम्/NP '/PUNC इति/AUD च/AVK यथाभूतदर्शनम्/NP उच्यते/KP ।/PUNC न/AN च/AVK विपरीतज्ञानात्/NP अशुभात्/NP मोक्षणम्/NP स्यात्/KP ;/PUNC '/PUNC यत्/SN ज्ञात्वा/KKS मोक्ष्यसे/NP अशुभात्/NP '/PUNC (/PUNC गीता/NS 4/PUNC ./PUNC 16/PUNC )/PUNC इति/AUD च/AVK उक्तम्/KN ।/PUNC तस्मात्/SN कर्माकर्मणी/NP विपर्ययेण/NP गृहीते/KN प्राणिभिः/NP तद्विपर्ययग्रहणनिवृत्त्यर्थम्/NP भगवतः/NP वचनम्/NP '/PUNC कर्मणि/NP अकर्म/NP यः/SN '/PUNC इत्यादि/A ।/PUNC न/AN च/AVK अत्र/A कर्माधिकरणम्/NP अकर्म/NP अस्ति/KP ,/PUNC कुण्डे/NS बदराणि/NS इव/ASD ।/PUNC न/AN अपि/A अकर्माधिकरणम्/NV कर्म/NP अस्ति/KP ,/PUNC कर्माभावत्वात्/NP अकर्मणः/NP ।/PUNC अतः/A विपरीतगृहीते/KN एव/INTF कर्माकर्मणी/NP लौकिकैः/NV ,/PUNC यथा/ASD मृगतृष्णिकायामुदकम्/NP शुक्तिकायाम्/NP वाAPY रजतम्/NP ।/PUNC ननु/A कर्म/NP कर्म/DV एव/INTF सर्वेषाम्/SN न/AN क्वचित्/A व्यभिचरति/KP -/PUNC तत्/SN न/AN ,/PUNC नौस्थस्य/NP नावि/NP गच्छन्त्याम्/KP तटस्थेषु/NP अगतिषु/NP नगेषु/NP प्रतिकूलगतिदर्शनात्/NP ,/PUNC दूरेषु/NP चक्षुषा/NP असंनिकृष्टेषु/NP गच्छत्सु/NP गत्यभावदर्शनात्/NP ,/PUNC एवम्/AUD इह/A अपि/A अकर्मणि/NP कर्मदर्शनम्/NP कर्मणि/NP च/APY अकर्मदर्शनम्/NP विपरीतदर्शनम्/NP येन/SN तन्निराकरणार्थम्/NP उच्यते/KP '/PUNC कर्मणि/NP अकर्म/NP यः/SN पश्येत्/KP '/PUNC इत्यादि/A ।।/PUNC
तत्/SN एतत्/SN उक्त/KN प्रतिवचनम्/NP अपि/A असकृत्/A अत्यन्तविपरीतदर्शनभाविततया/NP मोमुह्यमानः/KN लोकः/NP श्रुतम्/KN अपि/A असकृत्/A तत्त्वम्/NP विस्मृत्य/KKS विस्मृत्य/DV मिथ्याप्रसङ्गम्/NP अवतार्यावतार्य/KKS चोदयति/KP इति/AUD पुनः/A पुनः/DV उत्तरम्/NP आह/KP भगवान्/NP ,/PUNC दुर्विज्ञेयत्वम्/NP च/AVK आलक्ष्य/KKS वस्तुनः/NP ।/PUNC '/PUNC अव्यक्तः/NV अयम्/SN अचिन्त्यः/NV अयम्/SN '/PUNC '/PUNC न/AN जायते/KP म्रियते/KP '/PUNC इत्यादिना/A आत्मनि/NP कर्माभावः/NP श्रुतिस्मृतिन्यायप्रसिद्धः/KN उक्तः/KN वक्ष्यमाणः/KN च/AVK ।/PUNC तस्मिन्/SNV आत्मनि/NP कर्माभावे/NP अकर्मणि/NP कर्मविपरीतदर्शनम्/NP अत्यन्तनिरूढम्/NP ;/PUNC यतः/A ,/PUNC '/PUNC किम्/SN कर्म/NP किम्/SN अकर्म/NP इति/AUD कवयः/NP अपि/A अत्र/A मोहिताः/KN '/PUNC (/PUNC गीता/NS  4/PUNC ./PUNC 16/PUNC )/PUNC ।/PUNC देहाद्याश्रयम्/NV कर्म/NP आत्मनि/NP अध्यारोप्य/KKS '/PUNC अहम्/SN कर्ता/NP ,/PUNC मम/SN एतत्/SNV कर्म/NP ,/PUNC मया/SN अस्य/SNV कर्मणः/NP फलम्/NP भोक्तव्यम्/KN '/PUNC इति/AUD च/AVK ,/PUNC तथा/AVK '/PUNC अहम्/SN तूष्णीम्/NP भवामि/KP ,/PUNC येन/SN अहम्/SN निरायासः/NP अकर्मा/NP सुखी/NP स्याम्/KP '/PUNC इति/AUD कार्य/AVK करणाश्रयम्/NP व्यापारोपरमम्/NP तत्कृतम्/KN च/AVK सुखित्वम्/NP आत्मनि/NP अध्यारोप्य/KKS '/PUNC न/AN करोमि/KP किंचित्/A ,/PUNC तूष्णीम्/NP सुखमासे/NP '/PUNC इति/AUD अभि/AUP मन्यते/KP लोकः/NP ।/PUNC तत्र/A इदम्/SNV लोकस्य/NP विपरीतदर्शनापनयाय/NP आह/KP भगवान्/NP -/PUNC '/PUNC कर्मणि/NP अकर्म/NP यः/SN पश्येत्/KP '/PUNC इत्यादि/A ।।/PUNC 
अत्र/A च/AVK कर्म/NP कर्म/DV एव/INTF सत्/A कार्यकरणाश्रयम्/NP कर्मरहिते/KN अविक्रिये/NV आत्मनि/NP सर्वैः/SN अध्यस्तम्/KN ,/PUNC यतः/A पण्डितः/NP अपि/A '/PUNC अहम्/SN  करोमि/KP '/PUNC इति/AUD मन्यते/KP ।/PUNC अतः/A आत्मसमवेततया/NP सर्वलोकप्रसिद्धे/NV कर्मणि/NP नदीकूलस्थेषु/NP इव/ASD वृक्षेषु/NP गतिप्रातिलोम्येन/NP अकर्म/NP कर्माभावम्/NP यथाभूतम्/ASD गत्यभावम्/NP इव/ASD वृक्षेषु/NP यः/SN पश्येत्/KP ,/PUNC अकर्मणि/NP च/AVK कार्यकरणव्यापारोपरमे/NP कर्मवत्/ASD आत्मनि/NP अध्यारोपिते/KN ,/PUNC '/PUNC तूष्णीम्/NP अकुर्वन्/KNV सुखम्/NP आसे/KP '/PUNC इति/AUD अहंकाराभिसंधिहेतुत्वात्/NP ,/PUNC तस्मिन्/SNV अकर्मणि/NP च/AVK कर्म/NP यः/SSN पश्येत्/KP ,/PUNC यः/SSN एवम्/AUD कर्माकर्मविभागज्ञः/NP सः/SN बुद्धिमान्/NV पण्डितः/NV मनुष्येषु/NP ,/PUNC सः/SSN युक्तः/KN योगी/NP कृत्स्नकर्मकृत्/NP च/AVK सः/SSN अशुभात्/NP मोक्षितः/KN कृतकृत्यः/NP भवति/KP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC
अयम्/SNV श्लोकः/NP अन्यथा/A व्याख्यातः/KN कैश्चित्/SN ।/PUNC कथम्/AP ?/PUNC नित्यानाम्/NP किल/A कर्मणाम्/NP ईश्वरार्थे/NP अनुष्ठीयमानानाम्/NP तत्फलाभावात्/NP अकर्माणि/NP तानि/SN उच्यन्ते/KP गौण्या/NV वृत्त्या/NP ।/PUNC तेषाम्/SN च/AVK अकरणम्/NV अकर्म/NP ;/PUNC तत्/SN च/AVK प्रत्यवायफलत्वात्/NP कर्म/NP उच्यते/KP गौण्‌या/NP एव/INTF वृत्त्या/NP ।/PUNC तत्र/A नित्ये/NV कर्मणि/NP अकर्म/NP यः/SN पश्येत्/KP फलाभावात्/KP ;/PUNC यथा/AVK धेनुः/NP अपि/A गौः/NP अगौः/NP इति/AUD उच्यते/KP क्षीराख्यम्/NP फलम्/NP न/AN प्रयच्छति/KP इति/AUD ,/PUNC तद्वत्/ASD ।/PUNC तथा/AVK नित्याकरणे/NP तु/A अकर्मणि/NP च/AVK कर्म/NP यः/SN पश्येत्/KP नरकादिप्रत्यवायफलम्/NP प्रयच्छति/KP इति/AUD ।।/PUNC
न/AN एतत्/SNV युक्तम्/KN व्याख्यानम्/NP ।/PUNC एवम्/AUD ज्ञानात्/NP अशुभात्/NP मोक्षानुपपत्तेः/NP '/PUNC यत्/SN ज्ञात्वा/KKS मोक्ष्यसे/NP अशुभात्/NP '/PUNC इति/AUD भगवता/NP उक्तम्/KN वचनम्/NP बाध्येत/KP ।/PUNC कथम्/AP ?/PUNC नित्यानाम्/NV अनुष्ठानात्/NP अशुभात्/NP स्यात्/KP नाम/NP मोक्षणम्/NP ,/PUNC न/AN तु/A तेषाम्/SN फलाभावज्ञानात्/NP ।/PUNC न/AN हि/A नित्यानाम्/NV फलाभावज्ञानम्/NP अशुभमुक्तिफलत्वेन/NP चोदितम्/KN ,/PUNC नित्यकर्मज्ञानम्/NP वा/AVK ।/PUNC न/AN च/AVK भगवता/NP एव/INTF इह/A उक्तम्/KN ।/PUNC एतेन/SNV अकर्मणि/NP कर्मदर्शनम्/NP प्रति/AUP उक्तम्/KN ।/PUNC न/AN हि/A अकर्मणि/NP '/PUNC कर्म/NP '/PUNC इति/AUD दर्शनम्/NP कर्तव्यतया/NP इह/A चोद्यते/KP ,/PUNC नित्यस्य/NP तु/A कर्तव्यतामात्रम्/NP ।/PUNC न/AN च/AVK '/PUNC अकरणात्/NP नित्यस्य/NP प्रत्यवायः/NP भवति/KP '/PUNC इति/AUD विज्ञानात्/NP किञ्चित्/A फलम्/NP स्यात्/KP ।/PUNC न/AN अपि/A नित्याकरणम्/NP ज्ञेयत्वेन/NP चोदितम्/KN ।/PUNC न/AN अपि/A '/PUNC कर्म/NP अकर्म/NP '/PUNC इति/AUD मिथ्यादर्शनात्/NP अशुभात्/NP मोक्षणम्/NP बुद्धिमत्त्वम्/NP युक्तता/KN कृत्स्नकर्मकृत्त्वादि/NP च/APY फलम्/NP उपपद्यते/KP ,/PUNC स्तुतिः/NP वा/APY ।/PUNC मिथ्याज्ञानम्/NP एव/INTF हि/A साक्षात्/A अशुभरूपम्/ASD ।/PUNC कुतः/KN अन्यस्मत्/SN अशुभात्/NP मोक्षणम्/NP ?/PUNC न/AN हि/A तमः/NP तमसः/NP निवर्तकम्/NP भवति/KP ।।/PUNC
ननु/A कर्मणि/NP यत्/AVK अकर्मदर्शनम्/NP अकर्मणि/NP वा/APY कर्मदर्शनम्/NP न/AN तत्/SNV मिथ्याज्ञानम्/NP ;/PUNC किम्/SN तर्हि/A ?/PUNC गौणम्/NV फलभावाभावनिमित्तम्/KN -/PUNC न/AN ,/PUNC कर्माकर्मविज्ञानात्/NP अपि/A गौणात्/NV फलस्य/NP अश्रवणात्/NP ।/PUNC न/AN अपि/A श्रुतहान्यश्रुतपरिकल्पनायाम्/NP कश्चित्/SNV विशेषः/NP उपलभ्यते/KP ।/PUNC स्वशब्देन/NP अपि/A शक्यम्/NP वक्तुम्/KKS '/PUNC नित्यकर्मणाम्/NP फलम्/NP नास्ति/KP ,/PUNC अकरणात्/NP च/AVK तेषाम्/SN नरकपातः/KN स्यात्/KP '/PUNC इति/AUD ;/PUNC तत्र/A व्याजेन/NP परव्यामोहरूपेण/ASD '/PUNC कर्मणि/NP अकर्म/NP यः/SN पश्येत्/KP '/PUNC इत्यादिना/A किम्/SN ?/PUNC तत्र/A एवम्/AUD व्याचक्षाणेन/NP भगवता/NP उक्तम्/KN वाक्यम्/NP लोकव्यामोहार्थम्/NP इति/AUD व्यक्तम्/KN कल्पितम्/KN स्यात्/KP ।/PUNC न/AN च/AVK एतत्/SNV छद्मरूपेण/ASD वाक्येन/NP रक्षणीयम्/KN वस्तु/NP ;/PUNC न/AN अपि/A शब्दान्तरेण/A पुनः/A पुनः/DV उच्यमानम्/KN सुबोधम्/NP स्यात्/KP इति/AUD एवम्/AUD वक्तुम्/KKS युक्तम्/KN ।/PUNC '/PUNC कर्मणि/NP एव/INTF आधिकारः/NP ते/SN '/PUNC इति/AUD अत्र/A हि/A स्फुटतरःNV उक्तः/KN अर्थः/NP ,/PUNC न/AN पुनः/A वक्तव्यः/KN भवति/KP ।/PUNC सर्वत्र/A च/AVK प्रशस्तम्/NV बोद्धव्यम्/NV च/APY कर्तव्यम्/NP एव/INTF ।/PUNC न/AN निष्प्रयोजनम्/NP बोद्धव्यम्/NP इति/AUD उच्यते/KP ।।/PUNC
न/AN च/AVK मिथ्याज्ञानम्/NP बोद्धव्यम्/NV भवति/KP ,/PUNC तत्/SN प्रत्युपस्थापितम्/KN वा/APY वस्त्वाभासम्/NP ।/PUNC न/AN अपि/A नित्यानाम्/NP अकरणात्/NP अभावात्/NP प्रत्यवायभावोत्पत्तिः/NP ,/PUNC '/PUNC न/AN असतः/KN विद्यते/KP भावः/NP '/PUNC (/PUNC गीता/NS 2/PUNC ./PUNC 16/PUNC )/PUNC इति/AUD वचनात्/NP '/PUNC कथम्/A असतः/KN सत्/A जायेत/KP '/PUNC (/PUNC बृ0/NS उ0/NS 6/PUNC ./PUNC 2/PUNC ./PUNC 2/PUNC )/PUNC इति/AUD च/AVK दर्शितम्/KN असतः/KN सत्/A जन्मप्रतिषेधात्/NP ।/PUNC असतः/KN सत्/A उत्पत्तिम्/NP ब्रुवता/KN असत्/A एव/INTF सत्/A भवेत्/KP ,/PUNC सत्/A च/AVK अपि/A असत्/A भवेत्/KP इति/AUD उक्तम्/KN स्यात्/KP ।/PUNC तत्/SN च/AVK अयुक्तम्/KN ,/PUNC सर्वप्रमाणविरोधात्/NP ।/PUNC न/AN च/AVK निष्फलम्/NP विदध्यात्/KP कर्म/NV शास्त्रम्/NP ,/PUNC दुःखस्वरूपत्वात्/NP ,/PUNC दुःखस्य/NP च/AVK बुद्धिपूर्वकतया/NP कार्यत्वानुपपत्तेः/NP ।/PUNC तदकरणे/NP च/AVK नरकपाताभ्युपगमात्/NP अनर्थाय/NP एव/INTF उभयथा/NP अपि/AVK करणे/NP च/APY अकरणे/NP च/APY शास्त्रम्/NP निष्फलम्/NP कल्पितम्/KN स्यात्/KP ।/PUNC स्वाभ्युपगमविरोधः/NP च/AVK '/PUNC नित्यम्/NV निष्फलम्/NV कर्म/NP '/PUNC इति/AUD अभ्युपगम्य/KKS '/PUNC मोक्षफलाय/NP '/PUNC इति/AUD ब्रुवतः/KN ।/PUNC तस्मात्/SN यथाश्रुतः/KN एव/INTF अर्थः/NP '/PUNC कर्मणि/NP अकर्म/NP यः/SN '/PUNC इत्यादेः/A ।/PUNC तथा/AVK च/AVK व्याख्यातः/KN अस्माभिः/SNV श्लोकः/NP ।।/PUNC
तत्/SN एतत्/SNV कर्मणि/NP अकर्मदर्शनम्/NP स्तूयते/KP -/PUNC
यस्य/SN सर्वे/SN समारम्भाः/NP कामसङ्कल्पवर्जिताः/KN ।/PUNC
ज्ञानाग्निदग्धकर्माणम्/NP तम्/SN आहुः/KP पण्डितम्/NP बुधाः/NP ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 19/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 19/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यस्य/SN यथा/ASD उक्तदर्शिनः/NP सर्वे/SN यावन्तः/KN समारम्भाः/NP सर्वाणि/SNV कर्माणि/NP ,/PUNC समारभ्यन्ते/KP इति/AUD समारम्भाः/NP ,/PUNC कामसंकल्पवर्जिताः/KN कामैः/NP तत्कारणैः/NP च/APY संकल्पैः/NP वर्जिताः/KN मुधा/NP एव/INTF चेष्टामात्राः/NP अनुष्ठीयन्ते/KP ;/PUNC प्रवृत्तेन/NP चेत्/A लोकसंग्रहार्थम्/NP ,/PUNC निवृत्तेन/NP चेत्/A जीवनमात्रार्थम्/NP ।/PUNC तम्/SNV ज्ञानाग्निदग्धकर्माणम्/NP कर्मादौ/NP अकर्मादिदर्शनम्/NP ज्ञानम्/NP तत्/SN एव/INTF अग्निः/NP तेन/SN ज्ञानाग्निना/NP दग्धानि/KP शुभाशुभलक्षणानि/NV कर्माणि/NP यस्य/SN तम्/SN आहुः/KP परमार्थतः/KN पण्डितम्/NP बुधाः/NP ब्रह्मविदः/NP ।।/PUNC
यः/SN तु/A अकर्मादिदर्शी/NP ,/PUNC सः/SN अकर्मादिदर्शनात्/NP एव/INTF निष्कर्मा/NV संन्यासी/NP जीवनमात्रार्थचेष्टः/KN सन्/KKS कर्मणि/NP न/AN प्रवर्तते/KP ,/PUNC यद्यपि/A प्राक्/A विवेकतः/KN प्रवृत्तः/KN ।/PUNC यः/SSN तु/A प्रारब्धकर्मा/NP सन्/KKS उत्तरकालम्/NP उत्पन्नात्मसम्यग्दर्शनः/NP स्यात्/KP ,/PUNC सः/SSN सर्व/SNV कर्मणि/NP प्रयोजनम्/NP अपश्यन्/KNV ससाधनम्/NV कर्म/NP परित्यजति/KP एव/INTF ।/PUNC सः/SN कुतश्चित्/A निमित्तात्/NP कर्मपरित्यागासंभवे/NP सति/A कर्मणि/NP तत्फले/NP च/APY सङ्गरहिततया/NP स्वप्रयोजनाभावात्/NP लोकसंग्रहार्थम्/NP पूर्ववत्/ASD कर्मणि/NP प्रवृत्तः/KN अपि/A न/AN एव/INTF किञ्चित्/A करोति/KP ,/PUNC ज्ञानाग्निदग्धकर्मत्वात्/NP तदीयम्/SNV कर्म/NP अकर्म/NP एव/INTF संपद्यते/KP इति/AUD एतम्/SNV अर्थम्/NP दर्शयिष्यन्/KNV आह/KP -/PUNC
त्यक्त्वा/KKS कर्मफलासङ्गम्/NP नित्यतृप्तः/KN निराश्रयः/NP ।/PUNC
कर्मणि/NP अभिप्रवृत्तः/KN अपि/A न/AN एव/INTF किञ्चित्/A करोति/KP सः/SN ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 20/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 20/PUNC ।।/PUNC -/PUNC त्यक्त्वा/KKS कर्मसु/NP अभिमानम्/NP फलासङ्गम्/NP च/APY यथा/ASD उक्तेन/NP ज्ञानेन/NP नित्यतृप्तः/KN निराकाङ्क्षः/NV विषयेषु/NP इत्यर्थः/NP ।/PUNC निराश्रयः/NV आश्रयरहितः/KN ,/PUNC आश्रयः/NP नाम/NP यत्/SN आश्रित्य/KKS पुरुषार्थम्/NP सिसाधयिषति/KP ,/PUNC दृष्टादृष्टेष्टफलसाधनाश्रयरहितः/KN इत्यर्थः/NP ।/PUNC विदुषा/NP क्रियमाणम्/KN कर्म/NP परमार्थतः/KN अकर्म/NP एव/INTF ,/PUNC तस्य/SN निष्क्रियात्मदर्शनसंपन्नत्वात्/NP ।/PUNC तेन/SN एवम्/AUD भूतेन/NP स्वप्रयोजनाभावात्/NP ससाधनम्/NV कर्म/NP परित्यक्तव्यम्/KN एव/INTF इति/AUD प्राप्ते/KN ,/PUNC ततः/A निर्गमासंभवात् /NP लोकसंग्रहचिकीर्षया/NP शिष्टविगर्हणापरिजिहीर्षया/NP वा/APY पूर्ववत्/ASD कर्मणि/NP अभिप्रवृत्तः/KN अपि/A निष्क्रियात्मदर्शनसंपन्नत्वात्/NP न/AN एव/INTF किञ्चित्/A करोति/KP सः/SN ।।/PUNC
यः/SN पुनः/A पूर्वोक्तविपरीतः/KN प्राक्/A एव/INTF कर्मारम्भात्/NP ब्रह्मणि/NS सर्वान्तरे/A प्रत्यगात्मनि/NP निष्क्रिये/NP संजातात्मदर्शनः/NP सः/SN दृष्टादृष्टेष्टविषयाशीर्विवर्जिततया/NP दृष्टादृष्टार्थे/NP कर्मणि/NP प्रयोजनम्/NP अपश्यन्/KP ससाधनम्/NV कर्म/NP संन्यस्य/NP शरीरयात्रामात्रचेष्टः/KN यतिः/NP ज्ञाननिष्ठः/NP मुच्यते/KP इति/AUD एतम्/SNV अर्थम्/NP दर्शयितुम्/KKS आह/KP -/PUNC
निराशीः/NP यतचित्तात्मा/NP त्यक्तसर्वपरिग्रहः/NP ।/PUNC
शारीरम्/NP केवलम्/A कर्म/NP कुर्वन्/KNV आप्नोति/KP किल्बिषम्/NP ।।/PUNC 4/PUNC ./PUNC 21/PUNC ।।/PUNC स्थितम्/KN ज्ञानासिना/NP शोकमोहादिदोषहरम्/NP सम्यक्/NV दर्शनम्/NP ज्ञानम्/NP तत्/SN एव/INTF असिः/NP खङ्गः/NP तेन/SN ज्ञानासिना/NP आत्मनः/NP स्वस्य/SN ,/PUNC आत्मविषयत्वात्/NP संशयस्य/NP ।/PUNC न/AN हि/A परस्य/SN संशयः/NP परेणच्छेत्तव्यताम्/KN प्राप्तः/KN ,/PUNC येन/SN स्वस्य/SN इति/AUD विशिष्यते/KP ।/PUNC अतः/A आत्मविषयः/NP अपि/A स्वस्य/SN एव/INTF भवति/KP ।/PUNC छित्त्वा/KKS एनम्/SNV संशयम्/NP स्वविनाशहेतुभूतम्/KN ,/PUNC योगम्/NP सम्यक्/NV दर्शनोपायम्/NP कर्मानुष्ठानम्/NP आतिष्ठ/KN कुर्विति/KP अर्थः/NP ।/PUNC उत्तिष्ठ/KN च/AVK इदानीम्/A युद्धाय/NP भारत/NS इति/AUD ।।/PUN/AUDC
इति/AUD श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्यस्य/NP श्रोगोविन्दभगवत्पूज्यपादशिष्यस्य/NP श्रीमत्/NV शंकरभगवतः/NP कृतौ/KN श्रीमत्भगवद्गीताभाष्ये/NP चतुर्थः/SMKP अध्यायः/NP ।।/PUNC

'/PUNC कर्मणि/NP अकर्म/NP यः/SN पश्येत्/KP '/PUNC इति/AUD आरभ्य/KKS ,/PUNC '/PUNC सयुक्तः/KN कृत्स्नकर्मकृत्/NP '/PUNC ,/PUNC '/PUNC ज्ञानाग्निदग्धकर्माणम्/NP '/PUNC ,/PUNC '/PUNC शारीरम्/NP केवलम्/A कर्म/NP कुर्वन्/KP '/PUNC ,/PUNC '/PUNC यदृच्छालाभसंतुष्टः/KN '/PUNC ,/PUNC '/PUNC ब्रह्मार्पणम्/NP ब्रह्म/NS हविः/NP '/PUNC ,/PUNC '/PUNC कर्मजान्/NP विद्धि/KP तान्/SNV सर्वान्/SN '/PUNC '/PUNC सर्व/SNV कर्माखिलम्/NP पार्थ/NS '/PUNC ,/PUNC '/PUNC ज्ञानाग्निः/NP सर्व/SNV कर्माणि/NP '/PUNC ,/PUNC '/PUNC योगसंन्यस्तकर्माणम्/NP '/PUNC इति/AUD एतैः/SNV वचनैः/NP ,/PUNC सर्वकर्मसंन्यासम्/NP अवोचत्/KP भगवान्/NP ।/PUNC '/PUNC छित्त्वा/KKS एनम्/SNV संशयम्/NP योगम्/NP आतिष्ठ/KP '/PUNC इति/AUD अनेन/SNV वचनेन/NP ,/PUNC योगम्/NP च/AVK कर्मानुष्ठानलक्षणम्/NP अनुतिष्ठ/KN इति/AUD उक्तवान्/KN ।/PUNC तयोः/SNV उभयोः/SN च/AVK कर्मानुष्ठानकर्मसंन्यासयोः/NP स्थितिगतिवत्/ASD परस्परविरोधात्/NP ,/PUNC एकेन/SMK सह/AUD कर्तुम्/KKS अशक्यत्वात्/NP ,/PUNC कालभेदेन/NP च/AVK अनुष्ठानविधानाभावात्/NP ,/PUNC अर्थात्/A एतयोः/SNV अन्यतरकर्तव्यताप्राप्तौ/NP सत्याम्/NP ,/PUNC यत्/SSN प्रशस्यतरम्/NP एतयोः/SNV कर्मानुष्ठानकर्मसंन्यासयोः/NP तत्/SSN कर्तव्यम्/KN ,/PUNC न/AN इतरत्/SN ,/PUNC इति/AUD एवम्/AUD मन्यमानः/KN ,/PUNC प्रशस्यतरः/NP बुभुत्सया/NP अर्जुनः/NS उवाच/KP -/PUNC '/PUNC संन्यासम्/NP कर्मणाम्/NP कृष्णः/NS '/PUNC इत्यादिना/A ।।/PUNC
ननु/A च/AVK आत्मविदः/NP ज्ञानयोगेन/NP निष्ठाम्/NP प्रतिपिपादयिषन्/KNV ,/PUNC पूर्वोदाहृतैः/NV वचनैः/NP भगवान्/NP सर्वकर्मसंन्यासम्/NP अवोचत्/KP ,/PUNC न/AN तु/A अनात्मज्ञस्य/NP ।/PUNC कर्मानुष्ठानकर्मसंन्यासयोः/NP भिन्नपुरुषविषयत्वात्/NP ,/PUNC अन्यतरस्य/A प्रशस्यतरत्वबुभुत्सया/NP अयम्/SNV प्रश्नः/NP अनुपपन्नः/KN ।/PUNC सत्यम्/NP एव/INTF ,/PUNC त्वदभिप्रायेण/NP प्रश्नः/NP न/AN उपपद्यते/KP ;/PUNC प्रष्टुः/KP स्वाभिप्रायेण/NP पुनः/A प्रश्नः/NP युज्यतेव/INTF इति/AUD वदामः/KP ।/PUNC कथम्/AP ?/PUNC पूर्वोदाहृतैः/NV वचनैः/NP ,/PUNC भगवता/NP कर्मसंन्यासस्य/NP कर्तव्यतया/NP विवक्षितत्वात्/NP ,/PUNC प्राधान्यम्/NP अन्तरेण/NP च/APY कर्तारम्/NP तस्य/SN कर्तव्यत्वासंभवात्/NP ,/PUNC अनात्मवित्/NP अपि/A कर्ता/NP पक्षे/NP प्राप्तः/KN अनूद्यतेव/INTF ;/PUNC न/AN पुनः/A आत्मवित्/NP कर्तृकत्वम्/NP एव/INTF संन्यासस्य/NP विवक्षितम्/KN ,/PUNC इति/AUD एवम्/AUD मन्वानस्य/NV अर्जुनस्य/NS कर्मानुष्ठानकर्मसंन्यासयोः/NP अविद्वत्पुरुषकर्तृकत्वम्/NP अपि/A अस्ति/KP इति/AUD ,/PUNC पूर्व/A उक्तेन/KN प्रकारेण/NP तयोः/SN परस्परविरोधात्/NP अन्यतरस्य/SNV कर्तव्यत्वे/NP प्राप्ते/KN ,/PUNC प्रशस्यतरम्/NP च/AVK कर्तव्यम्/KN ,/PUNC न/AN इतरत्/SN ,/PUNC इति/AUD प्रशस्यतरविविदिषया/NP प्रश्नः/NP न/AN अनुपपन्नः/KN ।।/PUNC 
प्रति/AUP वचनवाक्यार्थनिरूपणेन/NP अपि/A ,/PUNC प्रष्टुः/NP अभिप्रायः/NP एवम्/AUD एव/INTF इति/AUD गम्यते/KP ।/PUNC कथम्/AP ?/PUNC '/PUNC संन्यासकर्मयोगौ/NP निःश्रेयसकरौ/NV ,/PUNC तयोः/SN तु/A कर्म/NV योगः/NP विशिष्यते/KP '/PUNC इति/AUD प्रति/AUD वचनम्/NP ।/PUNC एतत्/SN निरूप्यम्/KKS -/PUNC किम्/SN अनेन/SNV आत्मवित्कर्तृकयोः/NP संन्यासकर्मयोगयोः/NP निःश्रेयसकरत्वम्/NV प्रयोजनम्/NP उक्त्वा/KKS ,/PUNC तयोः/SN एव/INTF कुतश्चित्/AP विशेषात्/NP कर्मसंन्यासात्/NP कर्मयोगस्य/NP विशिष्टत्वम्/NP उच्यते/KP ?/PUNC आहोस्वित्/AP ,/PUNC अनात्मवित्कर्तृकयोः/NP संन्यासकर्मयोगयोः/NP तत्/SN उभयम्/SN उच्यते/KP ?/PUNC इति/AUD ।/PUNC किम्/SN च/AVK  अतः/A यदि/AVK आत्मवित्कर्तृकयोः/NP कर्मसंन्यासकर्मयोगयोः/NP निःश्रेयसकरत्वम्/NP ,/PUNC तयोः/SN तु/A कर्मसंन्यासात्/NP कर्मयोगस्य/NP विशिष्टत्वम्/NP उच्यते/KP ;/PUNC यदि/AVK वा/AVK अनात्मवित्कर्तृकयोः/NP संन्यासकर्मयोगयोः/NP तत्/SN उभयम्/SN उच्यते/KP इति/AUD ।/PUNC अत्र/A उच्यते/KP -/PUNC आत्मवित्कर्तृकयोः/NP संन्यासकर्मयोगयोः/NP असंभवात्/NP ,/PUNC तयोः/SN निःश्रेयसकरत्ववचनम्/NP तदीयात्/SN च/AVK कर्मसंन्यासात्/NP कर्मयोगस्य/NP विशिष्टत्वाभिधानम्/NP ,/PUNC इति/AUD एतत्/SNV उभयम्/SN अनुपपन्नम्/KN ।/PUNC यदि/AVK अनात्मविदः/NP ,/PUNC कर्मसंन्यासः/NP तत्/SN प्रतिकूलः/NP च/AVK कर्मानुष्ठानलक्षणः/NP कर्मयोगः/NP संभवेताम्/KP ,/PUNC तदा/AVK तयोः/SN निःश्रेयसकरत्वोक्तिः/NP ,/PUNC कर्मयोगस्य/NP च/AVK कर्मसंन्यासात्/NP विशिष्टत्वाभिधानम्/NP ,/PUNC इति/AUD एतत्/SNV उभयम्/SN उपपद्येत/KP ।/PUNC आत्मविदः/NP तु/A संन्यासकर्मयोगयोः/NP असंभवात्/NP ,/PUNC तयोः/SN निःश्रेयसकरत्वाभिधानम्/NP कर्मसंन्यासात्/NP च/AVK कर्मयोगः/NP विशिष्यते/KP इति/AUD च/AVK अनुपपन्नम्/NP ।।/PUNC
अत्र/A आह/KP -/PUNC किम्/SN आत्मविदः/Np संन्यासकर्मयोगयोः/NP उभयोः/SN अपि/A असंभवः/NP ?/PUNC आहोस्वित्/AP ,/PUNC अन्यतरस्य/SN असंभवः/NP ?/PUNC यदा/AVK च/AVK अन्यतरस्य/SN असंभवः/NP ,/PUNC तदा/AVK किम्/SN कर्मसंन्यासस्य/NP ,/PUNC उत/AVK कर्मयोगस्य/NP ?/PUNC इति/AUD ;/PUNC असंभवे/NV कारणम्/NP च/AVK वक्तव्यम्/KN इति/AUD ।/PUNC अत्र/A उच्यते/KP -/PUNC आत्मविदः/NP निवृत्तमिथ्याज्ञानत्वात्/NP ,/PUNC विपर्ययज्ञानमूलस्य/NP कर्मयोगस्य/NP असंभवः/NP ।/PUNC जन्मादिसर्वविक्रियारहितत्वेन/NP निष्क्रियम्/NV आत्मानम्/NP आत्मत्वेन/NP यः/SN वेत्ति/KP तस्य/SN आत्मविदः/NP ,/PUNC सम्यक्‌/NV दर्शनेन/NP अपास्तमिथ्याज्ञानस्य/NP निष्क्रियात्मस्वरूपावस्थानलक्षणम्/NP सर्वकर्मसंन्यासम्/NP उक्त्वाKKS ,/PUNC तत्/SN विपरीतस्य/NP मिथ्याज्ञानमूलकर्तृत्वाभिमानपुरःसरस्य/NV सक्रियात्मस्वरूपावस्थानरूपस्य/NV कर्मयोगस्य/NP ,/PUNC इह/A गीताशास्त्रे/NP तत्र/A तत्र/DV आत्मस्वरूपनिरूपणप्रदेशेषु/NP ,/PUNC सम्यक्/NV ज्ञानमिथ्याज्ञानतत्कार्यविरोधात्/NP ,/PUNC अभावः/NP प्रतिपाद्यते/KP यस्मात्/SSN ,/PUNC तस्मात्/SSN आत्मविदः/NP निवृत्तमिथ्याज्ञानस्य/NP विपर्ययज्ञानमूलः/NP कर्मयोगः/NP न/AN संभवति/KP इति/AUD युक्तम्/KN उक्तम्/KN स्यात्/KP ।।/PUNC 
केषु/SN केषु/DV पुनः/A आत्मस्वरूपनिरूपणप्रदेशेषु/NP ,/PUNC आत्मविदः/NP कर्माभावः/NP प्रतिपाद्यते/KP ,/PUNC इति/AUD अत्र/A उच्यते/KP -/PUNC '/PUNC अविनाशि/NP तु/A तत्/SN '/PUNC इति/AUD प्रकृत्य/KKS ,/PUNC '/PUNC यः/SN एनम्/SN वेत्ति/KP हन्तारम्/NV '/PUNC ,/PUNC '/PUNC वेदाविनाशिनम्/NV नित्यम्/NV '/PUNC इत्यादौ/NP ,/PUNC तत्र/A तत्र/DV आत्मविदः/NP कर्माभावः/NP उच्यते/KP ।।/PUNC

ननु/A च/AVK कर्मयोगः/NP अपि/A आत्मस्वरूपनिरूपणप्रदेशेषु/NP तत्र/A तत्र/DV प्रतिपाद्यते/KP एव/INTF ;/PUNC तत्/SN यथा/A -/PUNC '/PUNC तस्मात्/SN युध्यस्व/KP भारत/NS '/PUNC ,/PUNC '/PUNC स्वधर्मम्/NP अपि/A च/AVK अवेक्ष्य/KKS '/PUNC ,/PUNC '/PUNC कर्मणि/NP एव/INTF अधिकारः/NP ते/SN '/PUNC इत्यादौ/NP ।/PUNC अतः/A च/AVK ,/PUNC कथम्/AP आत्मविदः/NP कर्मयोगस्य/NP असंभवः/NP स्यात्/KP इति/AUD ?/PUNC अत्र/A उच्यते/KP -/PUNC सम्यक्/NV ज्ञानमिथ्याज्ञानतत्कार्यविरोधात्/NP ,/PUNC '/PUNC ज्ञानयोगेन/NP साङ्ख्यानाम्/NS '/PUNC इति/AUD अनेन/SNV साङ्ख्यानाम्/NS आत्मतत्त्वविदाम्/NP ,/PUNC अनात्मवित्कर्तृककर्मयोगनिष्ठातः/KN निष्क्रियात्मस्वरूपावस्थानलक्षणायाः/NP ज्ञानयोगनिष्ठायाः/NP पृथक्/NP करणात्/NP ,/PUNC कृतकृत्यत्वेन/NP आत्मविदः/NP प्रयोजनान्तराभावात्/NP ,/PUNC '/PUNC तस्य/SN कार्यम्/NP न/AN विद्यते/KP '/PUNC इति/AUD कर्तव्यान्तराभाववचनात्/NP च/AVK ,/PUNC '/PUNC न/AN कर्मणाम्/NP अनारम्भात्/NP '/PUNC ,/PUNC '/PUNC संन्यासः/NP तु/A महाबाहः/NP दुःखम्/NP आप्तुम्/KKS योगतः/KN '/PUNC इत्यादिना/A च/AVK ,/PUNC आत्मज्ञानाङ्गत्वेन/NP कर्मयोगस्य/NP विधानात्/NP ,/PUNC '/PUNC योगारूढस्य/NP तस्य/SN एव/INTF शमः/NP कारणम्/NP उच्यते/KP '/PUNC इति/AUD अनेन/SN च/AVK ,/PUNC उत्पन्नसम्यग्दर्शनस्य/NP कर्मयोगाभाववचनात्/NP ,/PUNC '/PUNC शरीरम्/NP केवलम्/A कर्म/NP कुर्वन्/KNV आप्नोति/KP किल्बिषम्/NP '/PUNC इति/AUD च/AVK शरीरस्थितिकारणातिरिक्तस्य/NP कर्मणः/NP निवारणात्/NP ,/PUNC '/PUNC न/AN एव/INTF किञ्चित्/A करोमि/KP इति/AUD युक्तः/KN मन्येत/KP तत्त्ववित्/NP '/PUNC इति/AUD अनेन/SN च/AVK ,/PUNC शरीरस्थितिमात्रप्रयुक्तेषु/NP अपि/A दर्शनश्रवणादिकर्मसु/NP आत्मयाथात्म्यविदः/NP '/PUNC करोमि/KP '/PUNC इति/AUD प्रत्ययस्य/NP समाहितचेतस्तया/NP सदा/A अकर्तव्यत्वोपदेशात्/NP ,/PUNC आत्मतत्त्वविदः/NP सम्यक्/NV दर्शनविरुद्धः/NP मिथ्याज्ञानहेतुकः/NP कर्मयोगः/NP स्वप्ने/NP अपि/A न/AN संभावयितुम्/KKS शक्यते/KP यस्मात्/SSN ,/PUNC तस्मात्/SSN अनात्मवित्कर्तृकयोः/NP एव/INTF संन्यासकर्मयोगयोः/NP निःश्रेयसकरत्ववचनम्/NP ,/PUNC तदीयात्/SN च/AVK कर्मसंन्यासात्/NP पूर्वोक्तात्मवित्कर्तृकसर्वकर्मसंन्यासविलक्षणात्/NP ,/PUNC सति/A एव/INTF कर्तृत्वविज्ञाने/NP कर्मैकदेशविषयात्/NV ,/PUNC यमनियमादिसहितत्वेन/NV च/APY दुरनुष्ठेयात्/NV ,/PUNC सुकरत्वेन/NV च/APY कर्मयोगस्य/NP विशिष्टत्वाभिधानम्/NP ,/PUNC इति/AUD एवम्/AUD प्रतिवचनवाक्यार्थनिरूपणेन/NP अपि/A पूर्व/A उक्तः/KN प्रष्टुः/NP अभिप्रायः/NP निश्चीयते/KP इति/AUD स्थितम्/KN ।।/PUNC
'/PUNC ज्यायसी/NP चेत्/A कर्मणः/NP ते/SN '/PUNC इति/AUD अत्र/A ज्ञानकर्मणोः/NP सह/AUP असंभवे/NP ,/PUNC '/PUNC यत्/SN श्रेयः/NP एतयोः/SN तत्/SN ब्रूहि/KP '/PUNC इति/AUD  एवम्/AUD पृष्टः/KN अर्जुनेन/NS ,/PUNC भगवान्/NP साङ्ख्यानाम्/NS संन्यासिनाम्/NP ज्ञानयोगेन/NP निष्ठा/NP ,/PUNC पुनः/A कर्मयोगेन/NP योगिनाम्/NP निष्ठा/NP प्रोक्ता/KN इति/AUD निर्णयम्/NP चकार/KP ।/PUNC '/PUNC न/AN च/AVK संन्यसनात्/NP एव/INTF केवलात्/A सिद्धिम्/NP समधिगच्छति/KP '/PUNC इति/AUD वचनात्/NP ज्ञानसहितस्य/NP सिद्धिसाधनत्वम्/NP इष्टम्/NP ;/PUNC कर्मयोगस्य/NP च/AVK ,/PUNC विधानात्/NP ।/PUNC ज्ञानरहितस्य/NV संन्यासः/NP श्रेयान्/NV ,/PUNC किम्/SN वा/AVK कर्मयोगः/NP श्रेयान्/NV ?/PUNC इति/AUD एतयोः/SN विशेषबुभुत्सया/NP -/PUNC
अर्जुनः/NS उवाच/KP 
संन्यासम्/NP कर्मणाम्/NP कृष्ण/NS पुनः/A योगम्/NP च/APY शंससि/KP ।/PUNC 
यत्/SN श्रेयः/NP एतयोः/SN एकम्/SMK तत्/SN मे/SN ब्रूहि/KP सुनिश्चितम्/NP ।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 1/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 1/PUNC ।।/PUNC -/PUNC संन्यासम्/NP परित्यागम्/NP कर्मणाम्/NP शास्त्रीयाणाम्/NV अनुष्ठेयविशेषाणाम्/NP शंससि/KP प्रशंससि/KP कथयसि/KP इति/AUD एतत्/SN ।/PUNC पुनः/A योगम्/NP च/AVK तेषाम्/SN एव/INTF अनुष्ठानम्/NP अवश्यकर्तव्यंत्वम्/NP शंससि/KP ।/PUNC अतः/A मे/SN कतरत्/NP श्रेयः/NP इति/AUD संशयः/NP -/PUNC किम्/SN कर्मानुष्ठानम्/NP श्रेयः/NP ,/PUNC किम्/SN वा/AVK तद्धानम्/NP इति/AUD ।/PUNC प्रशस्यतरम्/NP च/AVK अनुष्ठेयम्/NP ।/PUNC अतः/A च/AVK यत्/SN श्रेयः/NP प्रशस्यतरम्/NP एतयोः/SNV कर्मसंन्यासकर्मयोगयोः/NP यत्/SSN अनुष्ठानात्/NP श्रेयः/NP अवाप्तिः/NP मम/SN स्यात्/KP इति/AUD मन्यसे/KP ,/PUNC तत्/SSN एकम्/SMK अन्यतरत्/SN सह/AUP एकपुरुषानुष्ठेयत्वासंभवात्/NP मे/SN ब्रूहि/KP सुनिश्चितम्/NV अभिप्रेतम्/NP तव/SN इति/AUD ।।/PUNC
स्व/SN अभिप्रायम्/NP आचक्षाणः/KN निर्णयाय/NP श्रीभगवान्/NP उवाच/KP -/PUNC
श्रीभगवान्/NP उवाच/KP 
संन्यासः/NP कर्मयोगः/NP च/APY निःश्रेयसकरावुभौ/KP ।/PUNC 
तयोः/SN तु/A कर्मसंन्यासात्/NP कर्मयोगः/NP विशिष्यते/KP ।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 2/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 2/PUNC ।।/PUNC -/PUNC संन्यासः/NP कर्मणाम्/NP परित्यागः/NP कर्मयोगः/NP च/AVK तेषाम्/SN अनुष्ठानम्/NP तौ/SNV उभौ/SN अपि/A निःश्रेयसकरौ/NV मोक्षम्/NP कुर्वाते/KP ज्ञानोत्पत्तिहेतुत्वेन/NP ।/PUNC उभौ/SN यद्यपि/AVK निःश्रेयसकरौ/NV ,/PUNC तथापि/AVK तयोः/SN तु/A निःश्रेयसहेत्वोः/NP कर्मसंन्यासात्/NP केवलात्/NP कर्मयोगः/NP विशिष्यते/KP इति/AUD कर्मयोगम्/NP स्तौति/KP ।।/PUNC
कस्मात्/SN इति/AUD आह/KP -/PUNC
ज्ञेयः/NP सः/SSN नित्यसंन्यासी/NP यः/SSN न/AN द्वेष्टि/KP न/AN काङ्क्षति/KP ।/PUNC 
निर्द्वन्द्वः/NV हि/A महाबाहः/NP सुखम्/NP बन्धात्/NP प्रमुच्यते/KP ।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 3/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 3/PUNC ।।/PUNC -/PUNC ज्ञेयः/NP ज्ञातव्यः/KN सः/SSN कर्मयोगी/NP नित्यसंन्यासी/NP इति/AUD यः/SSN न/AN द्वेष्टि/KP किञ्चित्/A न/AN काङ्क्षति/KP दुःखसुखे/NP तत्साधने/NP च/APY ।/PUNC एवंविधः/NP यः/SSN ,/PUNC कर्मणि/NP वर्तमानः/KN अपि/A सः/SSN नित्यसंन्यासी/NP इति/AUD ज्ञातव्यः/KN इत्यर्थः/NP ।/PUNC निर्द्वन्द्वः/NV द्वन्द्ववर्जितः/KN हि/A यस्मात्/SN महाबाहः/NP सुखम्/NP बन्धात्/NP अनायासेन/KV प्रमुच्यते/KP ।।/PUNC
संन्यासकर्मयोगयोः/NP भिन्नपुरुषानुष्ठेययोः/NP विरुद्धयोः/NP फले/NP अपि/A विरोधः/NP युक्तः/KN ,/PUNC न/AN तु/A उभयोः/SN निःश्रेयसकरत्वम्/NP एव/INTF इति/AUD प्राप्तेः/NP इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC
सांख्ययोगौ/NP पृथक्/A बालाः/NP प्रवदन्ति/KP न/AN पण्डिताः/NP ।/PUNC 
एकम्/SMK अपि/A अस्थितः/KN सम्यक्/NV उभयोः/SN विन्दते/KP फलम्/NP ।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 4/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 4/PUNC ।।/PUNC -/PUNC सांख्ययोगौ/NP पृथक्/A विरुद्धभिन्नफलौ/NP बालाः/NP प्रवदन्ति/KP न/AN पण्डिताः/NP ।/PUNC पण्डिताः/NP तु/A ज्ञानिनः/NP एकम्/SMKY फलम्/NP अविरुद्धम्/NP इच्छन्ति/KP ।/PUNC कथम्/AP ?/PUNC कम्/SN अपि/A सांख्ययोगयोः/NP सम्यक्/NV आस्थितः/KN सम्यक्/NV अनुष्ठितवान्/KN इत्यर्थः/NP ,/PUNC उभयोः/SN विन्दते/KP फलम्/NP ।/PUNC उभयोः/SN तत्/SN एव/INTF हि/A निःश्रेयसम्/NV फलम्/NP ;/PUNC अतः/A न/AN फले/NP विरोधः/NP अस्ति/KP ?/PUNC ।।/PUNC
ननु/A संन्यासकर्मयोगशब्देन/NP प्रस्तुत्य/KKS सांख्ययोगयोः/NP फलैकत्वम्/NP कथम्/AP इह/A अप्रकृतम्/KV ब्रवीति/KP ?/PUNC न/AN एषः/SNV दोषः/NP -/PUNC यद्यपि/AVK अर्जुनेन/NS संन्यासम्/NP कर्मयोगम्/NP च/APY केवलम्/A अभिप्रेत्य/KKS प्रश्नः/NP कृतः/KN ,/PUNC भगवान्/NP तु/A तत्/SN अपरित्यागेन/NP एव/INTF स्वाभिप्रेतम्/NV च/APY विशेषम्/NV संयोज्य/KKS शब्दान्तरवाच्यतया/NP प्रति/AUP वचनम्/NP ददौ/KP '/PUNC सांख्ययोगौ/NP '/PUNC इति/AUD ।/PUNC तौ/SNV एव/INTF संन्यासकर्मयोगौ/NP ज्ञानतदुपायसमबुद्धित्वादिसंयुक्तौ/NV सांख्ययोगशब्दवाच्यौ/NV इति/AUD भगवतः/NP मतम्/NP ।/PUNC अतः/A न/AN अप्रकृतप्रक्रिया/NP इति/AUD ।।/PUNC
एकस्य/SMK अपि/A सम्यक्/NV अनुष्ठानात्/NP कथम्/A उभयोः/SNV फलम्/NP विन्दते/KP इति/AUD उच्यते/KP -/PUNC
यत्/SSN सांख्यैः/NP प्राप्यते/KP स्थानम्/NP तत्/SSN योगैः/NP अपि/A गम्यते/KP ।/PUNC 
एकम्/SMKY सांख्यम्/NP च/APY योगम्/NP च/APY यः/SSN पश्यति/KP सः/SSN पश्यति/KP ।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 5/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 5/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यत्/SSN सांख्यैः/NP ज्ञाननिष्ठैः/NP संन्यासिभिः/NP प्राप्यते/KP स्थानम्/NP मोक्षाख्यम्/NP ,/PUNC तत्/SSN योगैः/NP अपि/A ज्ञानप्राप्त्युपायत्वेन/NP ईश्वरे/NP समर्प्य/KKS कर्माणि/NP आत्मनः/NP फलम्/NP अनभिसंधाय/NP अनुतिष्ठन्ति/KP ये/SSN ते/SSN योगाः/NP योगिनः/NP तैः/SN अपि/A परमार्थज्ञानसंन्यासप्राप्तिद्वारेण/NP गम्यते/KP इति/AUD अभिप्रायः/NP ।/PUNC अतः/A एकम्/SMKY साख्यम्/NP च/APY योगम्/NP च/APY यः/SSN पश्यति/KP फलैकत्वात्/NP सः/SSN सम्यक्/NV पश्यति/KP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC
एवम्/AUD तर्हि/AVK योगात्/NP संन्यासः/NP एव/INTF विशिष्यते/KP ;/PUNC कथम्/A तर्हि/A इदम्/SN उक्तम्/KN '/PUNC तयोः/SN तु/A कर्मसंन्यासात्/NP कर्मयोगः/NP विशिष्यते/KP (/PUNC गीता/NS 5/PUNC ./PUNC 2/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD ?/PUNC शृणु/KP तत्र/A कारणम्/NP -/PUNC त्वया/SN पृष्टम्/NP केवलम्/A कर्मसंन्यासम्/NP कर्मयोगम्/NP च/APY अभिप्रेत्य/KKS तयोः/SN अन्यतरः/SNV कः/SN श्रेयान्/NV इति/AUD ।/PUNC तत्/SN अनुरूपम्/ASD प्रति/AUP वचनम्/NP मया/SN उक्तम्/KN कर्मसंन्यासात्/NP कर्मयोगः/NP विशिष्यते/KP इति/AUD ज्ञानम्/NP अनपेक्ष्य/KKS ।/PUNC ज्ञानापेक्षः/NP तु/A संन्यासः/NP सांख्यम्/NP इति/AUD मया/SN अभिप्रेतः/KN ।/PUNC परमार्थयोगः/NP च/AVK सः/SN एव/INTF ।/PUNC यः/SSN तु/A कर्मयोगः/NP वैदिकः/NV सः/SSN च/AVK तादर्थ्यात्/NP योगः/NP संन्यासः/NP इति/AUD च/AVK उपचर्यते/KP ।/PUNC कथम्/A तादर्थ्यम्/NP इति/AUD उच्यते/KP -/PUNC
संन्यासः/NP तु/A महाबाहः/NP दुःखम्/NP आप्तुम्/KKS अयोगतः/KN ।/PUNC 
योगयुक्तः/NP मुनिः/NP ब्रह्म/NS न/AN अचिरेण/KV आधिगच्छति/KP ।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 6/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 6/PUNC ।।/PUNC -/PUNC संन्यासः/NP तु/A पारमार्थिकः/NV हे/ASMB महाबाहः/NP दुःखम्/NP आप्तुम्/KKS प्राप्तुम्/KKS अयोगतः/KN योगेन/NP विना/AUP ।/PUNC योगयुक्तः/NP वैदिकेन/NV कर्मयोगेन/NP ईश्वरसमर्पितरूपेण/ASD फलनिरपेक्षेण/NP युक्तः/KN ,/PUNC मुनिः/NP मननात्/NP ईश्वरस्वरूपस्य/ASD मुनिः/NP ,/PUNC ब्रह्म/NS -/PUNC परमात्मज्ञाननिष्ठालक्षणत्वात्/NP प्रकृतः/KN संन्यासः/NP ब्रह्म/NS उच्यते/KP ,/PUNC '/PUNC न्यासः/NP इति/AUD ब्रह्मा/NS ब्रह्मा/DV हि/A परः/SN (/PUNC ना0/NS उ0/NS 2/PUNC ./PUNC 78/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD श्रुतेः/NS -/PUNC ब्रह्म/NS परमार्थसंन्यासम्/NP परमार्थज्ञाननिष्ठालक्षणम्/NP न/AN चिरेण/A क्षिप्रम्/KV एव/INTF अधिगच्छति/KP प्राप्नोति/KP ।/PUNC अतः/A मया/SN उक्तम्/KN '/NP कर्मयोगः/NP विशिष्यते/KP '/PUNC इति/AUD ।।/PUNC
यदा/A पुनः/A अयम्SNV सम्यक्/NV ज्ञानप्राप्त्युपायत्वेन/NP -/PUNC
योगयुक्तः/NP विशुद्ध/NV आत्मा/NP विजित/NV आत्मा/NP जितेन्द्रियः/NP ।/PUNC 
सर्वभूतात्मभूतात्मा/NP कुर्वन्/KNV अपि/A न/AN लिप्यते/KP ।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 7/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 7/PUNC ।।/PUNC -/PUNC योगेन/NP युक्तः/KN योगयुक्तः/NP ,/PUNC विशुद्धात्मा/NV विशुद्धसत्त्वः/NV ,/PUNC विजितात्मा/NV विजितदेहः/NV ,/PUNC जितेन्द्रियः/NV च/APY ,/PUNC सर्वभूतात्मभूतात्मा/NP सर्वेषाम्/SNV ब्रह्मादीनाम्/NP स्तम्बपर्यन्तानाम्/NP भूतानाम्/NP आत्मभूतः/KN आत्मा/NP प्रत्यक्चेतनः/NP यस्य/SN सः/SNV सर्वभूतात्मभूतात्मा/NP सम्यक्/NV दर्शि/NP इत्यर्थः/NP ,/PUNC सः/SN तत्र/A एवम्/AUD वर्तमानः/KN लोकसंग्रहाय/NP कर्म/NP कुर्वन्/KNV अपि/A न/AN लिप्यते/KP न/AN कर्मभिः/NP बध्यते/KP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC
न/AN च/AVK असौ/SN परमार्थतः/KN करोति/KP इत्यतः/KN -/PUNC
न/AN एव/INTF किंचित्/A करोमि/KP इति/AUD युक्तः/KN मन्येत/KP तत्त्ववित्/NP ।/PUNC 
पश्यन्/KNV शृणवन्/KNV स्पृशन्/KNV जिघ्रन्/KNV नश्नन्/KNV गच्छन्/KNV स्वपन्/KNV श्वसन्/KNV ।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 8/PUNC ।।/PUNC
प्रलपन्/KNV विसृजन्/KNV गृह्णन्/KNV उन्मिषन्/KNV निमिषन्/KNV अपि/A ।/PUNC 
इन्द्रियाणि/NP इन्द्रियार्थेषु/NP वर्तन्त/KP इति/AUD धारयन्/KNV ।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 9/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 8/PUNC -/PUNC 5/PUNC ./PUNC 9/PUNC ।।/PUNC   -/PUNC
न/AN एव/INTF किञ्चित्/A करोमि/KP इति/AUD युक्तः/KN समाहितः/KN सन्/KKS मन्येत/KP चिन्तयेत्/KP ,/PUNC तत्त्ववित्/NP आत्मनः/NP याथात्म्यम्/NP तत्त्वम्/NP वेत्ति/KP इति/AUD तत्त्ववित्/NP परमार्थदर्शि/NP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC
कदा/A कथम्/A वा/AVK तत्त्वम्/NP अवधारयन्/KNV मन्येत/KP इति/AUD ,/PUNC उच्यते/KP -/PUNC पश्यन्/KNV इति/AUD ।/PUNC मन्येत/KP इति/AUD पूर्वेण/NP संबन्धः/NP ।/PUNC यस्य/SSN एवम्/AUD तत्त्वविदः/NP सर्वकार्यकरणचेष्टासु/NV कर्मसु/NP अकर्म/NP एव/INTF ,/PUNC पश्यतः/KN सम्यक्/NV दर्शिनः/NP तस्य/SSN सर्वकर्मसंन्यासे/NP एव/INTF अधिकारः/NP ,/PUNC कर्मणः/NP अभावदर्शनात्/NP ।/PUNC न/AN हि/A मृगतृष्णिकायाम्/NP उदकबुद्ध्या/NP पानाय/NP प्रवृत्तः/KN उदकाभावज्ञाने/NP अपि/A तत्र/A एव/INTF पानप्रयोजनाय/NP प्रवर्तते/KP ।।/PUNC
यः/SN तु/A पुनः/A अतत्त्ववित्/NP प्रवृत्तः/KN च/AVK कर्मयोगे/NP -/PUNC
ब्रह्मणि/NS आधाय/NP कर्माणि/NP सङ्गम्/NP त्यक्त्वा/KKS करोति/KP यः/SSN ।/PUNC 
लिप्यते/KP न/AN सः/SSN पापेन/NP पद्मपत्रम्/NP इव/ASD अम्भसा/NP ।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 10/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 10/PUNC ।।/PUNC -/PUNC ब्रह्मणि/NS ईश्वरे/NP आधाय/NP निक्षिप्य/KKS '/PUNC तदर्थम्/NP कर्म/NP करोमि/KP '/PUNC इति/AUD भृत्यः/NP इव/ASD स्वाम्यर्थम्/NP सर्वाणि/SNV कर्माणि/NP मोक्षे/NP अपि/A फले/NP सङ्गम्/NP त्यक्त्वा/KKS करोति/KP यः/SSN सर्व/SNV कर्माणि/NP ,/PUNC लिप्यते/KP न/AN सः/SSN पापेन/NP न/AN संबध्यते/KP पद्मपत्रम्/NP इव/ASD अम्भसा/NP उदकेन/NP ।/PUNC केवलम्/A सत्त्वशुद्धिमात्रम्/NP एव/INTF फलम्/NP तस्य/SN कर्मणः/NP स्यात्/KP ।।/PUNC
यस्मात्/SN -/PUNC
कायेन/NP मनसा/NP बुद्ध्या/NP केवलैः/A इन्द्रियैः/NP अपि/A ।/PUNC 
योगिनः/NP कर्म/NP कुर्वन्ति/KP सङ्गम्/NP त्यक्त्वा/KKS आत्मशुद्धये/NP ।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 11/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 11/PUNC ।।/PUNC -/PUNC कायेन/NP देहेन/NP मनसा/NP बुद्ध्या/NP च/APY केवलैः/A ममत्ववर्जितैः/KN '/PUNC ईश्वराय/NP एव/INTF कर्म/NP करोमि/KP ,/PUNC न/AN मम/SN फलाय/NP '/PUNC इति/AUD ममत्वबुद्धिशून्यैः/NV इन्द्रियैः/NP अपि/A -/PUNC केवलशब्दः/NP कायादिभिः/NP अपि/A प्रत्येकम्/A संबध्यते/KP -/PUNC सर्व/SN व्यापारेषु/NP ममतावर्जनाय/NP ।/PUNC योगिनः/NP कर्मिणः/NP कर्म/NP कुर्वन्ति/KP सङ्गम्/NP त्यक्त्वा/KKS फलविषयम्/NP आत्मशुद्धये/NP सत्त्वशुद्धये/NP इत्यर्थः/NP ।/PUNC तस्मात्/SSN तत्र/A एव/INTF तव/SN अधिकारः/NP इति/AUD कुरु/KP कर्म/NP एव/INTF ।।/PUNC
यस्मात्/SSN च/AVK -/PUNC
युक्तः/KN कर्मफलम्/NP त्यक्त्वा/KKS शान्तिम्/NP आप्नोति/KP नैष्ठिकीम्/NP ।/PUNC 
अयुक्तः/KN कामकारेण/NP फले/NP सक्तः/KN निबध्यते/KP ।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 12/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 12/PUNC ।।/PUNC -/PUNC युक्तः/KN '/PUNC ईश्वराय/NP कर्माणि/NP करोमि/KP न/AN मम/SN फलाय/NP '/PUNC इति/AUD एवम्/AUD समाहितः/KN सन्/KKS कर्मफलम्/NP त्यक्त्वा/KKS परित्यज्य/KKS शान्तिम्/NP मोक्षाख्याम्/NP आप्नोति/KP नैष्ठिकीम्/NP निष्ठायाम्/NP भवाम्/KP सत्त्वशुद्धिज्ञानप्राप्तिसर्वकर्मसंन्यासज्ञाननिष्ठाक्रमेण/NP इति/AUD वाक्यशेषः/NP ।/PUNC यः/SN तु/A पुनः/A अयुक्तः/KN असमाहितः/KN कामकारेण/NP करणम्/NP कारः/NP कामस्य/NP कारः/NP कामकारः/NP तेन/SNV कामकारेण/NP ,/PUNC कामप्रेरिततया/NP इत्यर्थः/NP ,/PUNC '/PUNC मम/SN फलाय/NP इदम्/SN करोमि/KP कर्म/NP '/PUNC इति/AUD एवम्/AUD फले/NP सक्तः/KN निबध्यते/KP ।/PUNC अतः/A त्वम्/SN युक्तः/KN भव/KP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC
यः/SSN तु/A परमार्थदर्शी/NP सः/SSN -/PUNC
सर्व/SNV कर्माणि/NP मनसा/NP संन्यस्य/KKS आस्ते/KP सुखम्/NP वशी/NP ।/PUNC 
नवद्वारे/NV पुरे/NP देही/NP न/AN एव/INTF कुर्वन्/KNV न/AN कारयन्/KNV ।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 13/PUNC ।।/PUNC 
।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 13/PUNC ।।/PUNC -/PUNC सर्वाणि/SNV कर्माणि/NP सर्व/SNV कर्माणि/NP संन्यस्य/NP परित्यज्य/KKS नित्यम्/NV नैमित्तिकम्/NV काम्यम्/NV प्रतिषिद्धम्/NV च/APY तानि/SNV सर्वाणि/SNV कर्माणि/NP मनसा/NP विवेकबुद्ध्या/NP ,/PUNC कर्मादौ/NP अकर्मसंदर्शनेन/NP संत्यज्येति/KP अर्थः/NP ,/PUNC आस्ते/KP तिष्ठति/KP सुखम्/NP ।/PUNC त्यक्तवाङ्मनः/NV कायचेष्टः/NP निरायासः/NV प्रसन्नचित्तः/NV आत्मनः/NP अन्यत्र/A निवृत्तसर्वबाह्यप्रयोजनः/NP इति/AUD '/PUNC सुखम्/NP आस्ते/KP '/PUNC इति/AUD उच्यते/KP ।/PUNC वशी/NP जितेन्द्रियः/NP इत्यर्थः/NP ।/PUNC क्व/A कथम्/A आस्ते/KP इति/AUD ,/PUNC आह/KP -/PUNC नवद्वारे/NV पुरे/NP ।/PUNC सप्त/SMKP शीर्षण्यानि/NP आत्मनः/NP उपलब्धिद्वाराणि/NP ,/PUNC अवाग्/NP द्वे/SMKY मूत्रपुरीषविसर्गार्थे/NP ,/PUNC तैः/SNV द्वारैः/NP नवद्वारम्/NV पुरम्/NP उच्यते/KP शरीरम्/NP ,/PUNC पुरम्/NP इव/ASD पुरम्/NP ,/PUNC आत्मैकस्वामिकम्/NP ,/PUNC तदर्थप्रयोजनैः/NP च/APY इन्द्रियमनोबुद्धिविषयैः/NP अनेकफलविज्ञानस्य/NP उत्पादकैः/NP पौरैः/NP इव/ASD अधिष्ठितम्/KN ।/PUNC तस्मिन्/SNV नवद्वारे/NV पुरे/NP देही/NP सर्वम्/SNV कर्म/NP संन्यस्य/NP आस्ते/KP ;/PUNC किम्/SN  विशेषणेन/NP ?/PUNC सर्वः/SNV हि/A देही/NP संन्यासी/NP असंन्यासी/NP वा/APY देहे/NP एव/INTF आस्ते/KP ;/PUNC तत्र/A अनर्थकम्/NV विशेषणम्/NP इति/AUD ।/PUNC उच्यते/KP -/PUNC यः/SSN तु/A अज्ञः/NP देही/NP देहेन्द्रियसंघातमात्रात्मदर्शी/NP सः/SSN सर्वः/SN अपि/A '/PUNC गेहे/NP भूमौ/NP आसने/NP वा/APY आसे/KP '/PUNC इति/AUD मन्यते/KP ।/PUNC न/AN हि/A देहमात्रात्मदर्शिनः/NP गेहे/NP इव/ASD देहे/NP आसे/KP इति/AUD प्रत्ययः/NP संभवति/KP ।/PUNC देहादिसंघातव्यतिरिक्तात्मदर्शिनः/NP तु/A '/PUNC देहे/NP आसे/KP '/PUNC इति/AUD प्रत्ययः/NP उपपद्यते/KP ।/PUNC परकर्मणाम्/NP च/AVK परस्मिन्/SNV आत्मनि/NP अविद्यया/NP अध्यारोपितानाम्/NP विद्यया/NP विवेकज्ञानेन/NP मनसा/NP संन्यासः/NP उपपद्यते/KP ।/PUNC उत्पन्नविवेकज्ञानस्य/NP सर्वकर्मसंन्यासिनः/NP अपि/A गेहे/NP इव/ASD देहे/NP एव/INTF नवद्वारे/NV पुरे/NP आसनम्/NP प्रारब्धफलकर्मसंस्कारशेषानुवृत्त्या/NP देहः/NP एव/INTF विशेषविज्ञानोत्पत्तेः/NP ।/PUNC देहे/NP एव/INTF आस्ते/KP इति/AUD अस्ति/KP एव/INTF विशेषणफलम्/NP ,/PUNC विद्वदविद्वत्प्रत्ययभेदापेक्षत्वात्/NP ।।/PUNC  
यद्यपि/AVK कार्यकरणकर्माणि/NP अविद्यया/NP आत्मनि/NP अध्यारोपितानि/NP '/PUNC संन्यस्य/NP आस्ते/KP '/PUNC इति/AUD उक्तम्/KN ,/PUNC तथापि/AVK आत्मसमवायि/NP तु/A कर्तृत्वम्/NP कारयितृत्वम्/NP च/AVK स्यात्/KP इति/AUD आशङ्क्य/KKS आह/KP -/PUNC न/AN एव/INTF कुर्वन्/KNV स्वयम्/SN ,/PUNC न/AN च/AVK कार्यकरणानि/NP कारयन्/KNV क्रियासु/NP प्रवर्तयन्/KP ।/PUNC किम्/SN यत्/SSN तत्/SSN कर्तृत्वम्/NP कारयितृत्वम्/NP च/AVK देहिनः/NP स्वात्मसमवायि/NP सत्/A संन्यासात्/NP न/AN संभवति/KP ,/PUNC यथा/ASD गच्छतः/KN गतिः/NP गमनव्यापारपरित्यागे/NP न/AN स्यात्/KP तत्/SN वत्/ASD ?/PUNC किम्/SN वा/AVK स्वतः/KN एव/INTF आत्मनः/NP न/AN अस्ति/KP इति/AUD ?/PUNC अत्र/A उच्यते/KP -/PUNC न/AN अस्ति/KP आत्मनः/NP स्वतः/KN कर्तृत्वम्/NP कारयितृत्वम्/NP च/AVK ।/PUNC उक्तम्/KN हि/A '/PUNC अविकार्यः/NV अयम्/SN उच्यते/KP (/PUNC गीता/NS 2/PUNC ./PUNC 25/PUNC )/PUNC '/PUNC '/PUNC शरीरस्थः/NP अपि/A न/AN करोति/KP न/AN लिप्यते/KP (/PUNC गीता/NS 13/PUNC ./PUNC 31/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD ।/PUNC '/PUNC ध्यायति/KP इव/ASD लेलायति/KP इव/ASD (/PUNC बृ0/NS उ0/NS 4/PUNC ./PUNC 34/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD श्रुतेः/NS ।।/PUNC
किम्/SN च/AVK -/PUNC
न/AN कर्तृत्वम्/NP न/AN कर्माणि/NP लोकस्य/NP सृजति/KP प्रभुः/NP ।/PUNC 
न/AN कर्मफलसंयोगम्/NP स्वभावः/NP तु/A प्रवर्तते/KP ।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 14/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 14/PUNC ।।/PUNC -/PUNC न/AN कर्तृत्वम्/NP स्वतः/SN कुरु/KP इति/AUD न/AN अपि/A कर्माणि/NP रथघटप्रासादादीनि/NV ईप्सिततमानि/NV लोकस्य/NP सृजति/KP उत्पादयति/KP प्रभुः/NP आत्मा/NP ।/PUNC न/AN अपि/A रथादि/NP कृतवतः/KN तत्/SNV फलेन/NP संयोगम्/NP न/AN कर्मफलसंयोगम्/NP ।/PUNC यदि/AVK किञ्चित्/A अपि/A स्वतः/SN न/AN करोति/KP न/AN कारयति/KP च/AVK देही/NP ,/PUNC कः/SN तर्हि/AVK कुर्वन्/KNV कारयन्/KNV च/AVK प्रवर्तते/KP इति/AUD ,/PUNC उच्यते/KP -/PUNC स्वभावः/NP तु/A स्वः/SN भावः/NP स्वभावः/NP अविद्यालक्षणा/NV प्रकृतिः/NP माया/NP प्रवर्तते/KP '/PUNC दैवी/NP हि/A '/PUNC इत्यादिना/A वक्ष्यमाणा/KN ।।/PUNC
परमार्थतः/KN तु/A -/PUNC
न/AN आदत्ते/KP कस्यचित्/SNV पापम्/NP न/AN च/AVK एव/INTF सुकृतम्/KN विभुः/NP ।/PUNC 
अज्ञानेन/NP आवृतम्/KN ज्ञानम्/NP तेन/SN मुह्यन्ति/KP जन्तवः/NP ।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 15/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 15/PUNC ।।/PUNC -/PUNC न/AN आदत्ते/KP न/AN च/AVK गृह्णाति/KP भक्तस्य/NP अपि/A कस्यचित्/SNV पापम्/NP ।/PUNC न/AN च/AVK एव/INTF आदत्ते/KP सुकृतम्/KN भक्तैः/NP प्रयुक्तम्/KN विभुः/NP ।/PUNC किमर्थम्/NP तर्हि/SN भक्तैः/NP पूजादिलक्षणम्/NP यागदानहोमादिकम्/NP च/APY सुकृतम्/KN प्रयुज्यते/KP इति/AUD आह/KP -/PUNC अज्ञानेन/NP आवृतम्/KN ज्ञानम्/NP विवेकविज्ञानम्/NP ,/PUNC तेन/SN मुह्यन्ति/KP '/PUNC करोमि/KP कारयामि/KP भोक्ष्ये/KP भोजयामि/KP '/PUNC इति/AUD एवम्/AUD मोहम्/NP गच्छन्ति/KP अविवेकिनः/NV संसारिणः/NV जन्तवः/NP ।।/PUNC
ज्ञानेन/NP तु/A तत्/SNV अज्ञानम्/NP येषाम्/SN नाशितम्/KN आत्मनः/NP ।/PUNC 
तेषाम्/SN आदित्यवत्/ASD ज्ञानम्/NP प्रकाशयति/KP तत्/SNV परम्/NP ।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 16/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 16/PUNC ।।/PUNC -/PUNC ज्ञानेन/NP तु/A येन/SNV अज्ञानेन/NP आवृताः/KN मुह्यन्ति/KP जन्तवः/NP तत्/SNV अज्ञानम्/NP येषाम्/SNV जन्तूनाम्/NP विवेकज्ञानेन/NP आत्मविषयेण/NP नाशितम्/KN आत्मनः/NP भवति/KP ,/PUNC तेषाम्/SNV जन्तूनाम्/NP आदित्यवत्/ASD यथा/ASD आदित्यः/NS समस्तम्/SNV रूपजातम्/KN अवभासयति/KP तत्/SN वत्/ASD ज्ञानम्/NP ज्ञेयम्/NP वस्तु/NP सर्वम्/SN प्रकाशयति/KP तत्/SNV परम्/NP परमार्थतत्त्वम्/NP ।।/PUNC
यत्/SSN परम्/NV ज्ञानम्/NP प्रकाशितम्/KN -/PUNC
तद्बुद्धयः/NP तदात्मानः/NP तन्निष्ठाः/NP तत्परायणाः/NP ।/PUNC 
गच्छन्ति/KP अपुनरावृत्तिम्/NP ज्ञाननिर्धूतकल्मषाः/NP ।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 17/PUNC ।/PUNC
।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 17/PUNC ।।/PUNC -/PUNC तस्मिन्/SNV ब्रह्मणि/NS गता/KN बुद्धिः/NP येषाम्/SNV ते/SN तद्बुद्धयः/NP ,/PUNC तत्/SNV आत्मानः/NP तत्/SN एव/INTF परम्/NV ब्रह्म/NS आत्मा/NP येषाम्/SNV ते/SN तत्/SNV आत्मानः/NP ,/PUNC तत्/SNV निष्ठाः/NP निष्ठाः/NP अभिनिवेशः/NP तात्पर्यम्/NP सर्वाणि/SNV कर्माणि/NP संन्यस्य/NP तस्मिन्/SNV ब्रह्मणि/NS एव/INTF अवस्थानम्/NP येषाम्/SNV ते/SN तत्/SNV निष्ठाः/NP ,/PUNC तत्/SN परायणाः/NP च/AVK तत्/SN एव/INTF परम्/NV अयनम्/NP परा/NV गतिः/NP येषाम्/SN भवति/KP ते/SN तत्/SN परायणाः/NP केवलात्मरतयः/NP इत्यर्थः/NP ।/PUNC येषाम्/SSN ज्ञानेन/NP नाशितम्/KN आत्मनः/NP अज्ञानम्/NP ते/SSN गच्छन्ति/KP एवंविधाः/NP अपुनरावृत्तिम्/NP अपुनर्देहसंबन्धम्/NP ज्ञाननिर्धूतकल्मषाः/NP यथा/ASD उक्तेन/KN ज्ञानेन/NP निर्धूतः/KN नाशितः/KN कल्मषः/NP पापादिसंसारकारणदोषः/NP येषाम्/SSN ते/SSN ज्ञाननिर्धूतकल्मषाः/NP यतयः/SN इति/AUD अर्थः/NP ।।/PUNC 

येषाम्/SSN ज्ञानेन/NP नाशितम्/KN आत्मनः/NP अज्ञानम्/NP ते/SSN पण्डिताः/NP कथम्/A तत्त्वम्/NP पश्यन्ति/KP इति/AUD उच्यते/KP -/PUNC
विद्याविनयसंपन्ने/NV ब्राह्मणे/NS गवि/NP हस्तिनि/NP ।/PUNC 
शुनि/NP च/APY एव/INTF श्वपाके/NP च/APY पण्डिताः/NP समदर्शिनः/NV ।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 18/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 18/PUNC ।।/PUNC -/PUNC विद्याविनयसंपन्ने/NV विद्या/NP च/APY विनयः/NP च/APY विद्याविनयौ/NP ,/PUNC विद्या/NP आत्मनः/NP बोधः/NP विनयः/NP उपशमः/NP ,/PUNC ताभ्याम्/SNV विद्याविनयाभ्याम्/NP संपन्नः/KN विद्याविनयसंपन्नः/NV विद्वान्/NP विनीतः/NV च/APY यः/SNV ब्राह्मणः/NP तस्मिन्/SNV ब्राह्मणे/NS गवि/NP हस्तिनि/NP शुनि/NP च/APY एव/INTF श्वपाके/NP च/APY पण्डिताः/NP समदर्शिनः/NV ।/PUNC विद्याविनयसंपन्ने/NV उत्तमसंस्कारवति/NV ब्राह्मणे/NS सात्त्विके/NV ,/PUNC मध्यमायाम्/NP च/AVK राजस्याम्/NP गवि/NP ,/PUNC संस्कारहीनायाम्/NP अत्यन्तम्/NV एव/INTF केवलतामसे/NP हस्ति/NP आदौ/NP च/AVK ,/PUNC सत्त्वादिगुणैः/NP तज्जैः/NP च/AVK संस्कारैः/NP तथा/ASD राजसैः/NP तथा/ASD तामसैः/NP च/AVK संस्कारैः/NP अत्यन्तम्/NV एव/INTF अस्पृष्टम्/NP समम्/AUP एकम्/SMK अविक्रियम्/NP तत्/SNV ब्रह्म/NS द्रष्टुम्/KKS शीलम्/NP येषाम्/SSN ते/SSN पण्डिताः/NP समदर्शिनः/NP ।।/PUNC 
ननु/A अभोज्यान्नाः/KN ते/SN दोषवन्तः/KN ,/PUNC '/PUNC समासमाभ्याम्/NP विषमसमे/NP पूजातः/KN (/PUNC गौ0/NS स्म0/NS 17/PUNC ./PUNC 20/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD स्मृतेः/NS ।/PUNC न/AN ते/SN दोषवन्तः/KN ।/PUNC कथम्/AP ?/PUNC -/PUNC
इह/A एव/INTF तैः/SSN जितः/KN सर्गः/NP येषाम्/SSN साम्ये/NP स्थितम्/KN मनः/NP ।/PUNC 
निर्दोषम्/NP हि/A समम्/AUP ब्रह्म/NS तस्माद्/SN ब्रह्मणि/NS ते/SN स्थिताः/KN ।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 19/PUNC ।।/PUNC 
।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 19/PUNC ।।/PUNC -/PUNC इह/A एव/INTF जीवद्भिः/NP एव/INTF तैः/SSN समदर्शिभिः/NV पण्डितैः/NP जितः/KN वशीकृतः/KN सर्गः/NP जन्म/NP ,/PUNC येषाम्/SSN साम्ये/NP सर्वभूतेषु/NV ब्रह्मणि/NS समभावे/NP स्थितम्/KN निश्चलीभूतम्/KN मनः/NP अन्तःकरणम्/NP ।/PUNC निर्दोषम्/NP यद्यपि/AVK दोषवत्सु/NP श्वपाकादिषु/NP मूढैः/NP तत्/SNV दोषैः/NP दोषवत्/ASD इव/ASD विभाव्यते/KP ,/PUNC तथापि/AVK तत्/SNV दोषैः/NP अस्पृष्टम्/NV इति/AUD निर्दोषम्/NP दोषवर्जितम्/KN हि/A यस्मात्/SN ;/PUNC  न/AN अपि/A स्वगुणभेदभिन्नम्/NP ,/PUNC निर्गुणत्वात्/NP चैतन्यस्य/NP ।/PUNC वक्ष्यति/KP च/AVK भगवान्/NP इच्छादीनाम्/NP क्षेत्रधर्मत्वम्/NP ,/PUNC '/PUNC अनादित्वात्/NP निर्गुणत्वात्/NP (/PUNC गीता/NS 13/PUNC ./PUNC 31/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD च/AVK ।/PUNC न/AN अपि/A अन्त्याः/NV विशेषाः/NV आत्मनः/NP भेदकाः/NP सन्ति/KP ,/PUNC प्रति/AUP शरीरम्/NP तेषाम्/SN सत्त्वे/NP प्रमाणानुपपत्तेः/NP ।/PUNC अतः/A समम्/AUP ब्रह्म/NS एकम्/SMK च/AVK ।/PUNC तस्मात्/SN ब्रह्मणि/NS एव/INTF ते/SN स्थिताः/KN ।/PUNC तस्मात्/SN न/AN दोषगन्धमात्रम्/NP अपि/A तान्/SN स्पृशति/KP ,/PUNC देहादिसंघातात्मदर्शनाभिमानाभावात्/NP तेषाम्/SN ।/PUNC देहादिसंघातात्मदर्शनाभिमानवद्विषयम्/NP तु/A तत्/SNV सूत्रम्/NP '/PUNC समासमाभ्याम्/NP विषमसमे/NP पूजातः/KN (/PUNC गौ0/NS स्मृ0/NS 17/PUNC ./PUNC 20/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD ,/PUNC पूजाविषयत्वेन/NP विशेषणात्/NP ।/PUNC दृश्यते/KP हि/A ब्रह्मवित्/NP षडङ्गवित्/NP चतुर्वेदवित्/NP इति/AUD पूजादानादौ/NP गुणविशेषसंबन्धः/NP कारणम्/NP ।/PUNC ब्रह्म/NS तु/A सर्वगुणदोषसंबन्धवर्जितम्/KN इति/AUD अतः/A '/PUNC ब्रह्मणि/NS ते/SN स्थिताः/KN '/PUNC इति/AUD युक्तम्/KN ।/PUNC कर्मविषयम्/NP च/AVK '/PUNC समासमाभ्याम्/NP '/PUNC इत्यादि/A ।/PUNC इदम्/SN तु/A सर्वकर्मसंन्यासविषयम्/NP प्रस्तुतम्/NP ,/PUNC '/PUNC सर्व/SNV कर्माणि/NP मनसा/NP (/PUNC गीता/NS 5/PUNC ./PUNC 13/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD आरभ्य/KKS आध्यायपरिसमाप्तेः/NP ।।/PUNC
यस्मात्/SSN निर्दोषम्/NP समम्/AUP ब्रह्म/NS आत्मा/NP ,/PUNC तस्मात्/SSN -/PUNC
न/AN प्रहृष्येत्/KP प्रियम्/NP प्राप्य/KKS न/AN उद्विजेत्/KP प्राप्य/KKS च/AVK अप्रियम्/NP ।/PUNC 
स्थिरबुद्धिः/NP असम्मूढः/NP ब्रह्मविद्/NP ब्रह्मणि/NS स्थितः/KN ।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 20/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 20/PUNC ।।/PUNC -/PUNC न/AN प्रहृष्येत्/KP प्रहर्षम्/NP न/AN कुर्यात्/KP प्रियम्/NP इष्टम्/NP प्राप्य/KKS लब्ध्वा/KKS ।/PUNC न/AN उद्विजेत्/KP प्राप्य/KKS च/AVK अप्रियम्/NP अनिष्टम्/NP लब्ध्वा/KKS ।/PUNC देहमात्रात्मदर्शिनाम्/NP हि/A प्रियाप्रियप्राप्ती/NP हर्षविषादौ/NP कुर्वाते/KP ,/PUNC न/AN केवलात्मदर्शिनः/NP ,/PUNC तस्य/SN प्रियाप्रियप्राप्त्यसंभवात्/NP ।/PUNC किम्/SN च/AVK -/PUNC '/PUNC सर्वभूतेषु/NP एकः/SMKY समः/AUP निर्दोषः/NV आत्मा/NP '/PUNC इति/AUD स्थिरा/NV निर्विचिकित्सा/NV बुद्धिः/NP यस्य/SN सः/SNV स्थिरबुद्धिः/NV असंमूढः/NV संमोहवर्जितः/KN च/APY स्यात्/KP यथा/ASD उक्त/KN ब्रह्मवित्/ASD ब्रह्मणि/NS स्थितः/KN ,/PUNC अकर्मकृत्/NP सर्वकर्मसंन्यासी/NP इत्यर्थः/NP ।/PUNC किम्/SN च/AVK ,/PUNC ब्रह्मणि/NS स्थितः/KN -/PUNC
बाह्यस्पर्शेषु/NP असक्तात्मा/NP विन्दति/KP अत्मनि/NP यत्/SN सुखम्/NP ।/PUNC 
सः/SN ब्रह्मयोगयुक्तात्मा/NP सुखम्/NP अक्षयम्/NV अश्नुते/KP ।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 21/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 21/PUNC ।।/PUNC -/PUNC बाह्यस्पर्शेषु/NP बाह्याः/NP च/AVK ते/SN स्पर्शाः/NP च/APY बाह्यस्पर्शाः/NP स्पृश्यन्ते/KP इति/AUD स्पर्शाः/NP शब्दादयः/NP विषयाः/NP तेषु/SN बाह्यस्पर्शेषु/NP ,/PUNC असक्तः/KN आत्मा/NP अन्तःकरणम्/NP यस्य/SN सः/SN अयम्/SNV असक्तात्मा/NP विषयेषु/NP प्रीतिवर्जितः/KN सन्/KKS विन्दति/KP लभते/KP आत्मनि/NP यत्/SSN सुखम्/NP तत्/SSN विन्दति/KP इति/AUD एतत्/SN ।/PUNC सः/SNV ब्रह्मयोगयुक्तात्मा/NV ब्रह्मणि/NS योगः/NP समाधिः/NP ब्रह्मयोगः/NP तेन/SNV ब्रह्मयोगेन/NP युक्तः/KN समाहितः/KN तस्मिन्/SN व्यापृतः/KN आत्मा/NP अन्तःकरणम्/NP यस्य/SN सः/SN ब्रह्मयोगयुक्तात्मा/NP ,/PUNC सुखम्/NP अक्षयम्/NV अश्नुते/KP व्याप्नोति/KP ।/PUNC तस्मात्/SN बाह्यविषयप्रीतेः/NP क्षणिकायाः/NP इन्द्रियाणि/NP निवर्तयेत्/KP आत्मनि/NP अक्षयसुखार्थी/NP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC
इतः/A च/AVK निवर्तयेत्/KP -/PUNC
ये/SN हि/A संस्पर्शजाः/NV भोगाः/NP दुःखयोनयः/NP एव/INTF ते/SN ।/PUNC 
आद्यन्तवन्तः/KN कौन्तेय/NP न/AN तेषु/SN रमते/KP बुधः/NP ।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 22/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 22/PUNC ।।/PUNC -/PUNC ये/SSN हि/A यस्मात्/SN संस्पर्शजाः/NP विषयेन्द्रियसंस्पर्शेभ्यः/NP जाताः/KN भोगाः/NP भुक्तयः/NP दुःखयोनयः/NP एव/INTF ते/SSN ,/PUNC अविद्याकृतत्वात्/NP ।/PUNC दृश्यन्ते/KP हि/A आध्यात्मिकादीनि/NV दुःखानि/NP तन्निमित्तानि/NP एव/INTF ।/PUNC यथा/AVK इहलोके/NP तथा/APY परलोके/NP अपि/A इति/AUD गम्यते/KP एवशब्दात्/NP ।/PUNC न/AN संसारे/NP सुखस्य/NP गन्धमात्रम्/NP अपि/A अस्ति/KP इति/AUD बुद्ध्वा/KKS विषयमृगतृष्णिकाया/NV इन्द्रियाणि/NP निवर्तयेत्/KP ।/PUNC न/AN केवलम्/A दुःखयोनयः/NP ,/PUNC आद्यन्तवन्तः/KN च/APY ,/PUNC आदिः/A विषयेन्द्रियसंयोगः/NP भोगानाम्/NP अन्तः/KN च/AVK तत्/SNV वियोगः/NP एव/INTF ;/PUNC अतः/A आद्यन्तवन्तः/NV अनित्याः/NV ,/PUNC मध्यक्षणभावित्वात्/NP इत्यर्थः/NP ।/PUNC कौन्तेय/NP ,/PUNC न/AN तेषु/SNV भोगेषु/NP रमते/KP बुधः/NP विवेकी/NP अवगतपरमार्थतत्त्वः/NP ;/PUNC अत्यन्त/NV मूढानाम्/NP एव/INTF हि/A विषयेषु/NP रतिः/NP दृश्यते/KP ,/PUNC यथा/ASD पशुप्रभृतीनाम्/NP ।।/PUNC  
अयम्/SN च/AVK श्रेयोमार्गप्रतिपक्षी/NP कष्टतमः/NV दोषः/NP सर्वानर्थप्राप्तिहेतुः/NP दुर्निवारः/NP च/AVK इति/AUD तत्/SN परिहारे/NP यत्नाधिक्यम्/NV कर्तव्यम्/KN इति/AUD आह/KP भगवान्/NP -/PUNC
शक्नोति/KP इह/A एव/INTF यः/SSN सोढुम्/KKS प्राक्शरीरविमोक्षणात्/NP ।/PUNC 
कामक्रोधोद्भवम्/NP वेगम्/NP सः/SN युक्तः/KN सः/SSN सुखी/NV नरः/NP ।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 23/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 23/PUNC ।।/PUNC -/PUNC शक्नोति/KP उत्सहते/KP इह/A एव/INTF जीवन्/NP एव/NP यः/SN सोढुम्/KKS प्रसहितुम्/KKS प्राक्/A पूर्वम्/A शरीरविमोक्षणात्/NP आमरणात्/NP इत्यर्थः/NP ।/PUNC मरणसीमाकरणम्/NP जीवतः/KN अवश्यंभावि/NP हि/A कामक्रोधोद्भवः/NV वेगः/NP ,/PUNC अनन्तनिमित्तवान्/KN हि/A सः/SN इति/AUD यावत्/AVK मरणम्/NP तावत्/AVK न/AN विश्रम्भणीयः/KN इत्यर्थः/NP ।/PUNC कामः/NP इन्द्रियगोचरप्राप्ते/NP इष्टे/NV विषये/NP श्रूयमाणे/KN स्मर्यमाणे/KN वा/AVK अनुभूते/NP सुखहेतौ/NP या/SSN गर्धिः/NP तृष्णा/NP सः/SSN कामः/NP ;/PUNC क्रोधः/NP च/APY आत्मनः/NP प्रतिकूलेषु/NP दुःखहेतुषु/NP दृश्यमानेषु/NP श्रूयमाणेषु/NP स्मर्यमाणेषु/NP वा/APY यः/SSN द्वेषः/NP सः/SSN क्रोधः/NP ;/PUNC तौ/SNV कामक्रोधौ/NP उद्भवः/NP यस्य/SNV वेगस्य/NP सः/SNV कामक्रोधोद्भवः/NV वेगः/NP ।/PUNC रोमाञ्चनप्रहृष्टनेत्रवदनादिलिङ्गः/NP अन्तःकरणप्रक्षोभरूपः/ASD कामोद्भवः/NV वेगः/NP ,/PUNC गात्रप्रकम्पप्रस्वेदसंदष्टोष्ठपुटरक्तनेत्रादिलिङ्गः/NP क्रोधोद्भवः/NV वेगः/NP ,/PUNC तम्/SNV कामक्रोधोद्भवम्/NV वेगम्/NP यः/SSN उत्सहते/KP प्रसहते/KP सोढुम्/KKS प्रसहितुम्/KKS ,/PUNC सः/SSN युक्तः/KN योगी/NP सुखी/NP च/APY इह/A लोके/NP नरः/NP ।।/PUNC
कथंभूतः/KN च/AVK ब्रह्मणि/NS स्थितः/KN ब्रह्म/NS प्राप्नोति/KP इति/AUD आह/KP भगवान्/NP -/PUNC
यः/SSN अन्तःसुखः/NP अन्तरारामः/NP तथा/APY अन्तर्ज्योतिः/NP एव/INTF यः/SSN ।/PUNC 
सः/SSN योगी/NP ब्रह्मनिर्वाणम्/NP ब्रह्मभूतः/KN अधिगच्छति/KP ।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 24/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 24/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यः/SSN अन्तःसुखः/NP अन्तः/KN आत्मनि/NP सुखम्/NP यस्य/SN सः/SNV अन्तःसुखः/NP ,/PUNC तथा/AVK अन्तः/KN एव/INTF आत्मनि/NP आरामः/NP आरमणम्/NP क्रीडा/NP यस्य/SN सः/SNV अन्तरारामः/NP ,/PUNC तथा/AVK एव/INTF अन्तः/KN एव/INTF आत्मनि/NP एव/INTF ज्योतिः/NP प्रकाशः/NP यस्य/SN सः/SNV अन्तर्ज्योतिः/NP एव/INTF ,/PUNC यः/SSN ईदृशः/ASD सः/SNV योगी/NP ब्रह्मनिर्वाणम्/NP ब्रह्मणि/NS निर्वृतिम्/NP मोक्षम्/NP इह/A जीवन्/NP एव/INTF ब्रह्मभूतः/KN सन्/KKS अधिगच्छति/KP प्राप्नोति/KP ।।/PUNC
किम्/SN च/AVK -/PUNC
लभन्ते/KP ब्रह्मनिर्वाणम्/NP ऋषयः/NP क्षीणकल्मषाः/NV ।/PUNC 
छिन्नद्वैधाः/NV यतात्मानः/NV सर्वभूतहिते/NP रताः/KN ।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 25/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 25/PUNC ।।/PUNC -/PUNC लभन्ते/KP ब्रह्मनिर्वाणम्/NP मोक्षम्/NP ऋषयः/NP सम्यक्/NV दर्शिनः/NP संन्यासिनः/NP क्षीणकल्मषाः/NV क्षीणपापाः/NV निर्दोषाः/NV छिन्नद्वैधाः/NV छिन्नसंशयाः/NV यतात्मानः/NV संयतेन्द्रियाः/NV सर्वभूतहिते/NP रताः/KN सर्वेषाम्/SNV भूतानाम्/NP हिते/NP आनुकूल्ये/NP रताः/KN अहिंसकाः/NP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC
किम्/SN च/AVK -/PUNC
कामक्रोधवियुक्तानाम्/NP यतीनाम्/NP यतचेतसाम्/NP ।/PUNC 
अभितः/AUP ब्रह्मनिर्वाणम्/NP वर्तते/KP विदितात्मनाम्/NP ।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 26/PUNC ।।/PUNC

।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 26/PUNC ।।/PUNC -/PUNC कामक्रोधवियुक्तानाम्/NV कामः/NP च/AVK क्रोधः/NP च/APY कामक्रोधौ/NP ताभ्याम्/SNV वियुक्तानाम्/NP यतीनाम्/NP संन्यासिनाम्/NP यतचेतसाम्/NP संयतान्तःकरणानाम्/NP अभितः/AUP उभयतः/AUP जीवताम्/NP मृतानाम्/NP च/APY ब्रह्मनिर्वाणम्/NP मोक्षः/NP वर्तते/KP विदितात्मनाम्/NP विदितः/KN ज्ञातः/KN आत्मा/NP येषाम्/SN ते/SNV विदितात्मानः/NP तेषाम्/SNV विदितात्मनाम्/NP सम्यक्/NV दर्शिनाम्/NP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC 
सम्यक्/A दर्शननिष्ठानाम्/NV संन्यासिनाम्/NP सद्यः/A मुक्तिः/NP उक्ता/KN ।/PUNC कर्मयोगः/NP च/AVK ईश्वरार्पितसर्वभावेन/NP ईश्वरे/NP ब्रह्मणि/NS आधाय/KKS क्रियमाणः/KN सत्त्वशुद्धिज्ञानप्राप्तिसर्वकर्मसंन्यासक्रमेण/NP मोक्षाय/NP इति/AUD भगवान्/NP पदे/NP पदे/DV अब्रवीत्/KP ,/PUNC वक्ष्यति/KP  च/APY ।/PUNC अथ इदानीम्+ ध्यानयोगम्+ सम्यक्/NV दर्शनस्य/NP अन्तरङ्गम्/NP विस्तरेण/KV वक्ष्यामि/KP इति/AUD तस्य/SN सूत्रस्थानीयान्/NV श्लोकान्/NP उपदिशति/KP स्म/KP -/PUNC
स्पर्शान्/NP कृत्वा/KKS बहिः/NP बाह्यान्/NP चक्षुः/NP च/AVK एव/INTF अन्तरे/NP भ्रुवोः/NP ।/PUNC 
प्राणापानौ/NP समौ/NP कृत्वा/KKS नासाभ्यन्तरचारिणौ/NP ।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 27/PUNC ।।/PUNC
यतेन्द्रियमनोबुद्धिः/NP मुनिः/NP मोक्षपरायणः/NP ।/PUNC 
विगतेच्छाभयक्रोधः/NP यः/SSN सदा/A मुक्तः/KN एव/INTF सः/SSN ।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 28/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 27/PUNC -/PUNC 5/PUNC ./PUNC 28/PUNC ।।/PUNC  -/PUNC स्पर्शान्/NP शब्दादीन्/NP कृत्वा/KKS बहिः/NP बाह्यान्/NP -/PUNC श्रोत्रादिद्वारेण/NP अन्तः/KN बुद्धौ/NP प्रवेशिताः/KN शब्दादयः/NP विषयाः/NP तान्/SN अचिन्तयतः/KN शब्दादयः/NP बाह्याः/NP बहिः/NP एव/INTF कृताः/KN भवन्ति/KP -/PUNC तान्/SN एवम्/AUD बहिः/NP कृत्वा/KKS चक्षुः/NP च/AVK एव/INTF अन्तरे/NP भ्रुवोः/KP '/PUNC कृत्वा/KKS '/PUNC इति/AUD अनुषज्यते/KP ।/PUNC तथा/AVK प्राणापानौ/NP नासाभ्यन्तरचारिणौ/NP समौ/NP कृत्वा/KKS ,/PUNC यतेन्द्रियमनोबुद्धिः/NP यतानि/NV संयतानि/NV इन्द्रियाणि/NP मनः/NP बुद्धिः/NP च/APY यस्य/SN सः/SNV यतेन्द्रियमनोबुद्धिः/NP ,/PUNC मननात्/NP मुनिः/NP संन्यासी/NP ,/PUNC मोक्षपरायणः/NP एवम्/AUD देहसंस्थानात्/NP मोक्षपरायणः/NP मोक्षः/NP एव/INTF परम्/NV अयनम्/NP परा/NV गतिः/NP यस्य/SN सः/SN अयम्/SNV मोक्षपरायणः/NV मुनिः/NP भवेत्/KP ।/PUNC विगतेच्छाभयक्रोधः/NP इच्छा/NP च/APY भयम्/NP च/APY क्रोधः/NP च/APY इच्छाभयक्रोधाः/NP ते/SN विगताः/KN यस्मात्/SN सः/SN विगतेच्छाभयक्रोधः/NP ,/PUNC यः/SSN एवम्/AUD वर्तते/KP सदा/A संन्यासी/NP ,/PUNC मुक्तः/KN एव/INTF सः/SN न/AN तस्य/SN मोक्षायान्यः/SNV कर्तव्यः/KN अस्ति/KP ।।/PUNC
एवम्/AUD समाहितचित्तेन/NP किम्/SN विज्ञेयम्/NP इति/AUD ,/PUNC उच्यते/KP -/PUNC

भोक्तारम्/NP यज्ञतपसाम्/NP सर्वलोकमहेश्वरम्/NP ।/PUNC 
सुहृदम्/NP सर्वभूतानाम्/NP ज्ञात्वा/KKS माम्/SN शान्तिम्/NP ऋच्छति/KP ।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 29/PUNC ।।/PUNC
इति/AUD श्रीमद्भगवद्गीतासु/NS उपनिषत्सु/NS ब्रह्मविद्यायाम्/NS योगशास्त्रे/NP श्रीकृष्णार्जुनसंवादे/NP संन्यासयोगः/NP नाम/NP पञ्चमः/SMKP अध्यायः/NP ।।/PUNC
।।/PUNC 5/PUNC ./PUNC 29/PUNC ।।/PUNC -/PUNC भोक्तारम्/NP यज्ञतपसाम्/NP यज्ञानाम्/NP तपसाम्/NP च/APY कर्तृरूपेण/ASD देवतारूपेण/ASD च/APY ,/PUNC सर्वलोकमहेश्वरम्/NP सर्वेषाम्/SNV लोकानाम्/NP महान्तम्/NV ईश्वरम्/NP सुहृदम्/NP सर्वभूतानाम्/NP सर्वप्राणिनाम्/NP प्रति/AUP उपकारनिरपेक्षतया/NP उपकारिणम्/NP सर्वभूतानाम्/NP हृदयेशयम्/NP सर्व/SNV कर्मफलाध्यक्षम्/NP सर्व/SNV प्रत्ययसाक्षिणम्/NP माम्/SNV नारायणम्/NP ज्ञात्वा/KKS शान्तिम्/NP सर्वसंसारोपरतिम्/NP ऋच्छति/KP प्राप्नोति/KP ।।/PUNC
इति/AUD श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्यस्य/NP श्रीगोविन्दभगवत्पूज्यपादशिष्यस्य/NP श्रीमत्/NV शंकरभगवतः/KN कृतौ/KN श्रीमद्भगवद्गीताभाष्ये/NP पञ्चमः/SMKP अध्यायः/NP ।।/PUNC
अतीतानन्तराध्यायान्ते/NP ध्यानयोगस्य/NP सम्यक्/NV दर्शनम्/NP प्रति/AUP अन्तरङ्गस्य/NP सूत्रभूताः/NV श्लोकाः/NP '/PUNC स्पर्शान्/NP कृत्वा/KKS बहिः/NP '/PUNC इत्यादयः/NP उपदिष्टाः/KN ।/PUNC तेषाम्/SN वृत्तिस्थानीयः/NP अयम्/SNV षष्ठः/SMKP अध्यायः/NP आरभ्यते/KP ।/PUNC तत्र/A ध्यानयोगस्य/NP बहिरङ्गम्/NV कर्म/NP इति/AUD ,/PUNC यावत्/AVK ध्यानयोगारोहणसमर्थः/NP तावत्/AVK गृहस्थेन/NP अधिकृतेन/NP कर्तव्यम्/KN कर्म/NP ,/PUNC इत्यतः/KN तत्/SN स्तौति/KP -/PUNC अनाश्रितः/KN इति/AUD ।।/PUNC
ननु/A किमर्थम्/NP ध्यानयोगारोहणसीमाकरणम्/NP ,/PUNC यावता/AVK अनुष्ठेयम्/NP एव/INTF विहितम्/KN कर्म/NP यावत्/AVK जीवम्/NP ।/PUNC न/AN '/PUNC आरुरुक्षोः/NP मुनेः/NP योगम्/NP कर्म/NP कारणम्/NP उच्यते/KP इति/AUD विशेषणात्/NP ,/PUNC आरूढस्य/NP च/AVK ,/PUNC शमेन/NP एव/INTF संबन्धकरणात्/NP ।/PUNC आरुरुक्षोः/NP आरूढस्य/NP च/AVK शमः/NP कर्म/NP च/APY उभयम्/SN कर्तव्यत्वेन/NP अभिप्रेतम्/NP चेत्/A स्यात्/KP ,/PUNC तदा/A '/PUNC आरुरुक्षोः/NP '/PUNC '/PUNC आरूढस्य/NP च/AVK '/PUNC इति/AUD शमकर्मविषयभेदेन/NP विशेषणम्/NP विभागकरणम्/NP च/APY अनर्थकम्/NP स्यात्/KP ।।/PUNC
तत्र/A आश्रमिणाम्/NP ,/PUNC कश्चित्/SNV योगमारुरुक्षुः/NP भवति/KP ,/PUNC आरूढः/NP च/AVK कश्चित्/SN ,/PUNC अन्ये/SN न/AN आरुरुक्षवः/NP न/AN च/AVK आरूढाः/NP ;/PUNC तान्/SN अपेक्ष्य/KKS '/PUNC आरुरुक्षोः/NP '/PUNC '/PUNC आरूढस्य/NP च/AVK '/PUNC इति/AUD विशेषणम्/NP विभागकरणम्/NP च/AVK उपपद्यत/KP एव/INTF इति/AUD चेत्/A ,/PUNC न/AN ;/PUNC '/PUNC तस्य/SN एव/INTF '/PUNC इति/AUD वचनात्/NP ,/PUNC पुनः/A योगग्रहणात्/NP च/AVK '/PUNC योगारूढस्य/NP '/PUNC इति/AUD ;/PUNC यः/SN आसीत्/KP पूर्वम्/A योगम्/NP आरुरुक्षुः/NP ,/PUNC तस्य/SN एव/INTF आरूढस्य/NP शमः/NP एव/INTF कर्तव्यः/KN कारणम्/NP योगफलम्/NP प्रति/AUP उच्यते/KP इति/AUD ।/PUNC अतः/A न/AN यावत्/A जीवम्/NP कर्तव्यत्वप्राप्तिः/NP कस्यचित्/SN अपि/A कर्मणः/NP ।/PUNC योगविभ्रष्टवचनात्/NP च/AVK -/PUNC गृहस्थस्य/NP चेत्/A कर्मिणः/NP योगः/NP विहितः/KN षष्ठे/SMKP अध्याये/NP ,/PUNC सः/SN योगविभ्रष्टः/NV अपि/A कर्मगतिम्/NP कर्मफलम्/NP प्राप्नोति/KP इति/AUD तस्य/SN न/AN अशाशङ्का/NP अनुपपन्ना/NP स्यात्/KP ।/PUNC अवश्यम्/NP हि/A कृतम्/KN कर्म/NP काम्यम्/NP नित्यम्/NP वा/APY -/PUNC मोक्षस्य/NP नित्यत्वात्/NP अनारभ्यत्वे/NP -/PUNC स्वम्/SN फलम्/NP आरभत/KP एव/INTF ।/PUNC नित्यस्य/NV कर्मणः/NP वेदप्रमाणावबुद्धत्वात्/NP फलेन/NP भवितव्यम्/KN इति/AUD अवोचाम/KP ,/PUNC अन्यथा/A वेदस्य/NP आनर्थक्यप्रसङ्गात्/NP इति/AUD ।/PUNC न/AN च/AVK कर्मणि/NP सति/A उभयविभ्रष्टवचनम्/NP अर्थवत्/ASD कर्मणः/NP विभ्रंशकारणानुपपत्तेः/NP ।।/PUNC
कर्म/NP कृतम्/KN ईश्वरे/NP संन्यस्य/NP इत्यतः/KN कर्तुः/NP कर्म/NV फलम्/NP न/AN आरभत/KP इति/AUD चेत्/A ,/PUNC न/AN ;/PUNC ईश्वरे/NP संन्यासस्य/NP अधिकतरफलहेतुत्वोपपत्तेः/NP ।।/PUNC
मोक्षाय/NP एव/INTF इति/AUD चेत्/A ,/PUNC स्व/SN कर्मणाम्/NP कृतानाम्/NP ईश्वरे/NP संन्यासः/NP मोक्षाय/NP एव/INTF ,/PUNC न/AN फलान्तराय/NP योगसहितः/KN ;/PUNC योगात्/NP च/AVK विभ्रष्टः/KN ;/PUNC इत्यतः/KN तम्/SN प्रति/AUP न/AN आशाशङ्का/NP युक्ता/KN एव/INTF इति/AUD चेत्/A ,/PUNC न/AN ;/PUNC '/PUNC एकाकी/A यतचित्तात्मा/NP निराशीरपरिग्रहः/NP '/PUNC ,/PUNC '/PUNC ब्रह्मचारिव्रते/NP स्थितः/KN '/PUNC इति/AUD कर्मसंन्यासविधानात्/NP ।/PUNC न/AN च/AVK अत्र/A ध्यानकाले/NP स्त्रीसहायत्वाशङ्का/NP ,/PUNC येन/SN एकाकित्वम्/NP विधीयते/KP ।/PUNC न/AN च/AVK गृहस्थस्य/NP '/PUNC निरीशीरपरिग्रहः/NP '/PUNC इत्यादि/A वचनम्/NP अनुकूलम्/NP ।/PUNC उभयविभ्रष्टप्रश्नानुपपत्तेः/NP च/AVK ।।/PUNC
अनाश्रितः/KN इति/AUD अनेन/SNV कर्मिणः/NP एव/INTF संन्यासित्वम्/NP योगित्वम्/NP च/APY उक्तम्/KN ,/PUNC प्रतिषिद्धम्/NP च/AVK निरग्नेः/NP अक्रियस्य/NP च/APY संन्यासित्वम्/NP योगित्वम्/NP च/APY इति/AUD चेत्/A ,/PUNC न/AN ;/PUNC ध्यानयोगम्/NP प्रति/AUP बहिरङ्गस्य/NP सतः/KN कर्मणः/NP फलाकाङ्क्षासंन्यासस्तुतिपरत्वात्/NP ।/PUNC न/AN केवलम्/A निरग्निः/NP अक्रियः/NP एव/INTF संन्यासी/NP योगी/NP च/APY ।/PUNC किम्/SN तर्हि/A ?/PUNC कर्मणि/NP अपि/A ,/PUNC कर्मफलासङ्गम्/NP संन्यस्य/NP कर्मयोगम्/NP अनुतिष्ठन्/KNV सत्त्वशुध्यर्थम्/NP ,/PUNC '/PUNC सः/SN सन्यासी/NP च/APY योगी/NP च/APY भवतिKP '/PUNC इति/AUD स्तूयते/KP ।/PUNC न/AN च/AVK एकेन/SMKY वाक्येन/NP कर्मफलासङ्गसंन्यासस्तुतिः/NP चतुर्थाश्रमप्रतिषेधः/NP च/APY उपपद्यते/KP ।/PUNC न/AN च/AVK प्रसिद्धम्/KN निरग्नेः/NP अक्रियस्य/NP परमार्थसंन्यासिनः/NP श्रुतिस्मृतिपुराणेतिहासयोगशास्त्रेषु/NP विहितम्/KN संन्यासित्वम्/NP योगित्वम्/NP च/APY प्रतिषेधति/KP भगवान्/NP ।/PUNC स्ववचनविरोधात्/NP च/AVK -/PUNC '/PUNC सर्व/SNV कर्माणि/NP मनसा/NP संन्यस्य/NP न/AN एव/INTF कर्वन्/KNV न/AN कारयन्/KNV आस्ते/KP '/PUNC '/PUNC मौनी/NP संतुष्टः/KN येन/SN केनचित्/A अनिकेतः/KN स्थिरमतिः/NP '/PUNC '/PUNC विहाय/KKS कामान्यः/NP सर्वान्/SNV पुमान्/NP चरति/KP निःस्पृहः/NP '/PUNC '/PUNC सर्वारम्भपरित्यागी/NP '/PUNC इति/AUD च/AVK तत्र/A तत्र/DV भगवता/NP स्ववचनानि/NP दर्शितानि/NP ;/PUNC तैः/SN विरुध्येत/KP चतुर्थाश्रमप्रतिषेधः/NP ।/PUNC तस्मात्/SN मुनेः/NP योगम्/NP आरुरुक्षोः/NP प्रतिपन्नगार्हस्थ्यस्य/NP अग्निहोत्रादिकर्म/NP फलनिरपेक्षम्/NP अनुष्ठीयमानम्/KN ध्यानयोगारोहणसाधनत्वम्/NP सत्त्वशुद्धिद्वारेण/NP प्रतिपद्यते/KP इति/AUD '/PUNC सः/SNV संन्यासी/NP च/APY योगी/NP च/APY '/PUNC इति/AUD स्तूयते/KP ।।/PUNC
श्रीभगवान्/NP उवाच/KP
अनाश्रितः/KN कर्मफलम्/NP कार्यम्/NP कर्म/NP करोति/KP यः/SSN ।/PUNC
सः/SSN संन्यासी/NP च/APY योगी/NP च/APY न/AN निरग्निः/NP न/AN च/APY अक्रियः/NP ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 1/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 1/PUNC ।।/PUNC -/PUNC अनाश्रितः/KN न/AN आश्रितः/KN अनाश्रितः/KN ।/PUNC किम्/SN ?/PUNC कर्मफलम्/NP कर्मणाम्/NP फलम्/NP कर्मफलम्/NP यत्/SSN तत्/SN अनाश्रितः/KN ,/PUNC कर्मफलतृष्णारहितः/KN इत्यर्थः/NP ।/PUNC यः/SSN हि/A कर्मफले/NP तृष्णावान्/KN सः/SSN कर्मफलमाश्रितः/KN भवति/KP ,/PUNC अयम्/SN तु/A तत्/SN विपरीतः/NP ,/PUNC अतः/A अनाश्रितः/NV कर्मफलम्/NP ।/PUNC एवंभूतः/KN सन्/KKS कार्यम्/NP कर्तव्यम्/KN नित्यम्/NV काम्यविपरीतम्/NP अग्निहोत्रादिकम्/NV कर्म/NP करोति/KP निर्वर्तयति/KP यः/SSN कश्चित्/SN ईदृशः/ASD कर्मी/NP सः/SN कर्म्यन्तरेभ्यः/NP विशिष्यते/KP इतिAUD एवम्/AUD अर्थम्/NP आह/KP -/PUNC सः/SNV संन्यासी/NP च/APY योगी/NP च/APY इति/AUD ।/PUNC संन्यासः/NP परित्यागः/NP सः/SN यस्य/SN अस्ति/KP सः/SNV संन्यासी/NP च/APY ,/PUNC योगी/NP च/APY योगः/NP चित्तसमाधानम्/NP सः/SN यस्य/SN अस्ति/KP सः/SNV योगी/NP च/AVK इति/AUD एवंगुणसंपन्नः/NP अयम्/SN मन्तव्यः/KN ;/PUNC न/AN केवलम्/A निरग्निः/NP अक्रियः/NP एव/INTF संन्यासी/NP योगी/NP च/APY इति/AUD मन्तव्यः/KN ।/PUNC निर्गताः/KN अग्नयः/NP कर्माङ्गभूताः/KN यस्मात्/SN सः/SN निरग्निः/NP ,/PUNC अक्रियः/NP च/AVK अनग्निसाधना/NP अपि/A अविद्यमानाः/KN क्रियाः/NP तपोदानादिकाः/NP यस्य/SN असौ/SN अक्रियः/NP ।।/PUNC
ननु/A च/AVK निरग्नेः/NP अक्रियस्य/NP एव/INTF श्रुतिस्मृतियोगशास्त्रेषु/NP संन्यासित्वम्/NP योगित्वम्/NP च/APY प्रसिद्धम्/KN ।/PUNC कथम्/A इह/A साग्नेः/NP सक्रियस्य/NP च/APY संन्यासित्वम्/NP योगित्वम्/NP च/APY अप्रसिद्धम्/NP उच्यते/KP इति/AUD ।/PUNC न/AN एषः/SNV दोषः/NP ,/PUNC कयाचित्/A गुणवृत्त्या/NP उभयस्य/SN संपिपादयिषितत्वात्/NP ।/PUNC तत्/SN कथम्/AP ?/PUNC कर्मफलसंकल्पसंन्यासात्/NP संन्यासित्वम्/NP ,/PUNC योगाङ्गत्वेन/NP च/APY कर्मानुष्ठानात्/NP कर्मफलसंकल्पस्य/NP च/APY चित्तविक्षेपहेतोः/NP परित्यागात्/NP योगित्वम्/NP च/APY इति/AUD गौणम्/NP उभयम्/SN ;/PUNC न/AN पुनः/A मुख्यम्/NV संन्यासित्वम्/NP योगित्वम्/NP च/APY अभिप्रेतम्/NP इति/AUD एतम्/SNV अर्थम्/NP दर्शयितुम्/KKS आह/KP -/PUNC
यम्/SSN संन्यासम्/NP इति/AUD प्राहुः/KP योगम्/NP तम्/SSN विद्धि/KP पाण्डव/NP ।/PUNC
न/AN हि/A असंन्यस्तसङ्कल्पः/NV योगी/NP भवति/KP कश्चन/SN ।।/PUNC 6/PUNC .2/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 2/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यम्/SSN सर्वकर्मतत्फलपरित्यागलक्षणम्/NP परमार्थसंन्यासम्/NP संन्यासम्/NP इति/AUD प्राहुः/KP श्रुतिस्मृतिविदः/NP ,/PUNC योगम्/NP कर्मानुष्ठानलक्षणम्/NP तम्/SNV परमार्थसंन्यासम्/NP विद्धि/KP जानीहि/KP हे/ASMB पाण्डव/NP ।/PUNC कर्मयोगस्य/NP प्रवृत्तिलक्षणस्य/NP तत्/SN विपरीतेन/NP निवृत्तिलक्षणेन/NP परमार्थसंन्यासेन/NP कीदृशम्/A सामान्यम्/NP अङ्गीकृत्य/KKS तद्भावः/NP उच्यते/KP इति/AUD अपेक्षायाम्/NP इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC अस्ति/KP हि/A परमार्थसंन्यासेन/NP सादृश्यम्/A कर्तृद्वारकम्/NP कर्मयोगस्य/NP ।/PUNC यः/SSN हि/A परमार्थसंन्यासी/NP सः/SSN त्यक्तसर्वकर्मसाधनतया/NP सर्वकर्मतत्फलविषयम्/NP संकल्पम्/NP प्रवृत्तिहेतुकामकारणम्/NP संन्यस्यति/KP ।/PUNC अयम्/SNV अपि/A कर्मयोगी/NP कर्म/NP कुर्वाणः/KN एव/INTF फलविषयम्/NP संकल्पम्/NP संन्यस्यति/KP इति/AUD एतम्/SNV अर्थम्/NP दर्शयिष्यन्/KNV आह/KP -/PUNC न/AN हि/A यस्मात्/SSN असंन्यस्तसंकल्पः/NP असंन्यस्तः/KN अपरित्यक्तः/KN फलविषयः/NP संकल्पः/NP अभिसंधिः/NP येन/SN सः/SSN असंन्यस्तसंकल्पः/NP कश्चन/SNV कश्चित्/SNV अपि/A कर्मी/NP योगी/NP समाधानवान्/KN भवति/KP न/AN संभवति/KP इत्यर्थः/NP ,/PUNC फलसंकल्पस्य/NP चित्तवेक्षेपहेतुत्वात्/NP ।/PUNC तस्मात्/SSN यः/SSN कश्चन/SNV कर्मी/NP संन्यस्तफलसंकल्पः/NP भवेत्/KP सः/SNV योगी/NP समाधानवान्/KN अविक्षिप्तचित्तः/KN भवेत्/KP ,/PUNC चित्तविक्षेपहेतोः/NP फलसंकल्पस्य/NP संन्यस्तत्वात्/NP इति/AUD अभिप्रायः/NP ।।/PUNC
एवम्/AUD परमार्थसंन्यासकर्मयोगयोः/NP कर्तृद्वारकम्/NP संन्याससामान्यमपेक्ष्य/KKS '/PUNC यम्/SSN संन्यासम्/NP इति/AUD प्राहुः/KP योगम्/NP तम्/SSN विद्धि/KP पाण्डव/NP '/PUNC इति/AUD कर्मयोगस्य/NP स्तुत्यर्थम्/NP संन्यासत्वम्/NP उक्तम्/KN ।/PUNC ध्यानयोगस्य/NP फलनिरपेक्षः/NV कर्मयोगः/NP बहिरङ्गम्/NV साधनम्/NP इति/AUD तम्/SN संन्यासत्वेन/NP स्तुत्वा/KKS अधुना/A कर्मयोगस्य/NP ध्यानयोगसाधनत्वम्/NP दर्शयति/KP -/PUNC
आरुरुक्षोः/NV मुनेः/NP योगम्/NP कर्म/NP कारणम्/NP उच्यते/KP ।/PUNC
योगारूढस्य/NV तस्य/SN एव/INTF शमः/NP कारणम्/NP उच्यते/KP ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 3/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 3/PUNC ।।/PUNC -/PUNC आरुरुक्षोः/NP आरोढुम्/KKS इच्छतः/KN ,/PUNC अनारूढस्य/NP ,/PUNC ध्यानयोगे/NP अवस्थातुम्/KKS अशक्तस्य/NP एव/INTF इत्यर्थः/NP ।/PUNC कस्य/SN तस्य/SN आरुरुक्षोः/NP ?/PUNC मुनेः/NP ,/PUNC कर्मफलसंन्यासिनः/NP इत्यर्थः/NP ।/PUNC किम्/SN आरुरुक्षोः/NP ?/PUNC योगम्/NP ।/PUNC कर्म/NP कारणम्/NP साधनम्/NP उच्यते/KP ।/PUNC योगारूढस्य/NP पुनः/A तस्य/SN एव/INTF शमः/NP उपशमः/NP सर्व/SNV कर्मभ्यः/NP निवृत्तिः/NV कारणम्/NP योगारूढस्य/NP साधनम्/NP उच्यते/KP इत्यर्थः/NP ।/PUNC यावत्/AVK यावत्/DV कर्मभ्यः/NP उपरमते/KP ,/PUNC तावत्तावत्/ASD निरायासस्य/NV जितेन्द्रियस्य/NP चित्तम्/NP समाधीयते/KP ।/PUNC तथा/AVK सति/A सः/SN झटिति/KV योगारूढः/NP भवति/KP ।/PUNC तथा/AVK च/AVK उक्तम्/KN व्यासेन/NS -/PUNC '/PUNC न/AN एतादृशम्/ASD ब्राह्मणस्य/NS अस्ति/KP चित्तम्/NP यथा/ASD एकता/NP समता/NP सत्यता/NP च/APY ।/PUNC शीलम्/NP स्थितिर्दण्डनिधानमार्जवम्/NP ततः/A ततः/DV च/AVK उपरमः/NP क्रियाभ्यः/NP (/PUNC महा0/NS शान्ति0/NS 175/PUNC ।/PUNC 37/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD ।।/PUNC
अथ/A इदानीम्/A कदा/A योगारूढः/NP भवति/KP इति/AUD उच्यते/KP -/PUNC
यदा/A हि/A न/AN इन्द्रियार्थेषु/NP न/AN कर्मसु/NP अनुषज्जते/KP ।/PUNC
सर्वसङ्कल्पसंन्यासी/NP योगारूढः/NP तदा/A उच्यते/KP ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 4/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 4/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यदा/AVK समाधीयमानचित्तः/NV योगी/NP हि/A इन्द्रियार्थेषु/NP इन्द्रियाणाम्/NP अर्थाः/NP शब्दादयः/NP तेषु/SNV इन्द्रियार्थेषु/NP कर्मसु/NP च/AVK नित्यनैमित्तिककाम्यप्रतिषिद्धेषु/NP प्रयोजनाभावबुद्ध्या/NP न/AN अनुषज्जते/KP अनुषङ्गम्/NP कर्तव्यताबुद्धिम्/NP न/AN करोति/KP इत्यर्थः/NP ।/PUNC सर्वसंकल्पसंन्यासी/NP सर्वान्/SNV संकल्पान्/NP इह/A अमुत्रार्थकामहेतून्/NP संन्यसितुम्/KKS शीलम्/NP अस्य/SN इति/AUD सर्वसंकल्पसंन्यासी/NP ,/PUNC योगारूढः/NP प्राप्तयोगः/NP इति/AUD एतत्/SN ,/PUNC तदा/AVK तस्मिन्/SNV काले/NP उच्यते/KP ।/PUNC '/PUNC सर्वसंकल्पसंन्यासी/NP '/PUNC इति/AUD वचनात्/NP सर्वान्/SNV च/AVK कामान्/NP सर्वाणि/SNV च/AVK कर्माणि/NP संन्यस्येत्/KP इत्यर्थः/NP ।/PUNC संकल्पमूलाः/NP हि/A सर्वे/SNV कामाः/NP -/PUNC '/PUNC संकल्पमूलः/NV कामः/NP वै/SNV यज्ञाः/NP संकल्पसंभवाः/NP (/PUNC मनु/NS 2/PUNC ।/PUNC 3/PUNC )/PUNC ।/PUNC काम/NP जानामि/KP ते/SN मूलम्/NV संकल्पात्/NP किल/A जायसे/KP ।/PUNC न/AN त्वाम्/SN संकल्पयिष्यामि/KP तेन/SN मे/SN न/AN भविष्यसि/KP (/PUNC महा0/NS शान्ति0/NS 177/PUNC ।/PUNC 25/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादिस्मृतेः/NS ।/PUNC सर्वकामपरित्यागे/NP च/AVK सर्वकर्मसंन्यासः/NP सिद्धः/NP भवति/KP ,/PUNC '/PUNC सः/SN यथाकामः/NP भवति/KP तत्/SSN क्रतुः/NP भवति/KP यत्/SSN क्रतुः/NP भवति/KP तत्/SNV कर्म/NP कुरुते/KP (/PUNC बृह0/NS उ0/NS 4/PUNC ।/PUNC 4/PUNC ।/PUNC 5/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादिश्रुतिभ्यः/NP ;/PUNC '/PUNC यत्/SSN यत्/DV हि/A कुरुते/KP जन्तुः/NP तत्/SSN तत्/DV कामस्य/NP चेष्टितम्/KN (/PUNC मनु0/NS 2/PUNC ।/PUNC 4/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादिस्मृतिभ्यः/NP च/AVK ;/PUNC न्यायात्/NP च/APY -/PUNC न/AN हि/A सर्वसंकल्पसंन्यासे/NP कश्चित्/SN स्पन्दितुम्/KKS अपि/A शक्तः/KN ।/PUNC तस्मात्/SN '/PUNC सर्वसंकल्पसंन्यासी/NP '/PUNC इति/AUD वचनात्/NP सर्वान्/SNV कामान्/NP सर्वाणि/SNV कर्माणि/NP च/APY त्याजयति/KP भगवान्/NP ।।/PUNC
यदा/AVK एवम्/AUD योगारूढः/NP ,/PUNC तदा/AVK तेन/SN आत्मा/NP उद्धृतः/KN भवति/KP संसारात्/NP अनर्थजातात्/NP ।/PUNC अतः/A -/PUNC
उद्धरेत्/KP आत्मना/NP आत्मानम्/NP न/AN आत्मानम्/NP अवसादयेत्/KP ।/PUNC
आत्मा/NP एव/INTF हि/A आत्मनः/SNV बन्धुः/NP आत्मा/NP एव/INTF रिपुः/NP आत्मनः/SN ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 5/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 5/PUNC ।।/PUNC -/PUNC उद्धरेत्/KP संसारसागरे/NP निमग्नम्/NV आत्मना/NP आत्मानम्/NP ततः/A उत्/AVK ऊर्ध्वम्/AUP हरेत्/KP उद्धरेत्/KP ,/PUNC योगारूढताम्/NP आपादयेत्/KP इत्यर्थः/NP ।/PUNC न/AN आत्मानम्/NP अवसादयेत्/KP न/AN अधः/AUP नयेत्/KP ,/PUNC न/AN अधः/AUP गमयेत्/KP ।/PUNC आत्मा/NP एव/INTF हि/A यस्मात्/SN आत्मनः/NV बन्धुः/NP ।/PUNC न/AN हि/A अन्यः/SN कश्चित्/SNV बन्धुः/NP ,/PUNC यः/SN संसारमुक्तये/NP भवति/KP ।/PUNC बन्धुः/NP अपि/A तावत्/A मोक्षम्/NP प्रति/AUP प्रतिकूलः/NP एव/INTF ,/PUNC स्नेहादिबन्धनायतनत्वात्/NP ।/PUNC तस्मात्/SN युक्तम्/KN अवधारणम्/NP '/PUNC आत्मा/NP एव/INTF हि/A आत्मनः/NV बन्धुः/NP '/PUNC इति/AUD ।/PUNC आत्मा/NP एव/INTF रिपुः/NP शत्रुः/NP ।/PUNC यः/SSN अन्यः/SNV अपकारी/NV बाह्यः/NV शत्रुः/NP सः/SSN अपि/A आत्मप्रयुक्तः/KN एव/INTF इति/AUD युक्तम्/KN एव/INTF अवधारणम्/NP '/PUNC आत्मा/NP एव/INTF रिपुरात्मनः/NP '/PUNC इति/AUD ।।/PUNC
आत्मा/NP एव/INTF बन्धुः/NV आत्मा/NP एव/INTF रिपुः/NV आत्मनः/NP इति/AUD उक्तम्/KN ।/PUNC तत्र/A किंलक्षण/NV आत्मा/NP आत्मनः/NP बन्धुः/NP ,/PUNC किंलक्षणः/NV वा/AVK आत्मा/NP आत्मनः/NP रिपुः/NP इति/AUD उच्यते/KP -/PUNC
बन्धुः/NV आत्मा/NP आत्मनः/NP तस्य/SN येन/SN आत्मा/NP एव/INTF आत्मना/NP जितः/KN ।/PUNC
अनात्मनः/NP तु/A शत्रुत्वे/NP वर्तेत/KP आत्मा/NP एव/INTF शत्रुवत्/ASD ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 6/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 6/PUNC ।।/PUNC -/PUNC बन्धुः/NV आत्मा/NP आत्मनः/NP तस्य/SN ,/PUNC तस्य/SN आत्मनः/NP सः/SNV आत्मा/NP बन्धुः/NP येन/SN आत्मना/NP आत्मा/NP एव/INTF जितः/KN ,/PUNC आत्मा/NP कार्यकरणसंघातः/KN येन/SN वशीकृतः/KN ,/PUNC जितेन्द्रियः/NP इत्यर्थः/NP ।/PUNC अनात्मनः/NP तु/A अजितात्मनः/NP तु/A शत्रुत्वे/NP शत्रुभावे/NP वर्तेत/KP आत्मा/NP एव/INTF शत्रुवत्/ASD ,/PUNC यथा/AVK अनात्मा/NP शत्रुः/NP आत्मनः/NP अपकारी/NP ,/PUNC तथा/AVK आत्मा/NP आत्मनः/NP अपकारे/NP वर्तेत/KP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC
जितात्मनः/NV प्रशान्तस्य/NV परमात्मा/NP समाहितः/KN ।/PUNC
शीतोष्णसुखदुःखेषु/NP तथा/APY मानापमानयोः/NP ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 7/PUNC ।।/PUNC 
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 7/PUNC ।।/PUNC -/PUNC जितात्मनः/NV कार्यकरणसंघातः/NV आत्मा/NP जितः/KN येन/SN सः/SNV जितात्मा/NP तस्य/SN जितात्मनः/NP ,/PUNC प्रशान्तस्य/NV प्रसन्नान्तःकरणस्य/NV सतः/KN संन्यासिनः/NP परमात्मा/NP समाहितः/KN साक्षात्/A आत्मभावेन/NP वर्तते/KP इत्यर्थः/NP ।/PUNC किम्/SN च/AVK शीतोष्णसुखदुःखेषु/NP तथा/APY माने/NP अपमाने/NP च/APY मानापमानयोः/NP पूजापरिभवयोः/NP समः/NP स्यात्/KP ।।/PUNC
ज्ञानविज्ञानतृप्तात्मा/NV कूटस्थः/NV विजितेन्द्रियः/NV ।/PUNC
युक्तः/KN इति/AUD उच्यते/KP योगी/NP समलोष्टाश्मकाञ्चनः/NP ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 8/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 8/PUNC ।।/PUNC -/PUNC ज्ञानविज्ञानतृप्तात्मा/NV ज्ञानम्/NP शास्त्रोक्तपदार्थानाम्/NP परिज्ञानम्/NP ,/PUNC विज्ञानम्/NP तु/A शास्त्रतः/KN ज्ञातानाम्/NP तथा/AVK एव/INTF स्वानुभवकरणम्/NP ,/PUNC ताभ्याम्/SNV ज्ञानविज्ञानाभ्याम्/NPतृप्तः/KN संजातालंप्रत्ययः/NV आत्मा/NP अन्तःकरणम्/NP यस्य/SN सः/SN ज्ञानविज्ञानतृप्तात्मा/NV ,/PUNC कूटस्थः/NV अप्रकम्प्यः/NV ,/PUNC भवति/KP इत्यर्थः/NP ;/PUNC विजितेन्द्रियः/NV च/AVK ।/PUNC यः/SSN ईदृशः/ASD ,/PUNC युक्तः/KN समाहितः/KN इति/AUD सः/SSN उच्यते/KP कथ्यते/KP ।/PUNC सः/SSN योगी/NP समलोष्टाश्मकाञ्चनः/NV लोष्टाश्मकाञ्चनानि/NP समानि/NP यस्य/SN सः/SNV समलोष्टाश्मकाञ्चनः/NP ।।/PUNC
किम्/SN च/AVK -/PUNC
सुहृत्/NP मित्रार्युदासीनमध्यस्थद्वेष्यबन्धुषु/NP ।/PUNC
साधुषु/NP अपि/AVK च/AVK पापेषु/NP समबुद्धिः/NP विशिष्यते/KP ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 9/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 9/PUNC ।।/PUNC -/PUNC '/PUNC सुहृत्/NP '/PUNC इत्यादिश्लोकार्धम्/NP एकम्/SMKY पदम्/NP ।/PUNC सुहृत्/NP इति/AUD प्रति/AUP उपकारमनपेक्ष्य/KKS उपकर्ता/NP ,/PUNC मित्रम्/NP स्नेहवान्/KN ,/PUNC अरिः/NP शत्रुः/NP ,/PUNC उदासीनः/NP न/AN कस्यचित्/SNV पक्षम्/NP भजते/KP ,/PUNC मध्यस्थः/KN यः/SN विरुद्धयोः/NP उभयोः/SN हितैषी/NP ,/PUNC द्वेष्यः/NP आत्मनः/NP अप्रियः/NP ,/PUNC बन्धुः/NP संबन्धी/NP इति/AUD एतेषु/SNV साधुषु/NP शास्त्रानुवर्तिषु/NP अपि/AVK च/AVK पापेषु/NP प्रतिषिद्धकारिषु/NP सर्वेषु/SN एतेषु/SNV समबुद्धिः/NP '/PUNC कः/SN किंकर्मा/NP '/PUNC इति/AUD अव्यापृतबुद्धिः/NP इत्यर्थः/NP ।/PUNC विशिष्यते/KP ,/PUNC '/PUNC विमुच्यते/KP '/PUNC इति/AUD वा/AVK पाठान्तरम्/NP ।/PUNC योगारूढानाम्/NP सर्वेषाम्/SN अयम्/SNV उत्तमः/NP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC
अतः/A एवम्/AUD उत्तमफलप्राप्तये/NP -/PUNC
योगी/NP युञ्जीत/KP सततमात्मानम्/NP रहसि/NP स्थितः/KN ।/PUNC
एकाकी/A यतचित्तात्मा/NP निराशीः/NP परिग्रहः/NP ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 10/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 10/PUNC ।।/PUNC -/PUNC योगी/NP ध्यायी/NP युञ्जीत/KP समादध्यात्/NP सततम्/A सर्वदा/A आत्मानम्/NP अन्तःकरणम्/NP रहसि/NP एकान्ते/NP गिरिगुहादौ/NP स्थितः/KN सन्/KKS एकाकी/A असहायः/NP ।/PUNC '/PUNC रहसि/NP स्थितः/KN एकाकी/A च/AVK '/PUNC इति/AUD विशेषणात्/NP संन्यासम्/NP कृत्वा/KKS इत्यर्थः/NP ।/PUNC यतचित्तात्मा/NP चित्तम्/NP अन्तःकरणम्/NP आत्मा/NP देहः/NP च/AVK संयतौ/KN यस्य/SN सः/SN यतचित्तात्मा/NP ,/PUNC निराशीः/NP वीततृष्णः/NP अपरिग्रहः/NP परिग्रहरहितः/KN च/APY इत्यर्थः/NP ।/PUNC संन्यासित्वे/NP अपि/A त्यक्तसर्वपरिग्रहः/NP सन्/KKS युञ्जीत/KP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC
अथ/A इदानीम्/A योगम्/NP युञ्जतः/KN आसनाहारविहारादीनाम्/NP योगसाधनत्वेन/NP नियमः/NP वक्तव्यः/KN ,/PUNC प्राप्तयोगस्य/NP लक्षणम्/NP तत्/SNV फलादि/NP च/AVK ,/PUNC इत्यतः/KN आरभ्यते/KP ।/PUNC तत्र/A आसनम्/NP एव/INTF तावत्/A प्रथमम्/SMKP उच्यते/KP -/PUNC
शुचौ/NV देशे/NP प्रतिष्ठाप्य/KKS स्थिरम्/NV आसनम्/NP आत्मनः/NP ।/PUNC
न/AN अत्युच्छ्रितम्/NV न/AN अतिनीचम्/NV चैलाजिनकुशोत्तरम्/NV ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 11/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 11/PUNC ।।/PUNC -/PUNC शुचौ/NV शुद्धे/NV विविक्ते/KN स्वभावतः/KN संस्कारतः/KN वा/APY, देशे/NP स्थाने/NP प्रतिष्ठाप्य/KKS स्थिरम्/NV अचलम्/NV आत्मनः/NP आसनम्/NP न/AN अत्युच्छ्रितम्/NV न/AN अतीव/NV उच्छ्रितम्/KN न/AN अपि/A अतिनीचम्/NV ,/PUNC तत्/SN च/AVK चैलाजिनकुशोत्तरम्/NV चैलम्/NP अजिनम्/NP कुशाः/NP च/APY उत्तरे/NS यस्मिन्/SNV आसने/NP तत्/SNV आसनम्/NP चैलाजिनकुशोत्तरम्/NV ।/PUNC पाठक्रमात्/NP विपरीतः/NP अत्र/A क्रमः/NP चैलादीनाम्/NP ।।/PUNC
प्रतिष्ठाप्य/KKS ,/PUNC किम्/SN ?/PUNC -/PUNC
तत्र/A एकाग्रम्/NV मनः/NP कृत्वा/KKS यतचित्तेन्द्रियक्रियः/NP ।/PUNC
उपविश्य/KKS आसने/NP युञ्ज्यात्/KP योगम्/NP आत्मविशुद्धये/NP ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 12/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 12/PUNC ।।/PUNC -/PUNC तत्र/A तस्मिन्/SNV आसने/NP उपविश्य/KKS योगम्/NP युञ्ज्यात्/KP ।/PUNC कथम्/AP ?/PUNC सर्वविषयेभ्यः/NP उपसंहृत्य/KKS एकाग्रम्/NV मनः/NP कृत्वा/KKS यतचित्तेन्द्रियक्रियः/NV चित्तम्/NP च/APY इन्द्रियाणि/NP च/APY चित्तेन्द्रियाणि/NP तेषाम्/SN क्रियाः/NP संयता/KN यस्य/SN सः/SNV यतचित्तेन्द्रियक्रियः/NP ।/PUNC सः/SN किमर्थम्/NP योगम्/NP युञ्ज्यात्/KP इति/AUD आह/KP -/PUNC आत्मविशुद्धये/NP अन्तःकरणस्य/NP विशुद्ध्यर्थम्/NP इति/AUD एतत्/SN ।।/PUNC
बाह्यम्/NV आसनम्/NP उक्तम्/KN ;/PUNC अधुना/A शरीरधारणम्/NP कथम्/A इति/AUD उच्यते/KP -/PUNC
समम्/AUP कायशिरोग्रीवम्/NP धारयन्/KNV अचलम्/NP स्थिरः/NP ।/PUNC
संप्रेक्ष्य/KKS नासिकाग्रम्/A स्वम्/SNV दिशः/NP च/AVK अनवलोकयन्/KNV ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 13/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 13/PUNC ।।/PUNC -/PUNC समम्/AUP कायशिरोग्रीवम्/NP कायः/NP च/APY शिरः/NP च/APY ग्रीवाः/NP च/APY कायशिरोग्रीवम्/NP तत्/SN समम्/AUP धारयन्/KNV अचलम्/NP च/APY ।/PUNC समम्//AUP धारयतः/KN चलनम्/NP संभवति/KP ;/PUNC अतः/A विशिनष्टि/NP -/PUNC अचलम्/NP इति/AUD ।/PUNC स्थिरः/NP स्थिरः/DV भूत्वा/KKS इत्यर्थः/NP ।/PUNC स्वम्/SN नासिकाग्रम्/NP संप्रेक्ष्य/KKS सम्यक्/NV प्रेक्षणम्/NP दर्शनम्/NP कृत्वा/KKS इव/ASD इति/AUD ।/PUNC इवशब्दः/NP लुप्तः/KN द्रष्टव्यः/KN ।/PUNC न/AN हि/A स्वनासिकाग्रसंप्रेक्षणम्/NP इह/A विधित्सितम्/NP ।/PUNC किम्/SN तर्हि/A ?/PUNC चक्षुषः/NP दृष्टिसंनिपातः/KN ।/PUNC सः/SN च/AVK अन्तःकरणसमाधानापेक्षः/NP विवक्षितः/KN ।/PUNC स्वनासिकाग्रसंप्रेक्षणम्/NP एव/INTF चेत्/A विवक्षितम्/KN ,/PUNC मनः/NP तत्र/A एव/INTF समाधीयेत/KP ,/PUNC न/AN आत्मनि/NP ।/PUNC आत्मनि/NP हि/A मनसः/NP समाधानम्/NP वक्ष्यति/KP '/PUNC आत्मसंस्थम्/NP मनः/NP कृत्वा/KKS (/PUNC गीता/NS 6/PUNC ।/PUNC 25/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD ।/PUNC तस्मात्/SN इवशब्दलोपेन/NP अक्ष्णोः/NP दृष्टिसंनिपातः/KN एव/INTF '/PUNC संप्रेक्ष्य/KKS '/PUNC इति/AUD उच्यते/KP ।/PUNC दिशः/NP च/AVK अनवलोकयन्/KNV दिशाम्/NP च/AVK अवलोकनम्/NP अन्तराकुर्वन्/KNV इति/AUD एतत्/SN ।।/PUNC
किम्/SN च/AVK -/PUNC
प्रशान्तात्मा/NV विगतभीः/NV ब्रह्मचारिव्रते/NP स्थितः/KN ।/PUNC
मनः/NP संयम्य/KKS मत्/SN चित्तः/KN युक्तः/KN आसीत/KP मत्परः/NP ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 14/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 14/PUNC ।।/PUNC -/PUNC प्रशान्तात्मा/NP प्रकर्षेण/NP शान्तः/KN आत्मा/NP अन्तःकरणम्/NP यस्य/SN सः/SN अयम्/SNV प्रशान्तात्मा/NP ,/PUNC विगतभीः/NP विगतभयः/NP ,/PUNC ब्रह्मचारिव्रते/NP स्थितः/KN ब्रह्मचारिणः/NP व्रतम्/NP ब्रह्मचर्यम्/NP गुरुशुश्रूषाभिक्षान्नभुक्त्यादि/NP तस्मिन्/SN स्थितः/KN ,/PUNC तत्/SN अनुष्ठाता/NP भवेत्/KP इत्यर्थः/NP ।/PUNC किम्/SN च/AVK ,/PUNC मनः/NP संयम्य/KKS मनसः/NV वृत्तीः/NP उपसंहृत्य/KKS इति/AUD एतत्/SN ,/PUNC मत्/SN चित्तः/NP मयि/SN परमेश्वरे/NP चित्तम्/NP यस्य/SN सः/SN अयम्/SNV मत्/SN चित्तः/NP ,/PUNC युक्तः/KN समाहितः/KN सन्/KKS आसीत/KP उपविशेत्/KP ।/PUNC मत्/SN परः/NP अहम्/SN परः/NP यस्य/SN सः/SN अयम्/SNV मत्/SN परः/NP भवति/KP ।/PUNC कश्चित्/SNV रागी/NP स्त्रीचित्तः/KN ,/PUNC न/AN तु/A स्त्रियम्/NP एव/INTF परत्वेन/NP गृह्णाति/KP ;/PUNC किम्/SN तर्हि/A ?/PUNC राजानम्/NP महादेवम्/NP वा/APY ।/PUNC अयम्/SN तु/A मत्/SN चित्तः/NP मत्/SN परः/NP च/APY ।।/PUNC
अथ/A इदानीम्/A योगफलम्/NP उच्यते/KP -/PUNC
युञ्जन्/KNV एवम्/AUD सदा/A आत्मानम्/NP योगी/NP नियतमानसः/NV ।/PUNC
शान्तिम्/NP निर्वाणपरमाम्/NP मत्संस्थाम्/NP अधिगच्छति/KP ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 15/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 15/PUNC ।।/PUNC -/PUNC युञ्जन्/KNV समाधानम्/NP कुर्वन्/KNV एवम्/AUD यथा/ASD उक्तेन/NP विधानेन/NP सदा/A आत्मानम्/NP सर्वदा/A योगी/NP नियतमानसः/NV नियतम्/NV संयतम्/NV मानसम्/NP मनःNP यस्य/SN सः/SN अयम्/SNV नियतमानसः/NP ,/PUNC शान्तिम्/NP उपरतिम्/NP निर्वाणपरमाम्/NP निर्वाणम्/NP मोक्षः/NP तत्/SNV परमा/NV निष्ठा/NP यस्याः/SN शान्तेः/NP सा/SN निर्वाणपरमा/NP ताम्/SN निर्वाणपरमाम्/NP मत्संस्थाम्/NP मत्/SN अधीनाम्/NP अधिगच्छति/KP प्राप्नोति/KP ।।/PUNC
इदानीम्/A योगिनः/NP आहारादिनियमः/NP उच्यते/KP -/PUNC
न/AN त्यश्नतः/KN तु/A योगः/NP अस्ति/KP न/AN च/AVK एकान्तम्/A अनश्नतः/KN ।/PUNC
न/AN च/AVK अतिस्वप्नशीलस्य/NP जाग्रतः/KN न/AN एव/INTF च/AVK अर्जुन/NS ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 16/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 16/PUNC ।।/PUNC -/PUNC न/AN अत्यश्नतः/KN आत्मसंमितमन्नपरिमाणमतीत्याश्नतः/KN अत्यश्नतः/KN न/AN योगः/NP अस्ति/KP ।/PUNC न/AN च/AVK एकान्तम्/A अनश्नतः/KN योगः/NP अस्ति/KP ।/PUNC '/PUNC यदु/SSN ह/A वा/AVK आत्मसंमितम्/NV अन्नम्/NP तदवति/ASD तन्न/AN हिनस्ति/KP यद्भूयः/NP हिनस्ति/KP तद्यत्/SN कनीयः/NV अन्नम्/NP न/AN तदवति/ASD (/PUNC शतपथ/NS )/PUNC '/PUNC इति/AUD श्रुतेः/NS ।/PUNC तस्मात्/SN योगी/NP न/AN आत्मसंमितात्/NV अन्नात्/NP अधिकम्/NV न्यूनम्/NV वा/APY अश्नीयात्/NP ।/PUNC अथवा/AVK ,/PUNC योगिनः/NP योगशास्त्रे/NP परिपठितात्/NP अन्नपरिमाणात्/NP अतिमात्रम्/NP अश्नतः/KN योगः/NP न/AN अस्ति/KP ।/PUNC उक्तम्/KN हि/A -/PUNC '/PUNC अर्धम्/AUP अशनस्य/NP सव्यञ्जनान्/NP अस्य/SN तृतीयम्/SMKY उदकस्य/NP च/APY ।/PUNC वायोः/NP संचरणार्थम्/NP तु/A चतुर्थम्/SMKP अवशेषयेत्/KP '/PUNC इत्यादि/A परिमाणम्/NP ।/PUNC तथा/AVK -/PUNC न/AN च/AVK अतिस्वप्नशीलस्य/NV योगः/NP भवति/KP न/AN एव/INTF च/AVK अतिमात्रम्/NP जाग्रतः/KN भवति/KP च/AVK अर्जुन/NS ।।/PUNC
कथम्/A पुनः/A योगः/NP भवति/KP इति/AUD उच्यते/KP -/PUNC
युक्ताहारविहारस्य/NV युक्तचेष्टस्य/NV कर्मसु/NP ।/PUNC
युक्तस्वप्नावबोधस्य/NV योगः/NP भवति/KP दुःखहा/NP ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 17/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 17/PUNC ।।/PUNC -/PUNC युक्ताहारविहारस्य/NP आह्रियते/KP इति/AUD आहारः/NP अन्नम्/NP,/PUNC विहरणम्/NP विहारः/NP पादक्रमः/NP ,/PUNC तौ/SN युक्तौ/KN नियतपरिमाणौ/NP यस्य/SSN सः/SNV युक्ताहारविहारः/NP तस्य/SSN ,/PUNC तथा/AVK युक्तचेष्टस्य/NP युक्ता/KN नियता/NV चेष्टा/NP यस्य/SSN कर्मसु/NP तस्य/SSN ,/PUNC तथा/AVK युक्तस्वप्नावबोधस्य/NP युक्तौ/KN स्वप्नः/NP च/AVK अवबोधः/NP च/AVK तौ/SN नियतकालौ/NP यस्य/SSN तस्य/SSN ,/PUNC युक्त्ताहारविहारस्य/NP युक्त्तचेष्टस्य/NP कर्मसु/NP युक्त्तस्वप्नावबोधस्य/NP योगिनः/NP योगः/NP भवति/KP दुःखहा/NP दुःखानि/NP सर्वाणि/SN हन्ति/KP इति/AUD दुःखहा/NP ,/PUNC सर्वसंसारदुःखक्षयकृत्/NP योगः/NP भवति/KP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC
अथ/A अधुना/A कदा/A युक्तः/KN भवति/KP इति/AUD उच्यते/KP -/PUNC
यदा/AVK विनियतम्/NV चित्तम्/NP आत्मनि/NP एव/INTF अवतिष्ठते/KP ।/PUNC  
निःस्पृहः/NV सर्वकामेभ्यः/NP युक्तः/KN इति/AUD उच्यते/KP तदा/AVK ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 18/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 18/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यदा/AVK विनियतम्/NV चित्तम्/NP विशेषेण/NP नियतम्/NV संयतम्/NP एकाग्रताम्/NP आपन्नम्/NP चित्तम्/NP हित्वा/KKS बाह्यार्थचिन्ताम्/NP आत्मनि/NP एव/INTF केवले/A अवतिष्ठते/KP ,/PUNC स्वात्मनि/NP स्थितिम्/NP लभते/KP इत्यर्थः/NP ।/PUNC निःस्पृहः/NV सर्वकामेभ्यः/NP निर्गता/KN दृष्टादृष्टविषयेभ्यः/NP स्पृहा/NP तृष्णा/NP यस्य/SSN योगिनः/NP सः/SN युक्तः/KN समाहितः/KN इति/AUD उच्यते/KP तदा/A तस्मिन्/SNV काले/NP ।।/PUNC
तस्य/SNV योगिनः/NP समाहितम्/KN यत्/SNV चित्तम्/NP तस्य/SN उपमा/NP उच्यते/KP -/PUNC
यथा/ASD दीपः/NP निवातस्थः/KN न/AN इङ्गते/KP सोपमा/NP स्मृता/KN ।/PUNC
योगिनः/NP यतचित्तस्य/NP युञ्जतः/KN योगम्/NP आत्मनः/NP ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 19/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 19/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यथा/ASD दीपः/NP प्रदीपः/NP निवातस्थः/KN निवाते/NV वातवर्जिते/NV देशे/NP स्थितः/KN न/AN इङ्गते/KP न/AN चलति/KP ,/PUNC सा/SNV उपमा/NP उपमीयते/KP अनया/SN इति/AUD उपमा/NP योगज्ञैः/NP चित्तप्रचारदर्शिभिः/NP स्मृता/KN चिन्तिता/KN योगिनः/NP यतचित्तस्य/NP संयतान्तःकरणस्य/NP युञ्जतः/KN योगम्/NP अनुतिष्ठतः/KN आत्मनः/NP समाधिम्/NP अनुतिष्ठत/KN इत्यर्थः/NP ।।/PUNC
एवम्/AUD योगाभ्यासबलात्/NP एकाग्रीभूतम्/NP निवातप्रदीपकल्पम्/NP सत्/A -/PUNC
यत्र/A उपरमते/KP चित्तम्/NP निरुद्धम्/NP योगसेवया/NP ।/PUNC
यत्र/A च/AVK एव/INTF आत्मना/NP आत्मानम्/NP पश्यन्/KNV आत्मनि/NP तुष्यति/KP ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 20/PUNC ।।/PUNC

।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 20/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यत्र/A यस्मिन्/SNV काले/NP उपरमते/KP चित्तम्/NP उपरतिम्/KP गच्छति/KP निरुद्धम्/NP सर्वतः/AUP निवारितप्रचारम्/NP योगसेवया/NP योगानुष्ठानेन/NP ,/PUNC यत्र/A च/AVK एव/INTF यस्मिन्/SNV च/AVK काले/NP आत्मना/NP समाधिपरिशुद्धेन/NP अन्तःकरणेन/NP आत्मानम्/NP परम्/NV चैतन्यम्/NP ज्योतिःस्वरूपम्/NP पश्यन्/KNV उपलभमानः/KN स्वे/SN एव/INTF आत्मनि/NP तुष्यति/KP तुष्टिम्/NP भजते/KP ।।/PUNC
किम्/SN च/AVK -/PUNC
सुखम्/NP आत्यन्तिकम्/NP यत्/SSN तत्/SSN बुद्धिग्राह्यम्/NP अतीन्द्रियम्/NP ।/PUNC
वेत्ति/KP यत्र/A न/AN च/AVK एव/INTF अयम्/SN स्थितः/KN चलति/KP तत्त्वतः/KN ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 21/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 21/PUNC ।।/PUNC -/PUNC सुखम्/NP आत्यन्तिकम्/NP अत्यन्तम्/NV एव/INTF भवति/KP इति/AUD आत्यन्तिकम्/NP अनन्तम्/NP इत्यर्थः/NP ,/PUNC यत्/SSN तत्/SSN बुद्धिग्राह्यम्/NP बुद्ध्या/NP एव/INTF इन्द्रियनिरपेक्षया/NP गृह्यते/KP इति/AUD बुद्धिग्राह्यम्/NV अतीन्द्रियम्/NV इन्द्रियगोचरातीतम्/NV अविषयजनितम्/NV इत्यर्थः/NP ,/PUNC वेत्ति/KP तत्/SN ईदृशम्/ASD सुखम्/NP अनुभवति/KP यत्र/A यस्मिन्/SNV काले/NP ,/PUNC न/AN च/AVK एव/INTF अयम्/SNV विद्वान्/NP आत्मस्वरूपे/ASD स्थितः/KN तस्मात्/SN न/AN एव/INTF चलति/KP तत्त्वतः/KN तत्त्वस्वरूपात्/NP न/AN प्रच्यवते/KP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC
किम्/SN च/AVK -/PUNC
यम्/SN लब्ध्वा/KKS च/AVK अपरम्/SNV लाभम्/NP मन्यते/KP न/AN अधिकम्/NP ततः/A ।/PUNC
यस्मिन्/SN स्थितः/KN न/AN दुःखेन/NP गुरुणा/NP अपि/A विचाल्यते/KP ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 22/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 22/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यम्/SN लब्ध्वाम्/NP यम्/SN आत्मलाभम्/NP लब्ध्वा/KN प्राप्य/KKS च/AVK अपरम्/SNV अन्यत्/SNV लाभम्/NP लाभान्तरम्/NP ततः/A अधिकम्/NP अस्ति/KP इति/AUD न/AN मन्यते/KP न/AN चिन्तयति/KP ।/PUNC किम्/SN च/AVK ,/PUNC यस्मिन्/SNV आत्मतत्त्वे/NP स्थितः/KN दुःखेन/NP शस्त्रनिपातादिलक्षणेन/NP गुरुणा/NV महता/NV अपि/A न/AN विचाल्यते/KP ।।/PUNC 
'/PUNC यत्र/A उपरमते/KP (/PUNC गीता/NS 6/PUNC ।/PUNC 20/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD अद्य/A आरभ्य/KKS यावद्भिः/NP विशेषणैः/NP विशिष्टः/NV आत्मावस्थाविशेषः/NV योगः/NP उक्तः/KN -/PUNC 
तम्/SNV विद्यात्/NP दुःखसंयोगवियोगम्/NP योगसंज्ञितम्/KN ।/PUNC
सः/SN निश्चयेन/NP योक्तव्यः/KN योगः/NP अनिर्विण्णचेतसा/NP ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 23/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 23/PUNC ।।/PUNC -/PUNC तम्/SN विद्यात्/NP विजानीयात्/NP दुःखसंयोगवियोगम्/NP दुःखैः/NP संयोगः/NP दुःखसंयोगः/NP ,/PUNC तेन/SN वियोगः/NP दुःखसंयोगवियोगः/NP,/PUNC तम्/SNV दुःखसंयोगवियोगम्/NP योगः/NP इति/AUD एव/INTF संज्ञितम्/KN विपरीतलक्षणेन/NP विद्यात्/NP विजानीयात्/NP इत्यर्थः/NP ।/PUNC योगफलम्/NP उपसंहृत्य/KKS पुनः/A अन्वारम्भेण/NP योगस्य/NP कर्तव्यता/KN उच्यते/KP निश्चयानिर्वेदयोः/NP योगसाधनत्वविधानार्थम्/NP ।/PUNC सः/SN यथा/ASD उक्तफलः/NP योगः/NP निश्चयेन/NP अध्यवसायेन/NP योक्तव्यः/KN अनिर्विण्णचेतसा/NP न/AN निर्विण्णम्/NP अनिर्विण्णम्/NP ।/PUNC किम्/SN तत्/SN ?/PUNC चेतः/KN तेन/SN निर्वेदरहितेन/NV चेतसा/NP चित्तेन/NP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC
किम्/SN च/AVK -/PUNC
सङ्कल्पप्रभवान्/NV कामान्/NP त्यक्त्वा/KKS सर्वान्/SNV अशेषतः/KN ।/PUNC
मनसा/NP एव/INTF इन्द्रियग्रामम्/NP विनियम्य/KKS समन्ततः/KN ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 24/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 24/PUNC ।।/PUNC -/PUNC संकल्पप्रभवान्/NP संकल्पः/NP प्रभवः/NP येषाम्/SNV कामानाम्/NP ते/SNV संकल्पप्रभवाः/NP कामाः/NP तान्/SN त्यक्त्वा/KKS परित्यज्य/KKS सर्वान्/SN अशेषतः/KN निर्लेपेन/NP ।/PUNC किम्/SN च/AVK ,/PUNC मनसा/NP एव/INTF विवेकयुक्तेन/NV इन्द्रियग्रामम्/NP इन्द्रियसमुदायम्/NP विनियम्य/KKS नियमनम्/NP कृत्वा/KKS समन्ततः/KN समन्तात्/NP ।।/PUNC

शनैः/KV शनैः/DV उपरमेत्/KP बुद्ध्या/NP धृतिगृहीतया/NP ।/PUNC
आत्मसंस्थम्/NV मनः/NP कृत्वा/KKS न/AN किञ्चित्/A अपि/A चिन्तयेत्/KP ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 25/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 25/PUNC ।।/PUNC -/PUNC शनैः/KV शनैः/DV न/AN सहसा/KV उपरमेत्/KP उपरतिम्/NP कुर्यात्/KP ।/PUNC कया/AP ?/PUNC बुद्ध्या/NP ।/PUNC किम्/SN विशिष्टया/NP ?/PUNC धृतिगृहीतया/NP धृत्या/NP धैर्येण/NP गृहीतया/NP धृतिगृहीतया/NP धैर्येण/NP युक्तया/NP इत्यर्थः/NP ।/PUNC आत्मसंस्थम्/NP आत्मनि/NP संस्थितम्/KN '/PUNC आत्मा/NP एव/INTF सर्वम्/SN न/AN ततः/A अन्यत्/SN किञ्चित्/A अस्ति/KP '/PUNC इति/AUD एवम्/AUD आत्मसंस्थम्/NP मनः/NP कृत्वा/KKS न/AN किञ्चित्/A अपि/A चिन्तयेत्/KP ।/PUNC एषः/SNV योगस्य/NP परमः/NV विधिः/NP ।।/PUNC
तत्र/A एवम्/AUD आत्मसंस्थम्/NV मनः/NP कर्तुम्/KKS प्रवृत्तः/KN योगी/NP -/PUNC
यतः/KN यतः/DV निश्चरति/KP मनः/NP चञ्चलम्/NV अस्थिरम्/NV ।/PUNC
ततः/A ततः/DV नियम्य/KKS एतत्/SNV आत्मनि/NP एव/INTF वशम्/NP नयेत्/KP ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 26/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 26/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यतः/KN यतः/DV यस्मात्/SNV यस्मात्/DV निमित्तात्/NP शब्दादेः/NP निश्चरति/KP निर्गच्छति/KP स्वभावदोषात्/NP मनः/NP चञ्चलम्/NV अत्यर्थम्/NP चलम्/NP ,/PUNC अतः/A एव/INTF अस्थिरम्/NP ,/PUNC ततः/A ततः/DV तस्मात्/SNV तस्मात्/DV शब्दादेः/NP निमित्तात्/NP नियम्य/KKS तत्/SN तत्/DV निमित्तम्/NP याथात्म्यनिरूपणेन/NP आभासीकृत्य/KKS वैराग्यभावनया/NP च/AVK एतत्/SNV मनः/NP आत्मनि/NP एव/INTF वशम्/NP नयेत्/KP आत्मवश्यताम्/NP आपादयेत्/KP ।/PUNC एवम्/AUD योगाभ्यासबलात्/NP योगिनः/NP आत्मनि/NP एव/INTF प्रशाम्यति/KP मनः/NP ।।/PUNC
प्रशान्त/NV मनसम्/NP हि/A एनम्/SNV योगिनम्/NP सुखम्/NP उत्तमम्/NV ।/PUNC
उपैति/KP शान्तरजसम्/NV ब्रह्मभूतम्/NV अकल्मषम्/NV ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 27/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 27/PUNC ।।/PUNC -/PUNC प्रशान्तमनसम्/NP प्रकर्षेण/NV शान्तम्/NV मनः/NP यस्य/SN सः/SNV प्रशान्तमनाः/NP तम्/SNV प्रशान्तमनसम्/NP हि/A एनम्/SNV योगिनम्/NP सुखम्/NP उत्तमम्/NV निरतिशयम्/NP उपैति/KP उप/AUP गच्छति/KP शान्तरजसम्/NP प्रक्षीणमोहादिक्लेशरजसम्/NP इत्यर्थः/NP ,/PUNC ब्रह्मभूतम्/NP जीवन्मुक्तम्/NP '/PUNC ब्रह्म/NS एव/INTF सर्वम्/SN '/PUNC इति/AUD एवम्/AUD निश्चयवन्तम्/NV ब्रह्मभूतम्/NV अकल्मषम्/NV धर्माधर्मादिवर्जितम्/NV ।।/PUNC
युञ्जन्/KNV एवम्/AUD सदा/A आत्मानम्/NP योगी/NP विगतकल्मषः/NV ।/PUNC
सुखेन/NP ब्रह्मसंस्पर्शम्/NP अत्यन्तम्/NV सुखम्/NP अश्नुते/KP ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 28/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 28/PUNC ।।/PUNC -/PUNC युञ्जन्/KNV एवम्/AUD यथा/ASD उक्तेन/KN क्रमेण/NP योगी/NP योगान्तरायवर्जितः/KN सदा/A सर्वदा/A आत्मानम्/NP विगतकल्मषः/NP विगतपापः/NP ,/PUNC सुखेन/NP अनायासेन/NP ब्रह्मसंस्पर्शम्/NP ब्रह्मणा/NS परेण/NP संस्पर्शो/NP यस्य/SN तत्/SNV ब्रह्मसंस्पर्शम्/NP सुखम्/NP अत्यन्तम्/NV अन्तम्/A अतीत्य/KKS वर्तत/KP इति/AUD अत्यन्तम्/NV उत्कृष्टम्/NV निरतिशयम्/NP अश्नुते/KP व्याप्नोति/KP ।।/PUNC
इदानीम्/A योगस्य/NP यत्/SSN फलम्/NP ब्रह्मैकत्वदर्शनम्/NV सर्वसंसारविच्छेदकारणम्/NV तत्/SSN प्रदर्श्यते/KP -/PUNC
सर्वभूतस्थम्/NV आत्मानम्/NP सर्वभूतानि/NV च/AVK आत्मनि/NP ।/PUNC
ईक्षते/KP योगयुक्तात्मा/NP सर्वत्र/A समदर्शनः/NP ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 29/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 29/PUNC ।।/PUNC -/PUNC सर्वभूतस्थम्/KN सर्वेषु/SNV भूतेषु/NP स्थितम्/KN स्वम्/SN आत्मानम्/NP सर्वभूतानि/NP च/AVK आत्मनि/NP ब्रह्मादीनि/NP स्तम्बपर्यन्तानि/NP च/APY सर्वभूतानि/SNV आत्मनि/NP एकताम्/NP गतानि/NP ईक्षते/KP पश्यति/KP योगयुक्तात्मा/NP समाहितान्तःकरणः/NP सर्वत्र/A समदर्शनः/NP सर्वेषु/SNV ब्रह्मादिस्थावरान्तेषु/NP विषमेषु/NP सर्वभूतेषु/NP समम्/AUP निर्विशेषम्/NP ब्रह्मात्मैकत्वविषयम्/NV दर्शनम्/NP ज्ञानम्/NP यस्य/SN सः/SN सर्वत्र/A समदर्शनः/NP ।।/PUNC
एतस्य/SNV आत्मैकत्वदर्शनस्य/NP फलम्/NP उच्यते/KP -/PUNC
यः/SSN माम्/SN पश्यति/KP सर्वत्र/A सर्वम्/SN च/AVK मयि/SN पश्यति/KP ।/PUNC
तस्य/SN अहम्/SN न/AN प्रणश्यामि/KP सः/SSN च/AVK मे/SN न/AN प्रणश्यति/KP ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 30/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 30/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यः/SN माम्/SN पश्यति/KP वासुदेवम्/NS सर्वस्य/SNV आत्मानम्/NP सर्वत्र/A सर्वेषु/SNV भूतेषु/NP सर्वम्/SNV च/AVK ब्रह्मादिभूतजातम्/NP मयि/SN सर्वात्मनि/NP पश्यति/KP ,/PUNC तस्य/SN एवम्/AUD आत्मैकत्वदर्शिनः/NV अहम्/SN ईश्वरः/NP न/AN प्रणश्यामि/KP न/AN परोक्षताम्/NP गमिष्यामि/KP ।/PUNC सः/SN च/AVK मे/SN न/AN प्रणश्यति/KP सः/SN च/AVK विद्वान्/NP मम/SNV वासुदेवस्य/NS न/AN प्रणश्यति/KP न/AN परोक्षः/NP भवति/KP ,/PUNC तस्य/SN च/AVK मम/SN च/AVK एकात्मकत्वात्/NP ;/PUNC स्वात्मा/NP हि/A नाम/NP आत्मनः/NP प्रियः/NV एव/INTF भवति/KP ,/PUNC यस्मात्/SN च/AVK अहम्/SN एव/INTF सर्वात्मैकत्वदर्शी/NV ।।/PUNC   
इति/AUD एतत्/SNV पूर्वश्लोकार्थम्/NP सम्यक्/NV दर्शनम्/NP अनूद्य/KKS तत्/SNV फलम्/NP मोक्षः/NP अभिधीयते/KP -/PUNC
सर्वभूतस्थितम्/KN यः/SN माम्/SN भजति/KP एकत्वम्/NP आस्थितः/KN ।/PUNC
सर्वथा/A वर्तमानः/KN अपि/A सः/SNV योगी/NP मयि/SN वर्तते/KP ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 31/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 31/PUNC ।।/PUNC -/PUNC सर्वथा/A सर्वप्रकारैः/NP वर्तमानः/KN अपि/A सम्यग्दर्शी/NV योगी/NP मयि/SNV वैष्णवे/NS परमे/NV पदे/NP वर्तते/KP ,/PUNC नित्यमुक्तः/KN एव/INTF सः/SN ,/PUNC न/AN मोक्षम्/NP प्रति/AUP केनचित्/A प्रतिबध्यते/KP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC
किम्/SN च/AVK अन्यत्/SN -/PUNC
आत्मौपम्येन/NP सर्वत्र/A समम्/AUP पश्यति/KP यः/SSN अर्जुन/NS ।/PUNC
सुखम्/NP वा/AVK यदि/A वा/APY दुःखम्/NP सः/SNV योगी/NP परमः/NV मतः/NP ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 32/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 32/PUNC ।।/PUNC -/PUNC आत्मौपम्येन/NP आत्मा/NP स्वयम्/SN एव/INTF उपमीयते/KP अनया/SN इति/AUD उपमा/NP तस्याः/SNV उपमायाः/NP भावः/NP औपम्यम्/NP तेन/SNV आत्मौपम्येन/NP ,/PUNC सर्वत्र/A सर्वभूतेषु/NP समम्/AUP तुल्यम्/NP पश्यति/KP यः/SSN अर्जुन/NS ,/PUNC सः/SSN च/AVK किम्/SN समम्/AUP पश्यति/KP इति/AUD उच्यते/KP -/PUNC यथा/AVK मम/SN सुखम्/NP इष्टम्/NP तथा/AVK सर्वप्राणिनाम्/NP सुखम्/NP अनुकूलम्/NP ।/PUNC वाशब्दः/NP च/AVK अर्थे/NP ।/PUNC यदि/AVK वा/AVK यत्/SN च/AVK दुःखम्/NP मम/SN प्रतिकूलम्/NP अनिष्टम्/NP यथा/AVK तथा/AVK सर्वप्राणिनाम्/NP दुःखम्/NP अनिष्टम्/NP प्रतिकूलम्/NP इतिAUD एवम्/AUD आत्मौपम्येन/NP सुखदुःखे/NP अनुकूलप्रतिकूले/NP तुल्यतया/NP सर्वभूतेषु/NP समम्/AUP पश्यति/KP ,/PUNC न/AN कस्यचित्/SN प्रतिकूलम्/KV आचरति/KP ,/PUNC अहिंसकः/NP इत्यर्थः/NP ।/PUNC यः/SSN एवम्/AUD अहिंसकः/NV सम्यग्दर्शननिष्ठः/NV सः/SNV योगी/NP परमः/NV उत्कृष्टः/NV मतः/NP अभिप्रेतः/KN सर्वयोगिनाम्/NP मध्ये/NP ।।/PUNC
एतस्य/SNV यथोक्तस्य/NV सम्यग्दर्शनलक्षणस्य/NV योगस्य/NP दुःखसंपाद्यताम्/NP आलक्ष्य/KKS शुश्रूषुः/NP ध्रुवम्/NV तत्प्राप्त्युपायम्/NP -/PUNC
अर्जुनः/NS उवाच/KP
यः/SN अयम्/SNV योगः/NP त्वया/SN प्रोक्तः/KN साम्येन/NP मधुसूदन/NS ।/PUNC
एतस्य/SN अहम्/SN न/AN पश्यामि/KP चञ्चलत्वात्/NP स्थितिम्/NP स्थिराम्/NP ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 33/PUNC ।।/PUNC


।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 33/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यः/SN अयम्/SNV योगः/NP त्वया/SN प्रोक्तः/KN साम्येन/NP समत्वेन/NP हे/ASMB मधुसूदन/NS तस्य/SNV योगस्य/NP अहम्/SN न/AN पश्यामि/KP न/AN उपलभे/KP ,/PUNC चञ्चलत्वात्/NP मनसः/NP ।/PUNC किम्/SN ?/PUNC स्थिराम्/NV अचलाम्/NV स्थितिम्/NP ।।/PUNC
प्रसिद्धम्/NV एतत्/SNV -/PUNC
चञ्चलम्/NV हि/A मनः/NP कृष्णः/NS प्रमाथि/KP बलवद्दृढम्/NP ।/PUNC
तस्य/SN अहम्/SN निग्रहम्/NP मन्ये/KP वायोः/NP इव/ASD सुदुष्करम्/NV ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 34/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 34/PUNC ।।/PUNC -/PUNC चञ्चलम्/NV हि/A मनः/NP कृष्णः/NS इति/AUD कृष्यतेः/KP विलेखनार्थस्य/NP रूपम्/NP ।/PUNC भक्तजनपापादिदोषाकर्षणात्/NP कृष्णः/NS ,/PUNC तस्य/SN संबुद्धिः/NP हे/ASMB कृष्ण/NS ।/PUNC हि/A यस्मात्/SN मनः/NP चञ्चलम्/NV न/AN केवलमत्यर्थम्/NP चञ्चलम्/NP ,/PUNC प्रमाथि/NP च/AVK प्रमथनशीलम्/NV ,/PUNC प्रमथ्नाति/KP शरीरम्/NP इन्द्रियाणि/NP च/AVK विक्षिपत्/NP सत्/A परवशीकरोति/KP ।/PUNC किम्/SN च/AVK ?/PUNC बलवत्/ASD प्रबलम्/NP ,/PUNC न/AN केनचित्/A नियन्तुम्/KKS शक्यम्/NP ,/PUNC दुर्निवारत्वात्/NP ।/PUNC किम्/SN च/AVK -/PUNC दृढम्/NP तन्तुनागवत्/ASD अच्छेद्यम्/KP ।/PUNC तस्य/SN एवंभूतस्य/ASD मनसः/NP अहम्/SN निग्रहम्/NP निरोधम्/NP मन्ये/KP वायोः/NP इव/ASD यथा/ASD वायोः/NP दुष्करः/NV निग्रहः/NP ततः/A अपि/A दुष्करम्/NP मन्ये/KP इति/AUD अभिप्रायः/NP ।।/PUNC
एवम्/AUD एतत्/SN यथा/ASD ब्रवीषि/KP -/PUNC
श्रीभगवान्/NP उवाच/KP
असंशयम्/NP महाबाहः/NV मनः/NP दुर्निग्रहम्/NV चलम्/NV ।/PUNC
अभ्यासेन/NP तु/A कौन्तेय/NP वैराग्येण/NP च/AVK गृह्यते//KP ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 35/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 35/PUNC ।।/PUNC -/PUNC असंशयम्/NP न/AN अस्ति/KP संशयः/NP मनः/NP दुर्निग्रहम्/NV चलम्/NV इति/AUD अत्र/A हे/ASMB महाबाहः/NV ।/PUNC किंतु/A अभ्यासेन/NP तु/A अभ्यासः/NP नाम/NP चित्तभूमौ/NP कस्यांचित्/SNV समानप्रत्ययावृत्तिः/NP चित्तस्य/NP ।/PUNC वैराग्येण/NP वैराग्यम्/NP नाम/NP दृष्टादृष्टेष्टभोगेषु/NP दोषदर्शनाभ्यासात्/NP वैतृष्ण्यम्/NP ।/PUNC तेन/SN च/AVK वैराग्येण/NP गृह्यते/KP विक्षेपरूपः/ASD प्रचारः/NP चित्तस्य/NP ।/PUNC एवम्/AUD तत्/SNV मनः/NP गृह्यते/KP निगृह्यते/KP निरुध्यते/KP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC
यः/SN पुनः/A असंयतात्मा/NP ,/PUNC तेन/SN -/PUNC
असंयतात्मना/NV योगः/NP दुष्प्रापः/NP इति/AUD मे/SN मतिः/NP ।/PUNC
वश्यात्मना/NP तु/A यतता/SN शक्यः/NP अवाप्तुम्/KKS उपायतः/KN ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 36/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 36/PUNC ।।/PUNC -/PUNC असंयतात्मना/NP अभ्यासवैराग्याभ्याम्/NP असंयतः/KN आत्मा/NP अन्तःकरणम्/NP यस्य/SN सः/SN अयम्/SNV असंयतात्मा/NP तेन/SNV असंयतात्मना/NP योगः/NP दुष्प्रापः/NP दुःखेन/NP प्राप्यत/KP इति/AUD मे/SN मतिः/NP ।/PUNC यः/SSN तु/A पुनः/A वश्यात्मा/NP अभ्यासवैराग्याभ्याम्/NP वश्यत्वम्/NP आपादितः/KN आत्मा/NP मनः/NP यस्य/SN सः/SSN अयम्/SSN वश्यात्मा/NP तेन/SNV वश्यात्मना/NP तु/A यतता/SN भूयः/A अपि/A प्रयत्नम्/NP कुर्वता/KNV शक्यः/NP अवाप्तुम्/KKS योगः/NP उपायतः/KN यथा/ASD उक्तात्/NP उपायात्/NP ।।/PUNC
तत्र/A योगाभ्यासाङ्गीकरणेन/NP इहलोकपरलोकप्राप्तिनिमित्तानि/NV कर्माणि/NP संन्यस्तानि/NP ,/PUNC योगसिद्धिफलम्/NP च/AVK मोक्षसाधनम्/NP सम्यक्/NV दर्शनम्/NP न/AN प्राप्तम्/KN इति/AUD ,/PUNC योगी/NP योगमार्गात्/NP मरणकाले/NP चलितचित्तः/KN इति/AUD तस्य/SN नाशम्/NP आशङ्क्य/KKS 
अर्जुनः/NS उवाच/KP -/PUNC
अयतिः/NP श्रद्धयोपेतः/KN योगात्/NP चलित/NV मानसः/NP ।/PUNC
अप्राप्य/KKS योगसंसिद्धिम्/NV काम्/NP गतिम्/NP कृष्ण/NS गच्छति/KP ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 37/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 37/PUNC ।।/PUNC -/PUNC अयतिः/NP अप्रयत्नवान्/KN योगमार्गे/NP श्रद्धया/NP आस्तिक्यबुद्ध्या/NP च/APY उपेतः/KN योगात्/NP अन्तकाले/NP च/AVK चलितम्/NV मानसम्/NP मनः/NP यस्य/SN सः/SN चलितमानसः/NV भ्रष्टस्मृतिः/NV सः/SN अप्राप्य/KKS योगसंसिद्धिम्/NP योगफलम्/NP सम्यक्/NV दर्शनम्/NP काम्/NP गतिम्/NP हे/ASMB कृष्ण/NS गच्छति/KP ।।/PUNC
कच्चित्/A न/AN उभयविभ्रष्टः/KN छिन्नाभ्रम्/NP इव/ASD नश्यति/KP ।/PUNC
अप्रतिष्ठः/NP महाबाहः/NV विमूढः/NV ब्रह्मणः/NS पथि/NP ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 38/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 38/PUNC ।।/PUNC -/PUNC कच्चित्/A किम्/SN न/AN उभयविभ्रष्टः/KN कर्ममार्गात्/NP योगमार्गात्/NP च/APY विभ्रष्टः/KN सन्/A छिन्नाभ्रम्/NP इव/ASD नश्यति/KP ,/PUNC किम्/SN वा/AVK न/AN नश्यति/KP अप्रतिष्ठः/KN निराश्रयः/NP हे/ASMB महाबाहः/NV विमूढः/NP सन्/KKS ब्रह्मणः/NS पथि/NP ब्रह्मप्राप्तिमार्गे/NP ।।/PUNC
एतत्/SN मे/SN संशयम्/NP कृष्ण/NS च्छेत्तुम्/KKS अर्हसि/KP अशेषतः/KN ।/PUNC
त्वदन्यः/SN संशयस्य/NP अस्य/SN च्छेत्ता/NP न/AN हि/A उपपद्यते/KP ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 39/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 39/PUNC ।।/PUNC -/PUNC एतत्/SN मे/SN मम/SN संशयम्/NP कृष्ण/NS च्छेत्तुम्/KKS अपनेतुम्/KKS अर्हसि/KP अशेषतः/KN ।/PUNC त्वदन्यः/SN त्वत्तः/KN अन्यः/SNV ऋषिः/NP देवः/NP वा/APY च्छेत्ता/NP नाशयिता/NP संशयस्य/NP अस्य/SN न/AN हि/A यस्मात्/SN उपपद्यते/KP न/AN संभवति/KP ।/PUNC अतः/A त्वम्/SN एव/INTF च्छेत्तुम्/KKS अर्हसि/KP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC
श्रीभगवान्/NP उवाच/KP
पार्थ/NS न/AN एव/INTF इह/A नामुत्र/A विनाशः/NP तस्य/SN विद्यते/KP ।/PUNC
नहि/AN कल्याणकृत्/NP कश्चित्/SNV दुर्गतिम्/NP तात/NP गच्छति/KP ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 40/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 40/PUNC ।।/PUNC -/PUNC हे/ASMB पार्थ/NS न/AN एव/INTF इह/A लोके/NP नामुत्र/A परस्मिन्/SN वा/APY लोके/NP विनाशः/NP तस्य/SN विद्यते/KP न/AN अस्ति/KP ।/PUNC नाशः/NP नाम/NP पूर्वस्मात्/A हीनजन्मप्राप्तिः/NP सः/SN योगभ्रष्टस्य/NP न/AN  अस्ति/KP ।/PUNC न/AN हि/A यस्मात्/SN कल्याणकृत्/NP शुभकृत्/NP कश्चित्/SNV दुर्गतिम्/NV कुत्सिताम्/NV गतिम्/NP हे/ASMB तात/NP ,/PUNC तनोति/KP आत्मानम्/NP पुत्ररूपेण/ASD इति/AUD पिता/NP तातः/NP उच्यते/KP ।/PUNC पिता/NP एव/INTF पुत्रः/NP इति/AUD पुत्रः/NP अपि/A तातः/NP उच्यते/KP ।/PuNC शिष्यः/NP अपि/A पुत्रः/NP उच्यते/KP ।/PUNC यतः/A न/AN गच्छति/KP ।।/PUNC
किम्/SN तु/A अस्य/SN भवति/KP ?/PUNC -/PUNC
प्राप्य/KKS पुण्यकृताम्/NP लोकानुषित्वा/KKS शाश्वतीः/NV समाः/NP ।/PUNC

शुचीनाम्/NV श्रीमताम्/NP गेहे/NP योगभ्रष्टः/KN अभिजायते/KP ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 41/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 41/PUNC ।।/PUNC -/PUNC योगमार्गे/NP प्रवृत्तः/KN संन्यासी/NP सामर्थ्यात्/NP प्राप्य/KKS गत्वा/KKS पुण्यकृताम्/NV अश्वमेधादियाजिनाम्/NV लोकान्/NP ,/PUNC तत्र/A च/AVK उषित्वा/KKS वासम्/NP अनुभूय/KKS शाश्वतीः/NV नित्याः/NV समाः/NP संवत्सरान्/NP ,/PUNC तद्भोगक्षये/NP शुचीनाम्/NP यथा/AVK उक्तकारिणाम्/NV श्रीमताम्/NV विभूतिमताम्/NP गेहे/NP गृहे/NP योगभ्रष्टः/KN अभिजायते/KP ।।/PUNC
अथवा/AVK योगिनाम्/NP एव/INTF कुले/NP भवति/KP धीमताम्/NP ।/PUNC
एतत्/SN हि/A दुर्लभतरम्/NV लोके/NP जन्म/NP यत्/SN ईदृशम्/ASD ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 42/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 42/PUNC ।।/PUNC -/PUNC अथवा/AVK श्रीमताम्/NP कुलात्/NP अन्यस्मिन्/SNV योगिनाम्/NP एव/INTF दरिद्राणाम्/NP कुले/NP भवति/KP जायते/KP धीमताम्/NP बुद्धिमताम्/NP ।/PUNC एतत्/SN हि/A जन्म/NP ,/PUNC यत्/SNV दरिद्राणाम्/NP योगिनाम्/NP कुले/NP ,/PUNC दुर्लभतरम्/NP दुःखलभ्यतरम्/NP पूर्वम्/A अपेक्ष्य/KKS लोके/NP जन्म/NP यत्/SN ईदृशम्/ASD यथा/ASD उक्तविशेषणे/NV कुले/NP ।।/PUNC
यस्मात्/SN -/PUNC
तत्र/A तम्/SNV बुद्धिसंयोगम्/NP लभते/KP पौर्वदेहिकम्/NP ।/PUNC
यतते/SN च/AVK ततः/A भूयः/A संसिद्धौ/NP कुरुनन्दन/NP ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 43/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 43/PUNC ।।/PUNC -/PUNC तत्र/A योगिनाम्/NP कुले/NP तम्/SNV बुद्धिसंयोगम्/NP बुद्ध्या/NP संयोगम्/NP बुद्धिसंयोगम्/NP लभते/KP पौर्वदेहिकम्/NP पूर्वस्मिन्/SNV देहे/NP भवम्/KP पौर्वदेहिकम्/NP ।/PUNC यतते/SN च/AVK प्रयत्नम्/NP च/AVK करोति/KP ततः/A तस्मात्/SNV पूर्वकृतात्/NP संस्कारात्/NP भूयः/A बहुतरम्/NV संसिद्धौ/NP संसिद्धिनिमित्तम्/KN हे/ASMB कुरुनन्दन/NP ।।/PUNC
कथम्/A पूर्वदेहबुद्धिसंयोगः/NP इति/AUD तत्/SN उच्यते/KP -/PUNC
पूर्वाभ्यासेन/NP तेन/SN एव/INTF ह्रियते/KP हि/A अवशः/NP अपि/A सः/SN ।/PUNC
जिज्ञासुः/NP अपि/A योगस्य/NP शब्दब्रह्मातिवर्तते/KP ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 44/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 44/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यः/SSN पूर्वजन्मनि/NP कृतः/KN अभ्यासः/NP सः/SSN पूर्वाभ्यासः/NP ,/PUNC तेन/SN एव/INTF बलवता/NV ह्रियते/KP संसिद्धौ/KN हि/A यस्मात्/SN अवशः/NP अपि/AVK सः/SN योगभ्रष्टः/KN ;/PUNC न/AN कृतम्/KN चेत्/A योगाभ्यासजात्/NV संस्कारात्/NP बलवत्तरम्/NV अधर्मादिलक्षणम्/NV कर्म/NP ,/PUNC तदा/AVK योगाभ्यासजनितेन/NV संस्कारेण/NP ह्रियते/KP ;/PUNC अधर्मः/NP चेत्/A बलवत्तरः/NP कृतः/KN ,/PUNC तेन/SN योगजः/NP अपि/A संस्कारः/NP अभिभूयत/KP एव/INTF ,/PUNC तत्क्षये/NP तु/A योगजः/NV संस्कारः/NP स्वयम्/SN एव/INTF कार्यम्/NP आरभते/KP ,/PUNC न/AN दीर्घकालस्थस्य/NP अपि/A विनाशः/NP तस्य/SN अस्ति/KP इत्यर्थः/NP ।/PUNC अतः/A जिज्ञासुः/NP अपि/A योगस्य/NP स्वरूपम्/NP ज्ञातुम्/KKS इच्छन्/KNV अपि/A योगमार्गे/NP प्रवृत्तः/KN संन्यासी/NP योगभ्रष्टः/KN ,/PUNC सामर्थ्यात्/NP सः/SN अपि/A शब्दब्रह्म/NP वेदोक्तकर्मानुष्ठानफलम्/NP अतिवर्तते/KP अतिक्रामति/KP अपाकरिष्यति/KP ;/PUNC किम्/SN उत/AVK बुद्ध्वा/KKS यः/SNV योगम्/NP तन्निष्ठः/KN अभ्यासम्/NP कुर्यात्/KP ।।/PUNC
कुतः/A च/AVK योगित्वम्/NP श्रेयः/NP इति/AUD -/PUNC
प्रयत्नात्/NP यतमानः/KN तु/A योगी/NP संशुद्धकिल्बिषः/NV ।/PUNC
अनेकजन्मसंसिद्धः/KN ततः/A याति/KP पराम्/NV गतिम्/NP ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 45/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 45/PUNC ।।/PUNC -/PUNC प्रयत्नात्/NP यतमानः/KN ,/PUNC अधिकम्/NV यतमानः/KN इत्यर्थः/PUNC ।/PUNC तत्र/A योगी/NP विद्वान्/NP संशुद्धकिल्बिषः/NV विशुद्धकिल्बिषः/NV संशुद्धपापः/NP अनेकजन्मसंसिद्धः/KN अनेकेषु/SNV जन्मसु/NP किञ्चित्/A किञ्चित्/DV संस्कारजातम्/KN उपचित्य/KKS तेन/SN उपचितेन/NP अनेकजन्मकृतेन/NP संसिद्धः/KN अनेकजन्मसंसिद्धः/NP ततः/A लब्धसम्यक्/NV दर्शनः/NP सन्/KKS याति/KP पराम्/NV प्रकृष्टाम्/NV गतिम्/NP ।।/PUNC
यस्मात्/SSN एवम्/AUD तस्मात्/SSN -/PUNC
तपस्विभ्यः/NP अधिकः/NV योगी/NP ज्ञानिभ्यः/NP अपि/A मतः/NP अधिकः/NV ।/PUNC
कर्मिभ्यः/NP च/AVK अधिकः/NV योगी/NP तस्मात्/SN योगी/NP भव/KP अर्जुन/NS ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 46/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 46/PUNC ।।/PUNC -/PUNC तपस्विभ्यः/NP अधिकः/NV योगी/NP ,/PUNC ज्ञानिभ्यः/NP अपि/A ज्ञानम्/NP अत्र/A शास्त्रार्थपाण्डित्यम्/NP ,/PUNC तद्वद्भ्यः/NP अपि/A मतः/NP ज्ञातः/KN अधिकः/NV श्रेष्ठः/NP इति/AUD ।/PUNC कर्मिभ्यः/NP ,/PUNC अग्निहोत्रादि/NV कर्म/NP ,/PUNC तद्वद्भ्यः/NP अधिकः/NV योगी/NP विशिष्टः/KN यस्मात्/SSN तस्मात्/SSN योगी/NP भव/KP अर्जुन/NS ।।/PUNC
योगिनाम्/NP अपि/A सर्वेषाम्/SNV मद्गतेन/NP अन्तरात्मना/NP ।/PUNC
श्रद्धावान्/NP भजते/KP यः/SSN माम्/SN सः/SSN मे/SN युक्ततमः/NV मतः/NP ।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 47/PUNC ।।/PUNC
इति/AUD श्रीमद्भगवद्गीतासु/NS उपनिषत्सु/NS ब्रह्मविद्यायाम्/NS योगशास्त्रे/NS श्रीकृष्णार्जुनसंवादे/NP ध्यानयोगः/NS नाम/NP षष्ठः/SMKP अध्यायः/NP ।।/PUNC
।।/PUNC 6/PUNC ./PUNC 47/PUNC ।।/PUNC -/PUNC योगिनाम्/NP अपि/A सर्वेषाम्/SNV रुद्रादित्यादिध्यानपराणाम्/NP मध्ये/NP मद्गतेन/NP मयि/SNV वासुदेवे/NS समाहितेन/NV अन्तरात्मना/NP अन्तःकरणेन/NP श्रद्धावान्/NP श्रद्दधानः/NP सन्/KKS भजते/KP सेवते/KP यः/SSN माम्/SN ,/PUNC सः/SSN मे/SN मम/SN युक्ततमः/NV अतिशयेन/NV युक्तः/KN मतः/NP अभिप्रेतः/KN इति/AUD ।।/PUNC
इति/AUD श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्यस्य/NV श्रीगोविन्दभगवत्पूज्यपादशिष्यस्य/NV श्रीमत्शङ्करभगवतः/NP कृतौ/KN श्रीमद्भगवद्गीताभाष्ये/NP षष्ठः/SMKP अध्यायः/NP ।।/PUNC 
